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Himachal News: मुआवजा न देने पर पीडब्ल्यूडी के रेस्ट हाउस अटैच करने के आदेश, जानें पूरा मामला
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहड़ू।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Thu, 26 Feb 2026 10:20 AM IST
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सार
अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रोहड़ू की अदालत ने आदेश दिया है कि भुगतान समय पर न होने के कारण लोक निर्माण विभाग के तीन विश्राम गृह और एक कार्यालय को अटैच किया जाए। जानें पूरा मामला...
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
भूमि अधिग्रहण का मुआवजा नहीं देने पर अदालत ने लोक निर्माण विभाग की सरकारी संपत्तियों को अटैच करने का आदेश दिया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश रोहड़ू की अदालत ने भूमि अधिग्रहण मुआवजा से जुड़ी दो याचिकाओं में यह आदेश दिया। अदालत ने कहा कि भुगतान समय पर न होने के कारण विभाग के तीन विश्राम गृह और एक कार्यालय को अटैच किया जाए। न्यायालय ने दो भूमि मालिकों की ओर से दाखिल याचिका पर फैसला सुनाया है। अदालत ने 18 फरवरी को पारित आदेश में संबंधित विभागों को कार्रवाई की रिपोर्ट 17 मार्च तक न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा है।
पहले मामले में शिकायतकर्ता चेत राम, निवासी गांव शलाड, तहसील जुब्बल और दूसरे मामले में राजेश कुमार हैं। दोनों मामलों में हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ लोक निर्माण विभाग साउथ जोन, शिमला के भूमि अधिग्रहण कलेक्टर, जिला कलेक्टर शिमला और लोक निर्माण विभाग जुब्बल डिविजन के कार्यकारी अभियंता को पक्षकार बनाया गया है। अदालत के आदेश के तहत लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह जुब्बल, हाटकोटी, खड़ापत्थर और अधिशासी अभियंता कार्यालय जुब्बल डिविजन से संबंधित संपत्तियों के विरुद्ध कुर्की की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। दोनों याचिकाओं में कुल मिलाकर करीब तीन करोड़ रुपये की मुआवजा राशि देय बताई गई है।
दरअसल नंदपुर पंचायत में वर्ष 1988-89 में बलाई गांव के लिए सड़क निर्माण के दौरान वादियों के फलदार बगीचों से पौधे काट दिए गए थे। आरोप है कि इसके बदले उचित मुआवजा समय पर नहीं दिया गया।
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पहले मामले में शिकायतकर्ता चेत राम, निवासी गांव शलाड, तहसील जुब्बल और दूसरे मामले में राजेश कुमार हैं। दोनों मामलों में हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ लोक निर्माण विभाग साउथ जोन, शिमला के भूमि अधिग्रहण कलेक्टर, जिला कलेक्टर शिमला और लोक निर्माण विभाग जुब्बल डिविजन के कार्यकारी अभियंता को पक्षकार बनाया गया है। अदालत के आदेश के तहत लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह जुब्बल, हाटकोटी, खड़ापत्थर और अधिशासी अभियंता कार्यालय जुब्बल डिविजन से संबंधित संपत्तियों के विरुद्ध कुर्की की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। दोनों याचिकाओं में कुल मिलाकर करीब तीन करोड़ रुपये की मुआवजा राशि देय बताई गई है।
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दरअसल नंदपुर पंचायत में वर्ष 1988-89 में बलाई गांव के लिए सड़क निर्माण के दौरान वादियों के फलदार बगीचों से पौधे काट दिए गए थे। आरोप है कि इसके बदले उचित मुआवजा समय पर नहीं दिया गया।