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Shimla News: चेक बाउंस में दोषी को एक साल की जेल, 2.28 लाख रुपये जुर्माना
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निचली अदालत के फैसले पर की थी अपील
पीवीसी विनायल फ्लोरिंग का कार्य दोषी नहीं कर पाया था पूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी को एक साल के साधारण कारावास की सजा और 2.28 लाख रुपये जुर्माना लगाया है।
जिला न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को सुरक्षित रखा है। शिकायतकर्ता ने दोषी को पीवीसी विनायल फ्लोरिंग के कार्य के लिए 1.50 लाख रुपये दिए थे। शिकायतकर्ता शिव कुमार कुठियाला संजाैली निवासी सरकारी ठेकेदार है, उन्हें नवबहार में सुपरवाइजर ट्रेनिंग सेंटर के निर्माण का कार्य मिला था। शिव कुमार ने अमित चाैहान निवासी सोलन को फ्लोरिंग का कार्य सौंपा लेकिन वह कार्य समय पर पूरा नहीं कर पाया। इसके बाद शिव कुमार ने पैसे वापस मांगे तो अमित ने चेक दिया जो बैंक में बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए एक साल का साधारण कारावास और 2,28,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ दोषी ने अपील की थी। अतिरिक्त न्यायाधीश की अदालत ने पाया कि दोषी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर को स्वीकारा है, वह यह साबित नहीं कर पाया की चेक उसने नहीं दिया था।
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पीवीसी विनायल फ्लोरिंग का कार्य दोषी नहीं कर पाया था पूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी को एक साल के साधारण कारावास की सजा और 2.28 लाख रुपये जुर्माना लगाया है।
जिला न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को सुरक्षित रखा है। शिकायतकर्ता ने दोषी को पीवीसी विनायल फ्लोरिंग के कार्य के लिए 1.50 लाख रुपये दिए थे। शिकायतकर्ता शिव कुमार कुठियाला संजाैली निवासी सरकारी ठेकेदार है, उन्हें नवबहार में सुपरवाइजर ट्रेनिंग सेंटर के निर्माण का कार्य मिला था। शिव कुमार ने अमित चाैहान निवासी सोलन को फ्लोरिंग का कार्य सौंपा लेकिन वह कार्य समय पर पूरा नहीं कर पाया। इसके बाद शिव कुमार ने पैसे वापस मांगे तो अमित ने चेक दिया जो बैंक में बाउंस हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी करार देते हुए एक साल का साधारण कारावास और 2,28,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ दोषी ने अपील की थी। अतिरिक्त न्यायाधीश की अदालत ने पाया कि दोषी ने चेक पर अपने हस्ताक्षर को स्वीकारा है, वह यह साबित नहीं कर पाया की चेक उसने नहीं दिया था।
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