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Himachal News: पूर्व सीपीएस को सरकारी बंगले देने पर हाईकोर्ट सख्त, मुख्य सचिव से जवाब तलब

Fri, 07 Aug 2026 05:15 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 07 Aug 2026 05:15 AM IST
सार

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने 4 मई 2026 के उस सरकारी आदेश पर नाराजगी जताई है, जिसके तहत बिना किसी आवेदन के ही पूर्व सीपीएस के इन बंगलों या आवासों में अवैध प्रवास को नियमित कर दिया गया।

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Himachal News:  High Court takes a tough stance on the allotment of govt bungalows to former CPS
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

मुख्य संसदीय सचिवों के पदों से हटाए जाने के बावजूद बिना आवेदन ही छह विधायकों के सरकारी बंगलों में ठहराव नियमित करने पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्ती दिखाई है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने 4 मई 2026 के उस सरकारी आदेश पर नाराजगी जताई है, जिसके तहत बिना किसी आवेदन के ही पूर्व सीपीएस के इन बंगलों या आवासों में अवैध प्रवास को नियमित कर दिया गया। अदालत ने सुनवाई के दौरान तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि मानो मुझे चेहरा दिखाओ, मैं तुम्हें नियम दिखा दूंगा की नीति पर काम हो रहा है। पूर्व में सीपीएस की नियुक्तियां रद्द की जा चुकी हैं। हाईकोर्ट ने नोट किया कि यदि इस संबंध में नोटिस जारी न किया होता तो सरकार इस पूरे मुद्दे को कालीन के नीचे दबाए रखती।

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 हलफनामा दायर कर तीन बिंदुओं को स्पष्ट करें मुख्य सचिव: कोर्ट
सरकार ने सरकारी आवास आवंटन (जनरल पूल) नियम 1994 के नियम 24 के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए 14 नवंबर 2024 से सामान्य लाइसेंस शुल्क पर पूर्व सीपीएस के इन आवासों में उनके प्रवास को नियमित कर दिया, जबकि उन्होंने इसके लिए कोई आवेदन तक नहीं किया था। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि पूर्व सीपीएस को विशेष छूट देने वाले चार मई के फैसले पर क्यों न रोक लगा दी जाए। अदालत ने मुख्य सचिव को आदेश दिया कि वह हलफनामा दायर कर तीन बिंदुओं को स्पष्ट करें। पहला, क्या इससे पहले किसी अन्य सामान्य कर्मचारी को इस तरह की विशेष अनुमति या छूट दी गई है। दूसरा, बिना आवेदन किए इन 6 पूर्व सीपीएस को किस आधार पर विशेष अधिकार दिया जा रहा है। तीसरा, इन इन पर कितना दंडात्मक किराया बनता है, उसकी सटीक राशि दर्शाई जाए। कोर्ट ने 4 मई 2026 के विवादित आदेश को रिकॉर्ड पर लेते हुए मूल फाइल सरकार को लौटा दी है। अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी। 

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वर्ष 2023 में नियुक्त किए थे छह सीपीएस
हिमाचल में 8 जनवरी 2023 को कांग्रेस के छह विधायक सीपीएस नियुक्त किए थे। इनमें अर्की से संजय अवस्थी, कुल्लू से सुंदर सिंह ठाकुर, रोहडू से मोहन लाल ब्राक्टा, दून से राम कुमार चौधरी, पालमपुर से आशीष बुटेल और बैजनाथ से किशोरी लाल शामिल हैं। भाजपा ने इन नियुक्तियों को संविधान के प्रावधानों के विपरीत बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी। 13 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट ने सभी छह सीपीएस की नियुक्ति को असांविधानिक करार देते हुए रद्द कर उनसे सभी सरकारी सुविधाएं वापस लेने का आदेश दिया था। 22 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले के कुछ हिस्सों पर अंतरिम राहत दी, लेकिन मुख्य संसदीय सचिव का पद बहाल नहीं हुआ। 

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