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Himachal News: जल शक्ति विभाग में सेवाओं के लिए छोड़नी होगी वरिष्ठता, नियमों से कराया अवगत; जानें विस्तार से

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 13 Jan 2026 05:00 AM IST
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सार

बिजली बोर्ड के सहायक और कनिष्ठ अभियंताओं को समायोजित करने के लिए जल शक्ति विभाग ने अपने नियमों से अवगत करा दिया है। बता दें कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशों पर बिजली बोर्ड के कर्मियों को अन्य विभागों में शिफ्ट किया जा रहा है। अब जल शक्ति विभाग में सेवाएं देने के लिए बिजली बोर्ड कर्मियों को अपनी वरिष्ठता छोड़नी होगी। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal Seniority to leave for services in Jal Shakti Department made aware of rules
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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जल शक्ति विभाग में सेवाएं देने के लिए बिजली बोर्ड कर्मियों को अपनी वरिष्ठता छोड़नी होगी। बोर्ड के सहायक और कनिष्ठ अभियंताओं को समायोजित करने के लिए जल शक्ति विभाग ने अपने नियमों से अवगत करा दिया है। ऊर्जा विभाग के अवर सचिव ने नियमों के अनुसार बोर्ड कर्मियों से दूसरे विभाग में जाने को आवेदन मांगे हैं। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के निर्देशों पर बिजली बोर्ड के कर्मियों को अन्य विभागों में शिफ्ट किया जा रहा है।

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बिजली बोर्ड के कार्यकारी निदेशक (कार्मिक) की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि समायोजन को लेकर जल शक्ति विभाग के साथ मामला उठाया गया था। इस पर विभाग ने कुछ अहम बिंदुओं पर स्पष्टता अनिवार्य बताते हुए शर्तें रखी हैं। जल शक्ति विभाग का कहना है कि सहायक अभियंता (सिविल) और कनिष्ठ अभियंता (सिविल) के समायोजन से पहले लिखित सहमति जरूरी होगी, अन्यथा भविष्य में अनावश्यक कानूनी विवाद खड़े हो सकते हैं। जल शक्ति विभाग ने स्पष्ट किया है कि बोर्ड से आने वाले सहायक अभियंता (सिविल) और कनिष्ठ अभियंता (सिविल) को जल शक्ति विभाग की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे स्थान स्वीकार करना होगा। यदि कर्मचारी यह विकल्प नहीं देते हैं तो विभाग उनकी सेवाएं लेने को तैयार नहीं होगा।

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जल शक्ति विभाग ने बोर्ड में सहायक अभियंता (सिविल) और कनिष्ठ अभियंता (सिविल) की भर्ती की प्रक्रिया, इन पदों के लिए लागू भर्ती एवं पदोन्नति (आरएंडपी) नियमों का पूरा ब्योरा भी मांगा है। विभाग ने यह शर्त भी रखी है कि प्रस्तावित अधिकारी/कर्मचारी जल शक्ति विभाग के आरएंडपी नियमों में निर्धारित न्यूनतम शैक्षणिक और तकनीकी योग्यताओं को पूरा करते हों। यदि कोई कर्मचारी इन मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उसके समायोजन पर सवाल खड़े हो सकते हैं। पत्र में यह भी पूछा गया है कि बोर्ड में कार्यरत एई (सिविल) और जेई (सिविल) का वेतनमान क्या हिमाचल प्रदेश सिविल सेवा (संशोधित वेतन) नियम 2022 के अनुसार है या नहीं। इसके साथ ही पेंशन का मुद्दा भी अहम बन गया है। राज्य सरकार के सभी कर्मचारी जहां सीसीएस (पेंशन) नियमों के तहत आते हैं, वहीं बोर्ड के कर्मचारी इन नियमों के दायरे में नहीं हैं।

ऐसे में वित्त विभाग से इस विषय पर स्पष्टता और अनुमति लेना अनिवार्य बताया गया है। जल शक्ति विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह बताया जाए कि संबंधित अधिकारी/कर्मचारी नियमित हैं, अनुबंध पर कार्यरत हैं या जॉब ट्रेनी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। इसके अलावा उनके खिलाफ कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई या न्यायालय में मामला लंबित है या नहीं, इसकी पूरी जानकारी भी मांगी गई है। इन सभी शर्तों और बिंदुओं के मद्देनजर बोर्ड ने उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से, जिन्होंने जल शक्ति विभाग में स्थायी समायोजन के लिए इच्छा जताई है, आग्रह किया है कि यदि वे इन शर्तों से सहमत हैं तो अपनी लिखित सहमति उचित माध्यम से पांच दिनों के भीतर भेजें। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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