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हिमाचल: पानी, रेत या केमिकल नहीं... अब ध्वनि से भी बुझ सकेगी आग, विद्यार्थियों ने बनाया उपकरण

संवाद न्यूज एजेंसी, सुंदरनगर (मंडी)। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 04 Apr 2026 10:58 AM IST
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सार

 पॉलिटेक्निक कॉलेज सुंदरनगर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रशिक्षुओं ने एक अभिनव ‘सोनिक फायर एक्सटिंग्विशर’ विकसित किया है, जो ध्वनि तरंगों की मदद से आग बुझाने में सक्षम है।

Himachal: No Water, Sand, or Chemicals... Now Fire Can Be Extinguished Using Sound Students Develop Device
राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज सुंदरनगर के प्रशिक्षुओं ने सोनिक फायर एक्सटिंग्विशर विकसित किया - फोटो : संवाद
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विस्तार

 राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज सुंदरनगर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रशिक्षुओं ने एक अभिनव ‘सोनिक फायर एक्सटिंग्विशर’ विकसित किया है, जो ध्वनि तरंगों की मदद से आग बुझाने में सक्षम है। बिना पानी, रेत या किसी रासायनिक पदार्थ के यह उपकरण आग को नियंत्रित करने का दावा करता है। संस्थान ने इस तकनीक की उपयोगिता को देखते हुए इसके पेटेंट की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कॉलेज के छठे सेमेस्टर के प्रशिक्षुओं की ओर से विकसित इस उपकरण को विभागाध्यक्ष राजेश चौधरी ने सराहा और इसे संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उनका कहना है कि यह तकनीक भविष्य में अग्निशमन के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती है।

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प्रोजेक्ट लीडर रजत सिंह ने बताया कि महंगे इलेक्ट्रिकल पैनल और मशीनों में आग लगने की स्थिति में पारंपरिक तरीकों के उपयोग से उपकरण पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए टीम ने ध्वनि आधारित तकनीक पर काम किया। उन्होंने बताया कि इस मशीन में विशेष माइक्रो-कंट्रोलर और प्रोग्रामिंग कोड का उपयोग किया गया है, जो एक निश्चित फ्रीक्वेंसी की ध्वनि उत्पन्न करता है। यह ध्वनि आग के चारों ओर ऑक्सीजन के संपर्क को बाधित कर देती है, जिससे आग बुझ जाती है। करीब 7 से 8 हजार रुपये की लागत वाला यह उपकरण पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल है और इसे बार-बार रिफिल कराने की आवश्यकता नहीं होगी।

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इस उपकरण की चर्चा देश के प्रतिष्ठित संस्थानों और वन विभाग में हो रही है। कई आईआईटी और बड़ी कंपनियों ने इस मॉडल में रुचि दिखाई है। स्थानीय स्तर पर वन विभाग के अधिकारियों ने कॉलेज पहुंचकर इसका अवलोकन भी किया है। करीब 3 से 5 किलो वजन होने के कारण यह उपकरण दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों और जंगलों में आग बुझाने के लिए उपयुक्त माना जा रहा है। वर्तमान में जंगलों की आग से निपटने के लिए कोई प्रभावी पोर्टेबल उपकरण उपलब्ध नहीं है, ऐसे में यह स्वदेशी तकनीक महत्वपूर्ण समाधान बन सकती है। यह तकनीक उन संवेदनशील स्थानों पर भी उपयोगी साबित होगी, जहां मानव पहुंचना कठिन होता है।

इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के छठे सेमेस्टर के प्रशिक्षुओं ने अपनी टीम के साथ इस प्रोजेक्ट पर कार्य किया है। इस शोध को और उन्नत बनाने के लिए भविष्य में आवश्यक आर्थिक सहायता और तकनीकी संसाधन कॉलेज के ‘स्टूडेंट वेलफेयर फंड’ के माध्यम से प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराए जाएंगे। -राजेश चौधरी, विभागाध्यक्ष, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, बहुतकनीकी कॉलेज, सुंदरनगर

‘ऑटोमैटिक सोनिक वर्जन’ के लिए पेटेंट फाइल तैयार की जा रही है। वैश्विक स्तर पर इस दिशा में कुछ शोध हुए हैं, लेकिन भारतीय परिस्थितियों के अनुसार तैयार किया गया यह सेंसर-आधारित पोर्टेबल मॉडल अनूठा है। यह तकनीक उन घरों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी, जहां आग लगने की स्थिति में कोई मौजूद नहीं होता। ऐसे में यह सेंसर-आधारित उपकरण स्वतः सक्रिय होकर आग बुझाने में सक्षम होगा।-अवनीश पॉल, प्रोजेक्ट मेंटर

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