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Himachal High Court: प्रशासनिक देरी से कर्मचारियों के लाभ नहीं रोक सकती सरकार, जानें हाईकोर्ट के सभी फैसले

Sun, 19 Jul 2026 09:46 AM IST
Ankesh Dogra संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 19 Jul 2026 09:46 AM IST
सार

हिमाचल हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रशासनिक देरी के कारण अनुबंध कर्मचारियों को नियमितीकरण और वित्तीय लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने शास्त्री शिक्षकों को 1 अक्टूबर 2024 से नियमित मानते हुए वरिष्ठता और सभी वित्तीय लाभ देने के निर्देश दिए हैं।

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अनुबंध कर्मचारियों के मामले में स्पष्ट किया है कि यदि कोई कर्मचारी सरकार की उदारीकृत नीति के तहत दो साल का अनुबंध कार्यकाल पूरा कर चुका है, तो उसे प्रशासनिक देरी के बजाय पात्रता की तिथि से ही नियमित किया जाना चाहिए। प्रशासनिक देरी के कारण कर्मचारियों को वित्तीय लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। 
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न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने आदेश दिया कि शिक्षकों को एक अक्तूबर 2024 से वरिष्ठता और सभी वित्तीय व परिणामी लाभ दिए जाएं। शिक्षा विभाग को आदेश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं (शास्त्री शिक्षकों) के नियमितीकरण की तारीख को अप्रैल 2025 से बदलकर 1 अक्तूबर 2024 करे। कोर्ट ने पाया कि अन्य जिलों में इस तरह के टीजीटी शिक्षकों को 1 अक्तूबर 2024 से पूर्वव्यापी प्रभाव से नियमित किया जा चुका है। इसलिए याचिकाकर्ता बलवीर सिंह और अन्य के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। 
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याचिकाकर्ता शास्त्री शिक्षकों की नियुक्ति 4 अप्रैल 2022 को बैचवाइज काउंसलिंग के आधार पर अनुबंध पर की गई थी। राज्य सरकार की नीति के अनुसार अनुबंध कर्मचारी 30 सितंबर 2024 को अपनी 2 साल की निरंतर सेवा पूरी कर चुके थे। हालांकि, विभाग ने उनके 17 अप्रैल 2025 को नियमितीकरण के आदेश जारी किए। इसके कारण शिक्षकों को लगभग 6 महीने की वरिष्ठता और वित्तीय लाभों का नुकसान हो रहा था, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं ने सरकार के ही 2 अप्रैल 2026 के एक पत्र का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि 2024-25 और 2025-26 में जिन कर्मचारियों ने 30 सितंबर तक 2 साल पूरे कर लिए हैं, वे नियमितीकरण के पात्र हैं।
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निलंबन के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंचे इंस्पेक्टर विजय, सरकार को नोटिस
हार्मनी ऑफ द पाइन्स पुलिस ऑर्केस्ट्रा बैंड के प्रभारी इंस्पेक्टर विजय कुमार ने विभाग की ओर से किए गए अपने निलंबन के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, पुलिस विभाग सहित अन्य को नोटिस जारी किया है। सरकार ने सभी प्रतिवादियों से इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी। उल्लेखनीय है कि हिमाचल पुलिस ने इंस्पेक्टर विजय कुमार को सस्पेंड करते हुए उनके खिलाफ नियमित विभागीय जांच के आदेश जारी किए है। इसके खिलाफ अब विजय ने हिमाचल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह, एसीएस होम के साथ डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, एडिशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, आर्म्ड पुलिस एंड ट्रेनिंग और वित्त सचिव हिमाचल सरकार को प्रतिवादी बनाया गया है। इसके अलावा ंस्पेक्टर विजय कुमार के मामले में जांच कर रहे पुलिस लाइन भराड़ी के डीएसपी कमल किशोर भी प्रतिवादी बनाया गया है। 

ब्यास नदी किनारे से वेस्ट प्लांट हटेगा, मनाली व कुल्लू प्रशासन को नई साइट तलाशने का आदेश
हाईकोर्ट ने मनाली और उसके आसपास के पर्यटन क्षेत्रों में ठोस कचरा प्रबंधन, ब्यास नदी के पर्यावरण को बचाने और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट नियम 2026 के अनुपालन को लेकर कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। खंडपीठ ने माना कि ब्यास नदी के बिल्कुल किनारे स्थित वर्तमान मैटीरियल रिकवरी फैसिलिटी प्लांट में गीले कचरे का प्रसंस्करण करना व्यावहारिक और सुरक्षित नहीं है। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 के शेड्यूल-दो के अनुसार कोई भी वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट नदी या जलस्रोत से कम से कम 100 मीटर दूर होना चाहिए। इसे देखते हुए अदालत ने कुल्लू के उपायुक्त को निर्देश दिया है कि वे नए नियमों के तहत प्लांट के लिए किसी नई जगह (साइट) की पहचान करें। इसके अलावा खंडपीठ ने नई एसओपी बनाने के निर्देश दिए हैं जिससे कचरा पैदा करने वाले मुख्य उपयोगकर्ता और संस्थान शुरुआती स्तर पर ही गीले और सूखे कचरे को अलग करें। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को स्पष्ट करने को कहा है कि प्रदूषण फैलाने वाली इकाई से वसूला गया जुर्माना किस प्रकार इस्तेमाल किया जाना चाहिए और क्या यह पैसा उसी इकाई को दिया जा सकता है। मनाली नगर परिषद द्वारा ब्यास में बिना उपचार किए कचरे का गंदा पानी बहाने पर 15,30,000 रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया था। 

ईको-फ्रेंडली वेंडिंग जोन के निर्माण पर कुल्लू के उपायुक्त से तलब की ताजा स्टेटस रिपोर्ट 
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कुल्लू जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोलंग में एक ईको-फ्रेंडली (पर्यावरण अनुकूल) मार्केट और वेंडिंग जोन स्थापित करने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने कुल्लू के उपायुक्त को लागत में कटौती और निर्माण कार्य की वर्तमान स्थिति को लेकर व इस पूरी परियोजना पर एक ताजा स्टेटस रिपोर्ट हलफनामे के जरिये दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी।

सोलंग में ईको-फ्रेंडली वेंडिंग जोन का निर्माण के मामले में न्यायमित्र ने कुल्लू के उपायुक्त द्वारा 9 सितंबर 2024 को दाखिल पिछले हलफनामे का हवाला दिया। इसमें सोलंग में रेहड़ी-फड़ी वालों के लिए  पर्यावरण अनुकूल मार्केट बनाई जानी थी। अदालत ने पाया कि 7 सितंबर 2024 की बैठक के बाद वेंडिंग  जोन के सुपर स्ट्रक्चर (ऊपरी ढांचे) के  अनुमानित बजट में बदलाव करना पड़ा था। इसके बाद 16 दिसंबर 2024 को दाखिल हलफनामे में यह बात सामने आई कि वन मंडल अधिकारी द्वारा प्रस्तावित वेंड्स (दुकानों/खोकों) की लागत बहुत अधिक थी। अदालत ने आदेश दिया  है कि इस बजट को दोबारा तैयार किया जाए और प्रत्येक दुकान की लागत को अधिकतम 2 लाख रुपये तक सीमित किया जाए। 
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