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हिमाचल: सादे कपड़ों में आई दिल्ली और हरियाणा पुलिस की कार्रवाई से बढ़ा संशय, जानें शिमला पुलिस ने क्या कुछ कहा

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 26 Feb 2026 02:17 PM IST
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सार

Himachal Police Vs Delhi Police: गुरुवार की सुबह कांग्रेस कार्यकर्ताओं को दिल्ली ले जाया गया है। एआई समिट में शर्टलेस प्रोटेस्ट के सिलसिले में ये गिरफ्तारी हुई है। वहीं, शिमला पुलिस ने भी मामले को लेकर जानकारी दी है। जानें विस्तार से...

Himachal Suspicion rises after Delhi and Haryana police arrive in plain clothes
शिमला जिला कचहरी पहुंचने के बाद युवकों को ले जाती दिल्ली पुलिस। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

बुधवार सुबह शिमला पुलिस को चांशल रिजॉर्ट, चिड़गांव से सूचना मिली कि कुछ व्यक्तियों ने सादे कपड़ों में थे तथा बाहरी राज्यों के पंजीकरण नंबर वाले वाहनों में आए थे। उन्होंने रिजॉर्ट में ठहरे तीन व्यक्तियों को कथित रूप से जबरन साथ ले जाया गया और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जिनमें डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर भी शामिल है, अपने साथ ले गए।
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मामले की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए शिमला पुलिस ने तथ्यों की पुष्टि और विधि अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए तत्काल आवश्यक कानूनी कार्रवाई प्रारंभ की। इसके तहत सोलन पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर शिमला पुलिस की टीमों ने संबंधित व्यक्तियों को शोघी, आईएसबीटी शिमला और धर्मपुर सहित विभिन्न स्थानों पर रोका। सत्यापन के दौरान पता चला कि यह दल दिल्ली एवं हरियाणा पुलिस के कर्मियों का था, जिन्होंने दिल्ली में पंजीकृत एक मामले के संबंध में तीन व्यक्तियों का पीछा करते हुए उन्हें हिरासत में लिया था।
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विधिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने तथा संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के उद्देश्य से शिमला पुलिस ने उन्हें सक्षम स्थानीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। कानून के अनुसार तीनों व्यक्तियों का चिकित्सीय परीक्षण रिपन अस्पताल, शिमला में कराया गया। इसके बाद एसीजेएम-।। न्यायालय, शिमला ने लगभग 18 घंटे का ट्रांजिट रिमांड दिया । सभी वैधानिक औपचारिकताएं पूर्ण करने एवं समुचित सत्यापन के उपरांत दिल्ली एवं हरियाणा पुलिस दल को संबंधित व्यक्तियों के साथ दिल्ली प्रस्थान की अनुमति प्रदान की गई।

इस बीच, चांसल रिजॉर्ट, चिड़गांव के स्वामी द्वारा प्रस्तुत शिकायत के आधार पर थाना चिड़गांव में एफआईआर संख्या 18/2026 दिनांक 25/02/2026 प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत पंजीकृत की गई है और मामले की जांच जारी है। एसएसपी शिमला गौरव सिंह ने कहा कि शिमला पुलिस त्वरित प्रतिक्रिया, विधि के अनुसार प्रक्रिया के कड़ाई से अनुपालन तऔर प्रभावी अंतर्राज्यीय समन्वय के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है, ताकि प्रत्येक कार्रवाई विधिक ढांचे के अंतर्गत और जन-विश्वास को बनाए रखते हुए की जा सके।

नरेश चौहान बोले- गंभीर मामला था
वहीं, दिल्ली पुलिस बनाम शिमला पुलिस पर मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल एडवाइजर (मीडिया) नरेश चौहान ने कहा कि यह कोई ड्रामा नहीं बल्कि एक गंभीर मामला था। जिस तरह से दिल्ली पुलिस तीन लोगों को गिरफ्तार करने के लिए हिमाचल प्रदेश में घुसी- यह कानून के हिसाब से होना चाहिए था। ऐसा एक्शन लेने के लिए पहली जरूरत उस खास राज्य की पुलिस को पहले से बताना है। दिल्ली पुलिस ने कोई तय प्रोटोकॉल फॉलो नहीं किया। एसपी शिमला और हिमाचल प्रदेश पुलिस ने इस पर एतराज जताया। दिल्ली पुलिस ने बिना किसी एफआईआर के जाकर तीन लोगों को हिरासत में ले लिया। हमारी पुलिस टीमों ने उन्हें तय प्रोसीजर फॉलो करने के लिए मजबूर किया, जैसे गिरफ्तार लोगों का मेडिकल एग्जामिनेशन करना और उनका ट्रांजिट रिमांड लेना। जिस तरह से दिल्ली पुलिस काम करना चाहती थी वह पूरी तरह से गलत था।
 

दिल्ली पुलिस को रोकना संघीय ढांचे और संविधान का उल्लंघन : रणधीर शर्मा
वहीं, भाजपा नेता एवं विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार हिमाचल प्रदेश पुलिस ने दिल्ली से आई पुलिस टीम को विधिसम्मत कार्रवाई करने से रोका और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है। भारतीय जनता पार्टी इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करती है। रणधीर शर्मा ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में दिल्ली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एआई समिट ने विश्व पटल पर भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाई दी। किंतु उसी मंच पर राहुल गांधी के निर्देश पर युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा किया गया नग्न प्रदर्शन देश की छवि को धूमिल करने वाला राष्ट्रविरोधी कृत्य था। इस संबंध में दिल्ली पुलिस ने विधिसम्मत रूप से मामला दर्ज कर आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई प्रारंभ की।

उन्होंने कहा कि दिल्ली पुलिस जब रोहड़ू से आरोपित उपद्रवियों को गिरफ्तार कर वापस ले जा रही थी, तब हिमाचल पुलिस द्वारा उन्हें रोकना और दुर्व्यवहार करना संघीय ढांचे की भावना के विपरीत है। संविधान के अंतर्गत एक राज्य की पुलिस का कर्तव्य है कि वह दूसरे राज्य की पुलिस को सहयोग दे, न कि टकराव की स्थिति उत्पन्न करे। रणधीर शर्मा ने कहा कि यदि हिमाचल सरकार दोषी पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध तुरंत कार्रवाई नहीं करती तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह पूरा घटनाक्रम मुख्यमंत्री श्री सुखविंदर सिंह सुखू के निर्देश पर हुआ। 'चोर की दाढ़ी में तिनका' की तर्ज पर यदि सरकार आरोपियों को बचाने के लिए इतनी सक्रिय हो जाए, तो उसकी मंशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के गुंडों को बचाने के लिए प्रदेश में अराजकता फैलाना लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक मर्यादाओं का खुला उल्लंघन है। भाजपा ने मांग की है कि दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए और संघीय ढांचे की गरिमा की रक्षा सुनिश्चित की जाए।

लोकतंत्र का गला घोंटने नहीं दिया जाएगा- राजेश धर्माणी
इसके साथ ही तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र का गला घोंटने नहीं दिया जाएगा। हम निंदा करते हैं। लोकल पुलिस की अनदेखी हुई। गृह मंत्रालय की शह पर सब कुछ हुआ। दुख है कि हिमाचल के हितों को भाजपा भूल जाती है। आपदा, आरडीजी को लेकर साथ नहीं दिया। भाजपा हिमाचल की जगह पार्टी के हित देख रही है। प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के इशारे पर सबकुछ हो रहा है। 
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