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Shimla News: पाठ्यक्रम और शोध में जेंडर दृष्टिकोण भी करवाएं शामिल
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विवि में हुई कार्यशाला में वक्ताओं ने की वकालत
समाज में संतुलित और समावेशी विकास को मिलगा बढ़ावा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र ने इंटीग्रेटिंग जेंडर इन करिकुलम एंड रिसर्च विषय पर बुधवार को कौशल विकास कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें पाठ्यक्रम और शोध में जेंडर दृष्टिकोण को शामिल करने की वकालत की गई।कार्यशाला केंद्र सरकार की पीएम-उषा के तहत हुई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. जोगिंदर एस. धीमान ने कहा कि शिक्षा और शोध में जेंडर समानता को शामिल करना अब केवल विकल्प नहीं बल्कि नई शिक्षा नीति का अहम हिस्सा बन चुका है। इससे समाज में संतुलित और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा। विशिष्ट अतिथि प्रो. प्रदीप कुमार ने नई शिक्षा नीति में जेंडर समावेशन को प्रमुख घटक बताते हुए कहा कि इसे प्रभावी रूप से पाठ्यक्रम में लागू करना विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है। वहीं प्रो. नीलिमा कंवर ने भाषा और साहित्य के माध्यम से जेंडर संवेदनशीलता विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र की निदेशक प्रो. अपर्णा नेगी ने कहा कि जेंडर समानता को शोध और शिक्षण में प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने शोधार्थियों और युवा शिक्षकों को अपने कार्य में जेंडर दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला में आचार्य मीनाक्षी फेथ पॉल और आचार्य केके शर्मा ने संसाधन व्यक्ति के रूप में प्रतिभागियों को जेंडर संवेदनशील भाषा और शोध पद्धतियों की जानकारी दी। संवाद
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समाज में संतुलित और समावेशी विकास को मिलगा बढ़ावा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र ने इंटीग्रेटिंग जेंडर इन करिकुलम एंड रिसर्च विषय पर बुधवार को कौशल विकास कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें पाठ्यक्रम और शोध में जेंडर दृष्टिकोण को शामिल करने की वकालत की गई।कार्यशाला केंद्र सरकार की पीएम-उषा के तहत हुई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. जोगिंदर एस. धीमान ने कहा कि शिक्षा और शोध में जेंडर समानता को शामिल करना अब केवल विकल्प नहीं बल्कि नई शिक्षा नीति का अहम हिस्सा बन चुका है। इससे समाज में संतुलित और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलेगा। विशिष्ट अतिथि प्रो. प्रदीप कुमार ने नई शिक्षा नीति में जेंडर समावेशन को प्रमुख घटक बताते हुए कहा कि इसे प्रभावी रूप से पाठ्यक्रम में लागू करना विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है। वहीं प्रो. नीलिमा कंवर ने भाषा और साहित्य के माध्यम से जेंडर संवेदनशीलता विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र की निदेशक प्रो. अपर्णा नेगी ने कहा कि जेंडर समानता को शोध और शिक्षण में प्राथमिकता देना जरूरी है। उन्होंने शोधार्थियों और युवा शिक्षकों को अपने कार्य में जेंडर दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला में आचार्य मीनाक्षी फेथ पॉल और आचार्य केके शर्मा ने संसाधन व्यक्ति के रूप में प्रतिभागियों को जेंडर संवेदनशील भाषा और शोध पद्धतियों की जानकारी दी। संवाद
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