सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Himachal Principals will now be appointed by promotion not by direct recruitment in polytechnic institutes

Himachal News: पॉलीटेक्निक संस्थानों में सीधी भर्ती से नहीं, पदोन्नति से होगी अब प्राचार्यों की नियुक्ति

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 13 Jan 2026 05:00 AM IST
विज्ञापन
सार

हिमाचल प्रदेश में तकनीकी शिक्षा के तहत राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों के प्राचार्यों की नियुक्ति और पदोन्नति होगी। वर्ष 1993 से लागू पुराने नियमों को समाप्त कर दिया गया है। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal Principals will now be appointed by promotion not by direct recruitment in polytechnic institutes
हिमाचल प्रदेश सरकार। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

हिमाचल प्रदेश सरकार ने तकनीकी शिक्षा के तहत राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों के प्राचार्यों की नियुक्ति और पदोन्नति को लेकर नए भर्ती एवं पदोन्नति नियम अधिसूचित कर दिए हैं। लोक सेवा आयोग से परामर्श के बाद तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग ने नए नियम लागू कर दिए हैं। वर्ष 1993 से लागू पुराने नियमों को समाप्त कर दिया गया है। नए नियमों के तहत प्रदेश में पॉलीटेक्निक प्राचार्य के कुल 23 पद स्वीकृत किए गए हैं। यह पद ग्रुप-ए (चयन श्रेणी) का होगा और इसका वेतनमान लेवल-28 निर्धारित किया गया है। इस पद पर 100 फीसदी नियुक्ति पदोन्नति के माध्यम से ही की जाएगी। सीधी भर्ती का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है।

Trending Videos

प्राचार्य पद के लिए पदोन्नति उन्हीं अधिकारियों को मिलेगी जो वर्तमान में विभागाध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं और निर्धारित शैक्षणिक योग्यता और अनुभव रखते हों। पीएचडी धारक उम्मीदवारों के लिए संबंधित विषय में स्नातक या परास्नातक स्तर पर प्रथम श्रेणी के साथ कम से कम 16 वर्ष का अनुभव अनिवार्य होगा। इसमें से 5 वर्ष विभागाध्यक्ष स्तर पर और 3 वर्ष पीएचडी के बाद का अनुभव होना जरूरी है। वहीं पीएचडी रहित उम्मीदवारों के लिए प्रथम श्रेणी के साथ कम से कम 20 वर्ष का अनुभव जरूरी होगा, जिसमें 7 वर्ष विभागाध्यक्ष से कम नहीं होना चाहिए। पीएचडी धारकों के लिए पिछले 5 वर्षों का औसत फीडबैक स्कोर 5 से 8 के बीच होना चाहिए। बिना पीएचडी वाले अधिकारियों के लिए यह स्कोर 8 से 10 निर्धारित किया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

फीडबैक की गणना एआईसीटीई की 1 मार्च 2019 की अधिसूचना के अनुसार की जाएगी। प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया कि पदोन्नति से पहले प्रत्येक अधिकारी को कम से कम एक कार्यकाल जनजातीय, कठिन, दुर्गम या दूरदराज के क्षेत्रों में सेवा देना अनिवार्य होगा। हालांकि जिन अधिकारियों की सेवानिवृत्ति में पांच वर्ष या उससे कम समय शेष है, उन्हें इस शर्त से आंशिक राहत दी गई है, लेकिन पदोन्नति के मामले में यह छूट लागू नहीं होगी। जिन अधिकारियों ने अब तक ऐसे क्षेत्रों में सेवा नहीं दी है, उन्हें वरिष्ठता के आधार पर अनिवार्य रूप से इन क्षेत्रों में भेजा जाएगा।

नियमों में लाहौल-स्पीति, किन्नौर सहित सभी जनजातीय क्षेत्रों, चंबा के चुराह और मेहला, शिमला जिला का डोडरा-क्वार, रोहड़ू और रामपुर के कई पंचायत क्षेत्र, कांगड़ा का छोटा और बड़ा भंगाल, सिरमौर के शिलाई और संगड़ाह, मंडी का घाटी क्षेत्र सहित अनेक इलाकों को कठिन व दुर्गम क्षेत्र घोषित किया गया है। इसके अलावा उपमंडल या तहसील मुख्यालय से 20 किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित स्टेशन और वे क्षेत्र जहां बस सेवा नहीं है और पैदल यात्रा तीन किलोमीटर से अधिक है, उन्हें भी दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्र माना जाएगा।

पदोन्नति और पुष्टि के मामलों में फीडर कैडर में की गई निरंतर एडहॉक सेवा को भी अनुभव में जोड़ा जाएगा, बशर्ते यह नियुक्ति नियमों के अनुसार और उचित चयन प्रक्रिया के बाद की गई हो। इससे वरिष्ठ अधिकारियों के अधिकारों की रक्षा का भी प्रावधान किया गया है। प्राचार्य पद पर नियुक्ति पाने वाले अधिकारियों को प्रदेश विभागीय परीक्षा नियम 1997 के तहत निर्धारित परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। नियुक्तियां अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अन्य श्रेणियों के लिए लागू आरक्षण नियमों के अधीन होंगी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed