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Himachal News: शिमला में सचिवालय के बाहर अपनी मांगों को लेकर गरजे 108 और 102 एबुलेंस कर्मचारी, देखें वीडियो

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Mon, 06 Apr 2026 04:40 PM IST
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सार

सोमवार को सचिवालय के बाहर 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन संबंधित सीटू ने धरना प्रदर्शन किया। कर्मचारियों का यह प्रदर्शन 12 अप्रैल तक जारी रहेगा। पढ़ें पूरी खबर...

Himachal Shimla 108 and 102 Ambulance Employees protest Outside Shimla Secretariat Over Their Demands
सचिवालय के बाहर एंबुलेंस कर्मियों का प्रदर्शन। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश 108 एवं 102 एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन संबंधित सीटू ने अपनी मांगों को लेकर सोमवार को सचिवालय के बाहर धरना प्रदर्शन किया। प्रदेश व्यापी इस हड़ताल में सैंकड़ों कर्मचारियों ने प्रदर्शन में भाग लिया। यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर मांगे पूरी नहीं हुई तो संघर्ष ओर तेज होगा। कर्मचारियों का यह प्रदर्शन 12 अप्रैल तक जारी रहेगा।

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पहले दिन प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा, महासचिव प्रेम गौतम, कोषाध्यक्ष जगत राम, यूनियन अध्यक्ष सुनील कुमार व महासचिव बालक राम ने कहा कि मुख्य नियोक्ता नेशनल हेल्थ मिशन के तहत कार्यरत मेडस्वान फाउंडेशन के अधीन काम कर रहे सैंकड़ों पायलट, कैप्टन व ईएमटी कर्मचारी शोषण के शिकार हैं।
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आलम यह है कि इन कर्मचारियों को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन तक नहीं मिल रहा है। बारह घंटे डयूटी करवाई जाती है, ओवरटाइम का भुगतान नहीं हो रहा है। उच्च न्यायालय, लेबर कोर्ट, सीजीएम कोर्ट शिमला और श्रम कार्यालय के आदेशों के बावजूद भी पिछले कई वर्षों से इन कर्मचारियों का शोषण बरकरार है। जब मजदूर अपनी यूनियन के माध्यम से अपनी मांगों के समाधान के लिए आवाज बुलंद करते हैं तो उन्हें मानसिक तौर व अन्य माध्यमों से प्रताड़ित किया जाता है। यूनियन के नेतृत्वकारी कर्मचारियों का या तो तबादला कर दिया जाता है या फिर उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित करके नौकरी से त्यागपत्र देने के लिए मजबूर कर दिया जाता है। कई कर्मचारियों को बिना कारण ही कई - कई महीनों तक डयूटी से बाहर रखा जाता है।

कर्मचारियों के ईपीएफ व ईएसआई के क्रियान्वयन में भी भारी त्रुटियां हैं। ईपीएफ के दोनों शेयर कर्मचारियों से ही काटे जा है। कुल वेतन में इनका मूल वेतन बेसिक सेलरी भी कम है। मेडस्वेन फाउंडेशन से पूर्व ये कर्मचारी जीवीके ईएमआरआई के पास कार्यरत थे। जीवीके ईएमआरआई कंपनी से नौकरी से छंटनी व सेवा समाप्ति पर इन कर्मचारियों को छंटनी भत्ता, ग्रेच्युटी, नोटिस पे व अन्य प्रकार के एरियर का भुगतान नहीं किया गया। इस तरह ये कर्मचारी भयंकर रूप से शोषित हैं। उन्होंने मांग की है कि कर्मचारियों को सरकारी नियमानुसार न्यूनतम वेतन का भुगतान किया जाए। बारह घंटे कार्य करने पर नियमानुसार डबल ओवरटाइम वेतन का भुगतान किया जाए। कर्मचारियों को नियमानुसार सभी छुट्टियों का प्रावधान किया जाए। गाड़ियों की मेंटेनेंस व इंश्योरेंस के दौरान कर्मचारियों का वेतन न काटा जाए व कर्मचारियों को पूर्ण वेतन का भुगतान किया जाए।

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