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किन्नाैर: आईजीएसटी बना रोड़ा, शिपकी ला से छह साल बाद शुरू हुआ व्यापार फिर थमा

Wed, 05 Aug 2026 06:32 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर बुशहर।
संवाद न्यूज एजेंसी, रामपुर बुशहर। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 05 Aug 2026 06:32 PM IST
सार

आयातित सामान पर आईजीएसटी (इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) लगाए जाने के विरोध में किन्नौर इंडो-चाइना ट्रेड एसोसिएशन ने कर में छूट मिलने तक चीन के साथ सीमा व्यापार पूरी तरह रोकने का फैसला किया है।

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Kinnair: IGST becomes a hurdle, trade resumed from Shipki La after six years, halted again
शिपकी-ला - फोटो : जागरूक पाठक

विस्तार

शिपकी ला के रास्ते चीन के साथ सीमा व्यापार छह साल बाद शुरू होते ही विवादों में घिर गया है। आयातित सामान पर आईजीएसटी (इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) लगाए जाने के विरोध में किन्नौर इंडो-चाइना ट्रेड एसोसिएशन ने कर में छूट मिलने तक चीन के साथ सीमा व्यापार पूरी तरह रोकने का फैसला किया है। शिपकी ला के जरिये भारत-चीन सीमा व्यापार के माध्यम से आयातित सामान पर आईजीएसटी लगाने के बारे में कस्टम विभाग से मिली सूचना के बाद एसोसिएशन ने आपात बैठक बुलाई। व्यापारियों का कहना है कि आईजीएसटी के कारण उन पर वित्तीय बोझ काफी बढ़ गया है।

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भारत सरकार की अधिसूचना संख्या 38/96-सीमा शुल्क के तहत 23 जुलाई 1996 से सीमा शुल्क से छूट दी गई थी। इसका उद्देश्य पारंपरिक सीमा व्यापार को बढ़ावा देना और इसे बनाए रखना था। एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया कि जब तक आईजीएसटी से भी छूट नहीं मिल जाती, तब तक कोई भी पंजीकृत व्यापारी चीन के साथ व्यापार नहीं करेगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष हिशे नेगी ने कहा कि यह व्यापार पारंपरिक आजीविका का साधन है। यह सामान्य वाणिज्यिक आयात-निर्यात गतिविधि नहीं है। यह सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आर्थिक भलाई में सुधार करता है।

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एसोसिएशन ने व्यापार को अव्यावहारिक बनाने वाले कई कारण बताए हैं। इसमें व्यापार का सीमित मूल्य, कठिन भूभाग और खच्चरों से परिवहन शामिल है। एसोसिएशन ने भारत सरकार, वित्त मंत्रालय और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड से अपील की है। उन्होंने जीएसटी परिषद से शिपकी ला के माध्यम से आयातित वस्तुओं पर आईजीएसटी छूट देने का अनुरोध किया है। यह छूट सीमा शुल्क छूट के समान होनी चाहिए, जो पहले से ही उपलब्ध है। एसोसिएशन का मानना है कि यह व्यापार सीमावर्ती समुदायों की आजीविका का पारंपरिक साधन है।

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छह साल बाद शुरू हुआ है कारोबार
बता दें कि शिपकी ला के रास्ते चीन से शनिवार को छह साल बाद कारोबार शुरू हुआ है। पहले दल में 16 व्यापारी तिब्बत गए। सोमवार को यह व्यापारी 72 घंटे में लौट आए थे। व्यापारियों ने तिब्बत में गुड़, दालें, कारपेट, बिस्कुट, तेल, चाय को निर्यात किया, इनके बदले आयात कर चादरें, जूते, घड़ियां और चाइना क्ले लेकर आए। कस्टम विभाग की ओर से पहली बार शिपकी ला के रास्ते आयात करके लाए गए सामान पर आईजीएसटी लिया गया है। हालांकि, आईजीएसटी प्रणाली जुलाई 2017 से लागू हो गई है।

व्यापारियों की ओर से आईजीएसटी पर मांगी गई छूट के बारे में कस्टम विभाग से बात की गई है। इस संबंध में आगामी निर्णय कस्टम विभाग की ओर से ही लिया जाएगा। -डॉ. अमित कुमार शर्मा, उपायुक्त, किन्नौर।

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