एनईपी: स्नातक की सात साल में पूरी कर सकेंगे डिग्री, माइग्रेशन करवाना होगा आसान
प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में नई स्नातक प्रणाली लागू करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है।
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में नई स्नातक प्रणाली लागू करने की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। नई व्यवस्था में विद्यार्थियों को स्नातक कोर्स अधिकतम सात वर्ष में पूरा करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही स्नातक सर्टिफिकेट के लिए 44 क्रेडिट, डिप्लोमा के लिए 86, तीन वर्षीय डिग्री के लिए 128 और चार वर्षीय ऑनर्स डिग्री के लिए 168 क्रेडिट अर्जित करना अनिवार्य होगा। सेमेस्टर और क्रेडिट आधारित ढांचे से दूसरे विश्वविद्यालयों में माइग्रेशन करवाना भी आसान हो जाएगा। विश्वविद्यालय सभागार में बुधवार को ओरिएंटेशन कार्यशाला में प्रदेशभर के 130 सरकारी और निजी कॉलेजों के प्राचार्यों, शिक्षकों और विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
नई प्रणाली में विद्यार्थियों को अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने और बदलने की सुविधा मिलेगी। वह अलग-अलग विषयों से क्रेडिट अर्जित कर डिग्री पूरी कर सकेंगे। कार्यशाला में अकादमिक बैंक ऑफ क्रेडिट, परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली, डिजिटल पोर्टल और यूनिक छात्र आईडी जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी गई। शिक्षकों को पढ़ाने के साथ-साथ सतत मूल्यांकन की जिम्मेदारी भी निभानी होगी, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके। विश्वविद्यालय प्रशासन जल्द दिशा-निर्देश जारी करेगा। नई व्यवस्था लागू होने से प्रदेश के 130 से अधिक कॉलेजों की शैक्षणिक संरचना में बदलाव आएगा और छात्रों को रोजगारोन्मुख शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे। कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेज एक ही अकादमिक ढांचे का हिस्सा हैं, इसलिए सभी संस्थानों को समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने बताया कि नई प्रणाली में मेजर, माइनर, कोर और नॉन-कोर विषयों की संरचना लागू की जाएगी।
देश के अधिकांश विश्वविद्यालय इस प्रणाली को अपना चुके हैं। इससे हिमाचल के छात्रों के लिए अन्य राज्यों के कॉलेजों में प्रवेश और माइग्रेशन करवाना सरल होगा। पहले वार्षिक कार्यक्रम के कारण छात्रों को माइग्रेशन में दिक्कत होती थी, जो अब आसान होगा। - राकेश कंवर, शिक्षा सचिव
जहां से 60 फीसदी क्रेडिट, वहां से मिलेगी डिग्री
नई शिक्षा नीति के तहत छात्र केवल उसी कोर्स में माइग्रेशन ले सकेंगे, जिसमें छात्र ने एडमिशन ली होगी। माइग्रेशन के बाद छात्र को उस विश्वविद्यालय से डिग्री मिलेगी, जिससे उसने कुल अर्जित क्रेडिट के 60 फीसदी क्रेडिट अर्जित किए होंगे। क्रेडिट की संख्या की पुष्टि के बाद ही विद्यार्थी को डिग्री दी जाएगी।
डिग्री कॉलेजों में बिना इंटर्नशिप के विद्यार्थियों को नहीं मिलेगी डिग्री
हिमाचल प्रदेश के डिग्री कॉलेजों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत पढ़ाई का स्वरूप पूरी तरह बदलने जा रहा है। करिकुलम एंड क्रेडिट फ्रेमवर्क लागू होने के साथ अब सभी कॉलेजों में सेमेस्टर और क्रेडिट आधारित प्रणाली अनिवार्य होगी। नई व्यवस्था के तहत हर वर्ष इंटर्नशिप करना जरूरी होगा और इसे पूरा किए बिना छात्रों को डिग्री नहीं मिलेगी। नई प्रणाली में पाठ्यक्रम को कोर और कॉमन/स्किल आधारित विषयों में विभाजित किया गया है। प्रवेश के समय छात्रों को तीन कोर विषय चुनने होंगे, जबकि अन्य विषय रुचि और डिग्री के अनुसार होंगे। पहले वर्ष में कोर विषय बदलने की अनुमति नहीं होगी। तीसरे सेमेस्टर से छात्रों को कोर विषयों में से किसी एक को मेजर घोषित करने का विकल्प मिलेगा। मेजर विषय लेने पर हर सेमेस्टर में उसके दो पेपर देने होंगे, जबकि एक अन्य कोर विषय माइनर रहेगा। एक बार मेजर चुनने के बाद उसमें बदलाव तब तक संभव नहीं होगा, जब तक छात्र पांचवें सेमेस्टर में कोर्स से बाहर निकलने का विकल्प न चुनें।
चार वर्षीय कोर्स के लिए कॉलेजों की सूची जल्द
ऑनर्स डिग्री के लिए छठे सेमेस्टर तक किसी एक कोर विषय में कम से कम पांच पेपर पास करना अनिवार्य होगा। ऑनर्स विद रिसर्च के लिए पहले तीन सेमेस्टर में 75 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। पहले सेमेस्टर के छात्रों को ऑनलाइन कोर्स चुनने की अनुमति नहीं होगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने ऑनर्स विद रिसर्च कार्यक्रम के लिए सख्त शैक्षणिक मानक तय किए हैं। किसी भी कॉलेज में इस कोर्स को संचालित करने के लिए कम से कम दो पीएचडी योग्य प्रोफेसर होना अनिवार्य होगा। एचपीयू के डीन ऑफ स्टडीज बीके शिवराम ने बताया कि सभी कॉलेजों में तीन वर्षीय कोर्स उपलब्ध रहेगा, लेकिन चार वर्षीय कोर्स केवल उन्हीं कॉलेजों में शुरू होगा जहां शोध सुविधाएं होंगी।
