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Himachal News: हिमाचल सरकार को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, सीबीएसई शिक्षकों के टेस्ट मामले में दायर याचिका खारिज

संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Ankesh Dogra Updated Wed, 29 Apr 2026 04:17 PM IST
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सार

हिमाचल प्रदेश में सीबीएसई स्कूलों में टीचर नियुक्ति के मामले में हिमाचल हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। ज्वाइंट टीचर्स फ्रंट की ओर से दायर याचिका को हिमाचल हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने खारिज कर दिया है। पढ़ें पूरी खबर...

Major Relief for Himachal Government from High Court Petition Challenging Test for CBSE Teachers Dismissed
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार

हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों को सीबीएसई स्कूलों में बदलने और शिक्षकों का एक नया सब-कैडर बनाने के राज्य सरकार के निर्णय पर अपनी मुहर लगा दी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने जॉइंट टीचर्स फ्रंट और अन्य याचिका को खारिज करते हुए सरकार की नीति को वैध ठहराया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीएसई स्कूलों में तैनाती के लिए सेवारत शिक्षकों को लिखित परीक्षा और काउंसलिंग प्रक्रिया को तर्कसंगत और पारदर्शी माना गया है।

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अदालत ने माना कि राज्य सरकार के पास अनुच्छेद 162 के तहत शिक्षकों का एक समर्पित सब-कैडर बनाने का पूर्ण अधिकार है, ताकि स्कूलों में उत्कृष्टता और निरंतरता बनी रहे।चयन प्रक्रिया निष्पक्ष, न्यायसंगत और पारदर्शी है। अदालत ने कहा कि पैरा 5.5 किसी भी कानून का उल्लंघन नहीं करता। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार 5 मार्च को आयोजित हुई स्क्रीनिंग परीक्षा का परिणाम घोषित कर सकेगी। इसके अलावा मेरिट के आधार पर शिक्षकों की काउंसलिंग और तैनाती की प्रक्रिया शुरू होगी।प्रदेश के 134 से अधिक सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पैटर्न पर पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू हो सकेगी।

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याचिकाओं में तर्क दिया गया था कि यह वर्ग के भीतर वर्ग बनाने जैसा है, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए कहा कि यह चयन प्रक्रिया स्वैच्छिक है और किसी के सेवा हितों का नुकसान नहीं करती। शिक्षकों के संगठनों ने सरकार की 19 जनवरी 2026 की अधिसूचना के पैरा 5.5 को चुनौती दी थी। उनकी मुख्य दलीलें थी कि पुराने अनुभवी शिक्षकों को नए शिक्षकों के साथ लिखित परीक्षा में बैठाना गलत है। परीक्षा में फेल होने पर शिक्षकों का मनोबल गिरेगा और शैक्षणिक माहौल खराब होगा।शिक्षकों को डर था कि सीबीएसई स्कूलों में जाने से उनके मूल कैडर में पदोन्नति पर असर पड़ेगा। कोर्ट ने कहा कि सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि इन शिक्षकों का लियन उनके मूल कैडर में सुरक्षित रहेगा और उनकी वरिष्ठता या पदोन्नति पर कोई आंच नहीं आएगी।

सार्वजनिक हित व्यक्तिगत कठिनाई से ऊपर
अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि कुछ शिक्षकों को होने वाली व्यक्तिगत कठिनाई या तबादले का डर, व्यापक सार्वजनिक हित के आड़े नहीं आ सकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूलों को उत्कृष्टता के केंद्र के रूप में विकसित करना सरकार का नीतिगत निर्णय है, जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप की गुंजाइश सीमित है।

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