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अदालत: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा- नशे में धुत्त होकर गाड़ी चलाना समाज के लिए खतरा, जानें पूरा मामला

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Fri, 17 Apr 2026 05:00 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि नशे में धुत्त होकर गाड़ी चलाना न केवल समाज के लिए खतरा है, बल्कि इसकी वजह से बिना कसूर के कई मासूमों की जिंदगियां को भी जोखिम में डाला जाता है। पूरी खबर पढ़ें...

HP High Court States Driving While Intoxicated Poses a Threat to Society
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने नशे की हालत में लापरवाही से वाहन चलाने वाले एक व्यक्ति की सजा को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया है कि सड़क दुर्घटनाओं के बढ़ते मामलों में दोषियों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। अदालत ने कहा कि नशे में धुत्त होकर गाड़ी चलाना न केवल समाज के लिए खतरा है, बल्कि इसकी वजह से बिना कसूर के कई मासूमों की जिंदगियां को भी जोखिम में डाला जाता है। उन्होंने कहा कि सड़कों पर रहम की गुंजाइश नहीं बरती जानी चाहिए। न्यायाधीश राकेश कैंथला की अदालत ने यह निर्णय निचली अदालतों के फैसले के खिलाफ दायर आरोपी की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए दिया है।

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अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत में सड़क दुर्घटनाएं एक गंभीर समस्या बन चुकी हैं। सड़क पर चलने वाले लोग,पैदल यात्री और सभ्य चालक हमेशा इस डर में रहते हैं कि कब कोई लापरवाह चालक उन्हें अपनी चपेट में ले ले।अदालत ने आरोपी को प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट (अच्छे व्यवहार के आधार पर रिहाई)का लाभ देने से साफ इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि रैश ड्राइविंग के मामलों में सजा ऐसी होनी चाहिए जो समाज में एक डर पैदा करे। आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 279 और मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं (181, 185, 192ए) के तहत एक महीने के कारावास और जुर्माने की सजा दी गई है।

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उल्लेखनीय है कि यह मामला 21 सितंबर 2011 का है, जब दोषी टिपपर चालक नाहन के कटासन के पास शराब के नशे में बेहद तेज रफ्तार से वाहन चला रहा था। इस दौरान उसने सामने से आ रहे एक ट्रक को टक्कर मार दी, जिससे उसका अपना टिपपर भी सड़क पर पलट गया। गनीमत यह रही कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई, लेकिन ट्रक को काफी नुकसान पहुंचा था। पुलिस जांच के दौरान जब आरोपी का मेडिकल कराया गया, तो पाया गया कि उसके खून में अल्कोहल की मात्रा 268.18 एमजी प्रतिशत थी। मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार, कानूनी सीमा केवल 30 एमजी प्रति 100 एम एल है। यानी आरोपी कानूनी सीमा से करीब 9 गुना ज्यादा नशे में था। इसके अलावा आरोपी के पास न तो वैध ड्राइविंग लाइसेंस था और न ही वाहन का रूट परमिट।
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