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हिमाचल: कुगती जोत लांघ लाहौल पहुंचा स्विट्जरलैंड का बेंजामिन, गाइड के साथ पार की खतरनाक चोटी
दिनेश जस्पा, संवाद न्यूज एजेंसी, उदयपुर (लाहौल-स्पीति)।
Published by: Krishan Singh
Updated Fri, 05 Jun 2026 05:00 AM IST
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सार
आमतौर पर भेड़पालक भी 15 जून के बाद ही इस रूट पर कदम रखते हैं। बेंजामिन ने गाइड के साथ 3 दिन में यह जोखिम भरी यात्रा पूरी की।
स्विट्जरलैंड का बेंजामिन।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
16,800 फीट ऊंचे बर्फीले कुगती जोत को पार कर स्विट्जरलैंड के ट्रैकर बेंजामिन मंगलवार को लाहौल पहुंचे। अक्तूबर से बंद इस खतरनाक दर्रे को पार करने वाला वह इस सीजन का पहला ट्रैकर है। आमतौर पर भेड़पालक भी 15 जून के बाद ही इस रूट पर कदम रखते हैं। बेंजामिन ने गाइड के साथ 3 दिन में यह जोखिम भरी यात्रा पूरी की। बुधवार को वह लाहौल के लोट गांव पहुंचे। बेंजामिन ने वारपा पंचायत के नव निर्वाचित उपप्रधान प्रभात नलवा से मुलाकात कर अपनी यात्रा का जिक्र किया।
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बेंजामिन ने बताया कि वह कुगती गांव से पैदल निकले थे। जोत पर बहुत बर्फ है। रास्ते में एक-दो पड़ाव लेने पड़े। कठिन रास्तों से होकर तीसरे दिन जाकर लाहौल पहुंचे। गाइड लाहौल पहुंचने के बाद अपने घर लौट गया है। स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार बर्फबारी के चलते कुगती जोत करीब आठ माह तक बंद रहता है। चंबा के भेड़पालक 15 जून के बाद जब अपने पारंपरिक चरागाहों के लिए लाहौल की ओर रुख करते हैं, तभी इस रास्ते से आवाजाही शुरू होती है। कुगती जोत लाहौल और चंबा को जोड़ने वाला धार्मिक मार्ग है। श्रद्धालु इसी रास्ते से होकर मणिमहेश झील पहुंचते हैं। अक्तूबर में बर्फबारी शुरू होते ही यह दर्रा सात-आठ माह के लिए बंद हो जाता है।
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