{"_id":"6a2a625eddac28a6b90e3952","slug":"himachal-folk-singer-inder-jeet-to-receive-prestigious-ustad-bismillah-khan-yuva-puraskar-2026-06-11","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हिमाचल: राष्ट्रीय सम्मान से नवाजे जाएंगे हिमाचली लोकगायक इंद्रजीत, मिलेगा उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हिमाचल: राष्ट्रीय सम्मान से नवाजे जाएंगे हिमाचली लोकगायक इंद्रजीत, मिलेगा उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Ankesh Dogra
Updated Thu, 11 Jun 2026 12:53 PM IST
विज्ञापन
सार
हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध लोकगायक इंद्रजीत का चयन प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए किया गया है। संगीत नाटक अकादमी द्वारा दिया जाने वाला यह राष्ट्रीय सम्मान उन्हें हिमाचली लोकसंगीत, लोकसंस्कृति और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रदान किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...
हिमाचली लोक गायक इंद्रजीत
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के लिए गर्व की बात है कि प्रदेश के प्रसिद्ध लोक गायक इंद्रजीत का चयन देश के प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार के लिए किया गया है। यह सम्मान भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के अधीन स्वायत्तशासी संस्था संगीत नाटक अकादमी द्वारा भारतीय कला और संस्कृति के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले युवा कलाकारों को प्रदान किया जाता है।
संगीत नाटक अकादमी की ओर से जारी घोषणा के अनुसार इंद्रजीत को हिमाचली लोकसंगीत, लोकसंस्कृति और पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए इस राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। उनके चयन की खबर सामने आते ही प्रदेश के सांस्कृतिक और कला जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला कुल्लू के रहने वाले इंद्रजीत ने बिना किसी औपचारिक संगीत प्रशिक्षण के अपनी प्रतिभा और मेहनत के दम पर लोकगायन के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई है। उनके गीतों में हिमाचल की लोक परंपराएं, स्थानीय बोलियां, संस्कृति और पहाड़ी जीवन की झलक देखने को मिलती है। उनके लोकप्रिय गीत 'लाड़ी शाऊंणी', 'पाखली माणु', 'बुधूआ मामा', 'तिरछी नज़रे' और 'सोलमा लाड़ी' देश-विदेश में बसे हिमाचलियों के बीच बेहद लोकप्रिय हैं।
लोकसंगीत के साथ-साथ इंद्रजीत ने सामाजिक सरोकारों को भी अपने गीतों के माध्यम से प्रभावी ढंग से उठाया है। पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति, महिला सम्मान और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर आधारित उनके गीतों को व्यापक सराहना मिली है। उनका चर्चित गीत 'पाखली माणु' मोनाल पक्षी संरक्षण को लेकर जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ, जबकि “चिट्टा मुक्त हिमाचल” और “मता करदे नशा” जैसे गीतों ने युवाओं को नशे के खिलाफ प्रेरित किया।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार भारतीय कला और संस्कृति के क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं को दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है। इंद्रजीत को यह सम्मान मिलना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति और लोकसंगीत को भी राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान माना जा रहा है। इस उपलब्धि पर प्रदेश के सांस्कृतिक, सामाजिक और कला जगत से जुड़े लोगों ने इंद्रजीत को बधाई देते हुए इसे हिमाचली लोकसंगीत के लिए गौरव का क्षण बताया है।
उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार भारतीय कला और संस्कृति के क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं को दिया जाने वाला एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है। इंद्रजीत को यह सम्मान मिलना न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि हिमाचल प्रदेश की समृद्ध लोकसंस्कृति और लोकसंगीत को भी राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान माना जा रहा है। इस उपलब्धि पर प्रदेश के सांस्कृतिक, सामाजिक और कला जगत से जुड़े लोगों ने इंद्रजीत को बधाई देते हुए इसे हिमाचली लोकसंगीत के लिए गौरव का क्षण बताया है।