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हिमाचल: निर्विरोध पंचायत चुनने पर 25 लाख, जिला परिषद चुनने पर मिलेगा एक करोड़; संशोधित दिशा-निर्देश लागू
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 21 Apr 2026 05:57 PM IST
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सार
हिमाचल प्रदेश में किसी ग्राम पंचायत में प्रधान, उपप्रधान सहित सभी सदस्य निर्विरोध चुने जाते हैं, तो उस पंचायत को 25 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। इसी प्रकार पंचायत समिति स्तर पर सभी सदस्य, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्विरोध चुने जाने पर 50 लाख रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...
पंचायत चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनावों में ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर सभी पदाधिकारियों के निर्विरोध चुने जाने पर संबंधित संस्थाओं को अनुदान राशि को डेढ़ से सात गुणा कर दिया है। किसी ग्राम पंचायत में प्रधान, उपप्रधान सहित सभी सदस्य निर्विरोध चुने जाते हैं, तो उस पंचायत को 25 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। पहले यह अनुदान राशि 10 लाख थी। नोटिफिकेशन देखें
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इसी प्रकार पंचायत समिति स्तर पर सभी सदस्य, अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्विरोध चुने जाने पर 50 लाख रुपये का प्रोत्साहन दिया जाएगा, पहले यह 5 लाख रुपये राशि निर्धारित थी। वहीं जिला परिषद के सभी सदस्यों के साथ अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के निर्विरोध चुने जाने पर एक करोड़ रुपये रुपये अनुदान की राशि दी जाएगी। पहले 15 लाख रुपये राशि निर्धारित थी। इस संबंध में 20 अप्रैल 2026 अधिसूचना को निरस्त करते हुए संशोधित दिशा-निर्देश लागू कर दिए गए हैं।
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सरकार का मानना है कि इस पहल से चुनावी प्रतिस्पर्धा के बजाय आपसी सहमति और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इससे चुनावी खर्च में कमी आएगी और विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हो सकेंगे। विभाग ने सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें, ताकि अधिक से अधिक पंचायतें इसका लाभ उठा सकें। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि यह योजना आगामी पंचायती राज संस्थाओं के आम चुनावों के दौरान लागू होगी। केवल उन्हीं पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों को यह पुरस्कार मिलेगा, जहां सभी पदाधिकारी बिना किसी विरोध के निर्वाचित होंगे।
विभाग के अतिरिक्त निदेशक ने सभी जिला पंचायत अधिकारियों और खंड विकास अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वे इस योजना की जानकारी जन-जन तक पहुंचाएं। साथ ही बजट शाखा को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। यह योजना ग्रामीण स्तर पर सहमति की राजनीति को बढ़ावा देने के साथ-साथ विकास कार्यों को गति देने में सहायक सिद्ध हो सकती है। हालांकि कुछ लोग इसे लोकतांत्रिक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाला कदम भी मान रहे हैं।

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