Himachal News: जगत सिंह नेगी ने कहा- गांधी न होते तो आजाद न होते, सत्ती बोले- क्या चरखे से मिल जाती आजादी
बुधवार को सदन में बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा - महात्मा गांधी न होते तो हम आजाद न होते। इस पर सतपाल सिंह सत्ती ने सदन में कहा कि जब आप महात्मा गांधी पर ज्यादा बोलते हैं, तब हम भी कहते हैं, क्या चरखा चलाने से मिल आजादी मिल सकती है। पढ़ें पूरी खबर...
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महात्मा गांधी पर बुधवार को सदन खूब तपा। शून्यकाल के बाद बजट पर चर्चा शुरू हुई तो पहले बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा - महात्मा गांधी न होते तो हम आजाद न होते। भाजपा की केंद्र सरकार ने मनरेगा से महात्मा गांधी नाम हटा दिया। वीबीजी राम जी को इस तरह से हिंदी और अंग्रेजी को जोड़कर लिखा कि इसे गरम जी पढ़ा जाता है। स्कीम में इस तरह से नाम जबरदस्ती डाल दिया। योजना बनानी ही थी तो राम के नाम से बनाते। इनकी विचारधारा के लोग विदेश में पढ़ते हैं, पर अंग्रेजी का विरोध करते हैं। अंग्रेजी के तो ये दुश्मन हैं। उन्होंने योजना के नाम की ओर इशारा किया।
इस पर सतपाल सिंह सत्ती ने सदन में कहा कि प्रधानमंत्री महात्मा गांधी को बहुत सम्मान देते हैं। वे राष्ट्रपिता हैं। उन्होंने नेगी की ओर पलटवार कर कहा - जब आप महात्मा गांधी पर ज्यादा बोलते हैं, तब हम भी कहते हैं, क्या चरखा चलाने से मिल आजादी मिल सकती है। आजादी के आंदोलन में बहुत से स्वतंत्रता सेनानियों का योगदान रहा है। वीर सावरकर के तीनों भाई काला पानी में रहे। एक भी कांग्रेस के नेता नाम बताएं, जिसने काला पानी की सजा काटी हो। इस पर दोपों पक्षों में खूब नोकझोंक होती रही।
बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए बुधवार राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कहा कि जो बजट पेश हुआ है, यह अपनी किस्म का पहला बजट है। किसानों, पशुपालकों,भेड़पालकों आदि को ध्यान में रखकर बजट तैयार किया गया है। पिछली सरकार ने बिजली प्रोजेक्टाें पर रॉयल्टी को चार और पांच प्रतिशत पर लाया। जीएसटी भी केंद्र सरकार छीनकर ले गई।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि महात्मा गांधी यहां आठ बार आए। वह साक्षात इस सदन में आए थे। महात्मा गांधी, मोती लाल नेहरू, पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भी यहां स्पीच दिए।
तेरा वजूद मिट जाएगा मुझे मिटाते-मिटाते : बजट पर चर्चा के दौरान शेरो-शायरी का दौर भी चला। बागवानी मंत्री ने एक शेर पढ़ा - शीशे को आईना दिखाओ तो पारा बन जाता है। इनको आईना दिखाओ तो पारा चढ़ जाता है। इस पर जयराम ठाकुर ने पलटकर शेर पढ़ा - मेरे हालात पर नहीं, मेरे किरदार पर फैसला करो। तेरा वजूद मिट जाएगा मुझे मिटाते-मिटाते।