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Himachal News: हिमाचल में बारिश की बेरुखी, शीतलहर से 75 फीसदी तक गिरा बिजली उत्पादन; ठंडक से डिमांड बढ़ी

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: अंकेश डोगरा Updated Thu, 08 Jan 2026 06:00 AM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश में कई परियोजनाओं में बिजली उत्पादन 75 फीसदी तक घट गया है। वहीं, राज्य में रोजाना बिजली की मांग 400 लाख यूनिट तक पहुंच गई है। पढ़ें पूरी खबर...
 

Lack of rainfall in Himachal leads to a 75 percent drop in power generation due to cold wave
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश में मानसून के बाद लंबे समय से बारिश न होने और पहाड़ों में शीतलहर से जल विद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ है। नदियों और खड्डों में जलस्तर लगातार गिरने से प्रदेश की कई परियोजनाओं में बिजली उत्पादन 75 फीसदी तक घट गया है। हालात यह हैं कि अनेक पावर प्रोजेक्टों में केवल नाममात्र का उत्पादन हो पा रहा है।

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प्रदेश की जलविद्युत परियोजनाओं से इन दिनों औसतन 210 लाख यूनिट बिजली प्रतिदिन का ही उत्पादन हो रहा है, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह आंकड़ा 250 लाख यूनिट तक रहता है। उत्पादन में आई भारी गिरावट के चलते राज्य को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए करीब 180 लाख यूनिट बिजली प्रतिदिन बैंकिंग के तहत बाहर से लेनी पड़ रही है।

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मौसम में लगातार बढ़ रही ठंडक और शीतलहर के कारण प्रदेश में बिजली की खपत तेजी से बढ़ी है। हीटर, ब्लोअर और अन्य उपकरणों के बढ़ते इस्तेमाल से राज्य में रोजाना बिजली की मांग 400 लाख यूनिट तक पहुंच गई है। हालांकि उत्पादन और मांग के बीच बढ़ते अंतर के बावजूद फिलहाल प्रदेश में बिजली संकट जैसी स्थिति नहीं बनी है।

ऊर्जा विभाग के अनुसार प्रदेश की बढ़ी हुई मांग को पूरा करने के लिए पंजाब और छत्तीसगढ़ से बिजली सप्लाई ली जा रही है। बैंकिंग व्यवस्था और ग्रिड से अतिरिक्त बिजली लेकर फिलहाल संतुलन बनाए रखा गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं को कटौती का सामना नहीं करना पड़ रहा। बारिश और बर्फबारी न होने का सीधा असर नदियों के जलस्तर पर पड़ा है। सतलुज, ब्यास, रावी और उनकी सहायक नदियों में पानी की मात्रा काफी कम हो गई है। इसका असर छोटे और मध्यम जलविद्युत प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा दिख रहा है, जहां टरबाइन चलाने लायक पानी भी मुश्किल से मिल पा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि यदि आने वाले दिनों में बारिश या बर्फबारी नहीं हुई, तो उत्पादन पर दबाव और बढ़ सकता है। हालांकि, दावा है कि वैकल्पिक इंतजाम किए गए हैं और उपभोक्ताओं को फिलहाल किसी बड़े संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा।

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