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Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   New Technology: Every drop of hill lemon to yield profit; juice will stay fresh for up to 90 days.

नई तकनीक: पहाड़ी नींबू बनेगा मनी फ्रूट, 90 दिन तक खराब नहीं होगा जूस, बागवानों के लिए खुले कमाई के रास्ते

Fri, 03 Jul 2026 05:50 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Fri, 03 Jul 2026 05:50 AM IST
सार

डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के तहत आने वाले बागवानी एवं वानिकी कॉलेज नेरी को यह सफलता मिली है।

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New Technology: Every drop of hill lemon to yield profit; juice will stay fresh for up to 90 days.
नींबू। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

बागवानी विशेषज्ञों ने पहाड़ी नींबू का जूस निकालने की एक ऐसी तकनीक खोजी है जिससे इससे 90 दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकेगा। इससे इस फल को उगाना बागवानों के लिए मुनाफे का काम होगा। डॉ. वाईएस परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के तहत आने वाले बागवानी एवं वानिकी कॉलेज नेरी को यह सफलता मिली है। इस संबंध में इस संस्थान की सहायक आचार्य डॉ. प्रीति चौधरी की निगरानी में शोधार्थी सुमित्रे श्रेय ने शोध किया है। इसमें विश्वविद्यालय के पूर्व प्रो. पीसी शर्मा का भी विशेष सहयोग रहा, जबकि बायोकेमिस्ट मीनाक्षी ठाकुर ने भी योगदान दिया। यह शोध जर्नल ऑफ हॉर्टिकल्चरल साइंसेज में प्रकाशित हुआ है।

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विभिन्न रस निष्कर्षण तकनीकों की तुलना की गई

शोध में विभिन्न रस निष्कर्षण तकनीकों की तुलना की गई। छिलके सहित निकाले गए रस में पॉलीफेनॉल और फ्लेवोनॉयड अधिक थे, लेकिन कड़वाहट भी बढ़ गई थी। बिना छिलके के रस निकालने से कड़वाहट कम होती है। इस शोध में पाया गया कि स्क्रू-टाइप जूसर से बिना छिलके के रस निकालने पर 49.17 फीसदी तक जूस प्राप्त होता है। इस विधि से निकाले गए रस की गुणवत्ता और पारदर्शिता बेहतर पाई गई। इसमें पोटैशियम मेटाबाइसल्फाइट (केएमएस) का उपयोग कर रस को 90 दिनों तक संरक्षित रखा जा सकता है। केएमएस से संरक्षित रस में स्वाद, रंग और पोषक तत्व अच्छी तरह बने रहते हैं। सोडियम बेंजोएट भी रस को सुरक्षित रखने में प्रभावी पाया गया।

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पहाड़ी नींबू में लगभग 42.70 फीसदी रस: शोधकर्ता

पाश्चुरीकरण विधि में गर्मी के कारण विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट में अधिक कमी देखी गई। शोधकर्ताओं के अनुसार पहाड़ी नींबू में लगभग 42.70 फीसदी रस होता है। इसमें उच्च अम्लीय प्रकृति है जिसका पीएच 2.48 पाया गया। प्रति 100 ग्राम में 40.68 मिलीग्राम विटामिन-सी और लगभग 66.57 फीसदी एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि दर्ज की गई। इसने इसे एक स्वास्थ्यवर्धक पेय बनाया। शोधकर्ताओं का मानना है कि पहाड़ी नींबू का उपयोग पेय बनाने में किया जा सकता है। डॉ. प्रीति चौधरी ने बताया कि इस तकनीक से निकाले गए रस को लंबे समय तक संरक्षित रखने के साथ इसका अन्य मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण में भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तकनीक से हिमाचल के बागवानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्हें अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार और अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे। यह तकनीक स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में भी सहायक होगी।

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