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Himachal News: हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, सरकार पर लगाए ये आरोप
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Wed, 25 Feb 2026 02:48 PM IST
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सार
हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को ज्ञापन सौंपा है। वहीं, प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश सरकार पर भी आरोप लगाए हैं। पढ़ें पूरी खबर...
राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल को ज्ञापन सौंपते हुए।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश पेंशनर संयुक्त संघर्ष समिति के तत्वाधान में आज एक प्रतिनिधिमंडल भूपराम वर्मा अतिरिक्त महासचिव संयुक्त संघर्ष समिति की अध्यक्षता में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से लोक भवन शिमला में मिला और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने माननीय राज्यपाल के समक्ष हिमाचल प्रदेश में गंभीर वित्तीय अस्थिरता, पेंशन अधिकारों के व्यवस्थित उल्लंघन एवं संवैधानिक तंत्र के विघटन के परिप्रेक्ष्य में भारत के संविधान के अनुच्छेद 360 एवं 356 के अंतर्गत हस्तक्षेप हेतु संवैधानिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। भूपराम वर्मा का कहना है कि हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स के 18 विभिन्न विभागों, बोर्ड, निगमों और संघों के पेंशनभोगी एवं पारिवारिक पेंशनभोगी पिछले काफी समय से हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ छठे वेतन आयोग की देनदारियों के बारे में प्रदेश के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर की अध्यक्षता में 14 सूत्रीय मांग पत्र के माध्यम से पिछले काफी समय से अपनी न्याय उचित मांगों के विषय में माननीय मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से कई बार मिल चुके हैं और अभी तक झूठे आश्वासनों के अलावा कुछ भी प्राप्त नहीं हो पाया है।
मुख्य मांगों में 01.01 2016 से 31.01.2022 तक वेतन संशोधन एरिया का भुगतान अभी तक लंबित है। डीए/डीआर/ एरियर भी रुके पड़े हैं। ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन, लीव इनकैशमेंट और चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावे पिछले तीन वर्षों से लगातार लंबित पड़े हुए हैं। 13% डीए की किशत देय है। गंभीर रोगों से पीड़ित अनेक पेंशनरों को अपनी पेंशन से ही उपचार पर खर्चा वहन करना पड़ रहा है और उनके लाखों रुपए के मामले लंबित पड़े हुए हैं और लगभग 500- 600 पेंशनर्स स्वर्ग भी सिधार गए हैं।
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प्रतिनिधिमंडल ने माननीय राज्यपाल के समक्ष हिमाचल प्रदेश में गंभीर वित्तीय अस्थिरता, पेंशन अधिकारों के व्यवस्थित उल्लंघन एवं संवैधानिक तंत्र के विघटन के परिप्रेक्ष्य में भारत के संविधान के अनुच्छेद 360 एवं 356 के अंतर्गत हस्तक्षेप हेतु संवैधानिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। भूपराम वर्मा का कहना है कि हिमाचल प्रदेश पेंशनर्स के 18 विभिन्न विभागों, बोर्ड, निगमों और संघों के पेंशनभोगी एवं पारिवारिक पेंशनभोगी पिछले काफी समय से हिमाचल प्रदेश सरकार के साथ छठे वेतन आयोग की देनदारियों के बारे में प्रदेश के अध्यक्ष सुरेश ठाकुर की अध्यक्षता में 14 सूत्रीय मांग पत्र के माध्यम से पिछले काफी समय से अपनी न्याय उचित मांगों के विषय में माननीय मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू से कई बार मिल चुके हैं और अभी तक झूठे आश्वासनों के अलावा कुछ भी प्राप्त नहीं हो पाया है।
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मुख्य मांगों में 01.01 2016 से 31.01.2022 तक वेतन संशोधन एरिया का भुगतान अभी तक लंबित है। डीए/डीआर/ एरियर भी रुके पड़े हैं। ग्रेच्युटी, कम्यूटेशन, लीव इनकैशमेंट और चिकित्सा प्रतिपूर्ति दावे पिछले तीन वर्षों से लगातार लंबित पड़े हुए हैं। 13% डीए की किशत देय है। गंभीर रोगों से पीड़ित अनेक पेंशनरों को अपनी पेंशन से ही उपचार पर खर्चा वहन करना पड़ रहा है और उनके लाखों रुपए के मामले लंबित पड़े हुए हैं और लगभग 500- 600 पेंशनर्स स्वर्ग भी सिधार गए हैं।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार अभी तक छठे वेतन आयोग की देनदारियां ही नहीं दे पा रही है तो आठवें वेतन आयोग की देनदारियां यह सरकार कैसे दे पाएगी यह बड़ा प्रश्न चिन्ह है। भूपराम वर्मा ने आगे कहा कि हिमाचल प्रदेश के काफी पेंशनर हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में भी गए हैं और कोर्ट से उनके हक मे फैसले आने के बाद भी सरकार अपील में गई है, ताकि पेंशनर्स के वित्तीय लाभ रोके जा सकें।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल महोदय से आग्रह किया है कि इन सभी उपरोक्त तत्वों को मध्य नजर रखते हुए राज्य सरकार से वित्तीय स्थिति प्रतिवेदन प्राप्त किया जाए। माननीय राष्ट्रपति महोदय को राज्य की वित्तीय अस्थिरता संबंधी विस्तृत प्रतिवेदन प्रेषित की जाए। यदि संवैधानिक मानदंड संतुष्ट हो तो अनुच्छेद 360 के अंतर्गत वित्तीय आपातकाल की अनुशंसा की जाए यदि यह पाया जाए कि शासन संबंधी संविधान के अनुसार संचालित नहीं हो रहा है तो अनुच्छेद 356 के अंतर्गत आवश्यक संवैधानिक कदमों पर विचार किया जाए। लंबित पेंशन देनदारियों के जल्द भुगतान हेतु निर्देश जारी किए जाएं।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल महोदय से आग्रह किया है कि इन सभी उपरोक्त तत्वों को मध्य नजर रखते हुए राज्य सरकार से वित्तीय स्थिति प्रतिवेदन प्राप्त किया जाए। माननीय राष्ट्रपति महोदय को राज्य की वित्तीय अस्थिरता संबंधी विस्तृत प्रतिवेदन प्रेषित की जाए। यदि संवैधानिक मानदंड संतुष्ट हो तो अनुच्छेद 360 के अंतर्गत वित्तीय आपातकाल की अनुशंसा की जाए यदि यह पाया जाए कि शासन संबंधी संविधान के अनुसार संचालित नहीं हो रहा है तो अनुच्छेद 356 के अंतर्गत आवश्यक संवैधानिक कदमों पर विचार किया जाए। लंबित पेंशन देनदारियों के जल्द भुगतान हेतु निर्देश जारी किए जाएं।