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HP High Court: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- अस्पताल में कौन सी मशीन लगेगी, विशेषज्ञों-सरकार का काम

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Tue, 13 Jan 2026 05:00 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि अस्पताल में कौन सी मशीन लगनी चाहिए, यह तय करना विशेषज्ञों और सरकार का काम है। पढ़ें पूरा मामला...

HP High Court said which machine will be installed in the hospital, experts - government work
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपर स्पेशियलिटी चमियाना और टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी प्रणाली स्थापित करने के टेंडर को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने फैसले में कहा है कि तकनीकी विशेषज्ञों का निर्णय न्यायिक समीक्षा के दायरे में तब तक नहीं आता जब तक कि उसमें कोई दुर्भावना या स्पष्ट मनमानापन न दिखे।

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खंडपीठ ने कहा कि न्यायाधीशों के पास तकनीकी विषयों की विशेषज्ञता नहीं होती। अस्पताल में कौन सी मशीन लगनी चाहिए, यह तय करना विशेषज्ञों और सरकार का काम है। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि याचिकाकर्ता ने याचिका में पिछले दो टेंडर प्रयासों की जानकारी पूरी तरह से नहीं दी थी, जिसमें वह पहले भी तकनीकी आधार पर अयोग्य घोषित हो चुका था। एक तरफ कंपनी ने टेंडर जमा करते समय सभी शर्तें पूरी करने का दावा किया, वहीं दूसरी तरफ सरकार को पत्र लिखकर अनुरोध किया कि कुछ फीचर्स (जैसे रिस्टेड स्टैपलर्स) को भविष्य में अपग्रेड करने की छूट दी जाए क्योंकि उनकी कंपनी अभी इसकी मंजूरी लेने की प्रक्रिया में है।

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उल्लेखनीय है कि सरकार ने राज्य के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में आधुनिक रोबोटिक सर्जरी मशीनें लगाने के लिए पहली बार जुलाई 2023 में टेंडर निकाला था। पर्याप्त प्रतिस्पर्धी बोलियां न मिलने और तकनीकी नियमों के कारण प्रक्रिया को तीन बार दोहराया गया। पहला टेंडर जुलाई 2023 में निकाला गया। दूसरा सितंबर 2023 में, जिसमें याचिकाकर्ता कंपनी और प्रतिवादी कंपनी ने भाग लिया था और तीसरा टेंडर अगस्त 2024 में निकाला गया, इसके बाद वर्तमान विवाद उत्पन्न हुआ।कोर्ट ने पाया कि तकनीकी मूल्यांकन समिति ने दोनों कंपनियों के उत्पादों का भौतिक निरीक्षण दिल्ली के प्रतिष्ठित अस्पतालों और फैक्ट्रियों में किया था।

समिति ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता कंपनी कई महत्वपूर्ण तकनीकी शर्तों को पूरा नहीं करती थी। रिपोर्ट के अनुसार, याचिकाकर्ता कंपनी द्वारा दिखाए गए रोबोटिक स्टैपलर अभी भी विकासात्मक चरण में थे और उनका मानव शरीर पर सफल प्रदर्शन नहीं किया गया था, जबकि टेंडर की शर्तों के अनुसार पूर्ण विकसित तकनीक अनिवार्य थी। अदालत ने कहा कि सरकार और तकनीकी समिति की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष थी और इसमें किसी भी प्रकार का पक्षपात या भ्रष्टाचार नहीं पाया गया।
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