हिमाचल: एचपीयू शिमला में शोध कमजोर, पेटेंट के क्षेत्र में प्रदर्शन निराशाजनक; नैक मानकों से विश्वविद्यालय पीछे
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में एचपीयू शिमला की अनुसंधान गतिविधियों को कमजोर बताते हुए कई कर्मियों को उजागर किया गया है। पढ़ें पूरी खबर...
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एचपीयू में शोध और नवाचार की स्थिति गंभीर चिंता का विषय बनकर सामने आई है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट में विवि की अनुसंधान गतिविधियों को कमजोर बताते हुए कई कर्मियों को उजागर किया है। रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार विश्वविद्यालय में न केवल शोध परियोजनाओं की संख्या सीमित है बल्कि उनकी गुणवत्ता भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई है। रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020 से 2023 के बीच चयनित विभागों में औसतन 214 शिक्षकों के मुकाबले केवल 21 शोध परियोजनाएं ही शुरू की गईं। इस आधार पर प्रति शिक्षक औसतन 0.1 प्रोजेक्ट ही आता है जो राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के मानकों से काफी कम है।
यह स्थिति इस बात की ओर संकेत करती है कि विश्वविद्यालय में शोध को लेकर न तो पर्याप्त प्रोत्साहन है और न ही संसाधनों का प्रभावी उपयोग हो रहा है। अनुसंधान की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में है। रिपोर्ट में सामने आया है कि पूर्ण की गई परियोजनाओं में से करीब 71 प्रतिशत लघु शोध परियोजनाएं थीं, जिनका प्रभाव सीमित रहता है। बड़े और दीर्घकालिक शोध कार्यों की कमी के कारण विश्वविद्यालय का अकादमिक योगदान व्यापक स्तर पर स्थापित नहीं हो पा रहा है। इससे न केवल संस्थान की साख प्रभावित हो रही है बल्कि छात्रों को भी उच्च स्तर के शोध अवसरों से वंचित रहना पड़ रहा है। पेटेंट के क्षेत्र में भी एचपीयू का प्रदर्शन निराशाजनक पाया गया है।

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