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Akshaya Tritiya 2026: अक्षय तृतीया आज, जानें सोना-चांदी खरीदने का मुहूर्त, उपाय, पूजा विधि सबकुछ विस्तार से

भारती शर्मा, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Sun, 19 Apr 2026 09:14 AM IST
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सार

सनातन धर्म में अक्षय तृतीया को बेहद शुभ और पुण्यदायी तिथि माना गया है। साल 2026 में यह पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। खरीदारी और शुभ मुहुर्त, पूजा विधि और महत्व सबकुछ जानें
 

Akshaya Tritiya falls on April 19 date time significance puja shubh muhurat and importance
Akshaya Tritiya 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और मंगलकारी पर्व माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन किया गया दान, जप, तप और खरीदारी कभी व्यर्थ नहीं जाती बल्कि उसका फल कई गुना बढ़कर मिलता है। खासतौर पर सोना खरीदने की परंपरा इसलिए प्रचलित है क्योंकि सोना धन-समृद्धि और स्थायी संपत्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना परिवार में सुख-समृद्धि और आर्थिक मजबूती लेकर आता है।

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केवल डेढ़ घंटे का शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माने जाने वाले अक्षय तृतीया का पर्व इस वर्ष 19 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस वर्ष खरीदारी के लिए केवल डेढ़ घंटे का शुभ मुहूर्त है। राधा कृष्ण मंदिर के पंडित उमेश नौटियाल ने बताया कि तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे शुरू होकर 20 अप्रैल सुबह 7:27 बजे समाप्त होगी। इस दौरान खरीदारी का मुख्य शुभ मुहूर्त सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक है जो 1 घंटा 32 मिनट की अवधि का है। वहीं, पूजा और दान के लिए शुभ मुहुर्त सुबह 10:49 बजे से दोपहर 1:27 तक है। इस दिन आप पूरा दिन कोई शुभ कार्य कर सकते हैं।


ऐसा माना जाता है कि इस दिन खरीदा गया सोना-चांदी कभी समाप्त नहीं होता और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है। यही कारण है कि बाजारों में इस दिन खासा उत्साह देखने को मिलता है और ज्वेलरी दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ती है। अक्षय तृतीया केवल खरीदारी का ही नहीं, बल्कि नए कार्यों की शुरुआत, निवेश और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए भी उपयुक्त अवसर माना जाता है। इस दिन लोग पूजा-पाठ, दान-पुण्य और धार्मिक गतिविधियों में भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं।

अक्षय तृतीया का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार अक्षय तृतीया का दिन कई दिव्य घटनाओं से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने परशुराम अवतार लिया था, इसलिए इसे परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। त्रेतायुग का आरंभ भी इसी तिथि से माना जाता है, जिससे इसकी महत्ता और बढ़ जाती है। इस दिन चारधाम में से एक धाम श्रीबदरीनाथ के कपाट भी खुलते हैं।

अक्षय तृतीया पूजा-विधि
अक्षय तृतीया के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर समुद्र, गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्व बताया गया है। यदि संभव न हो तो घर में ही स्नान करके भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की शांत मन से पूजा करनी चाहिए। इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा सफेद या पीले कमल अथवा गुलाब के पुष्पों से करना शुभ माना गया है। नैवेद्य में गेहूं, जौ, चने का सत्तू, मिश्री, नीम की कोपल, ककड़ी और भीगी हुई चने की दाल अर्पित की जाती है। मान्यता है कि इस दिन सत्तू का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर को शीतलता प्रदान करता है और स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी होता है।

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