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Shimla News: मंच के अधिवेशन में स्वास्थ्य क्षेत्र के निजीकरण का विरोध

Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Fri, 06 Mar 2026 11:59 PM IST
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Opposition to privatization of health sector in the forum's convention
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वक्ताओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सामाजिक जवाबदेही तय करने की उठाई मांग
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क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू करने का आग्रह

अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जन स्वास्थ्य अभियान मंच के तहत शुक्रवार को वाईडब्ल्यूसीए में आयोजित राज्य स्तरीय अधिवेशन में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण का विरोध किया गया। इसके साथ ही वक्ताओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था में सामाजिक जवाबदेही तय करने की मांग की।

अधिवेशन में मंच का पुनर्गठन और विस्तार करने का फैसला भी लिया गया। इसके अलावा सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने के प्रति सरकार को जिम्मेदारी की याद दिलाई गई। इसमें प्रदेशभर से स्वास्थ्य अधिकार से जुड़े कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ जन स्वास्थ्य के विशेषज्ञों ने भाग लिया। अधिवेशन में स्वास्थ्य का अधिकार (राइट टू हेल्थ) नीति की आवश्यकता, सरकार की स्वास्थ्य नीति, स्वास्थ्य सेवाओं में मौजूद विभिन्न खामियों को उजागर किया और स्वास्थ्य व्यवस्था में सामाजिक जवाबदेही सुनिश्चित किए जाने को जरूरी बताया गया।
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स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण का विरोध करने के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) परियोजनाओं और निजीकरण का गंभीरता से विश्लेषण किया गया। इसमें राज्य सरकार से निजी अस्पतालों के नियमन के लिए वर्ष 2010 में बने क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2012 के नियमों को सख्ती से लागू किए जाने की मांग उठी। मंच के राष्ट्रीय सह संयोजक डॉ. अभय शुक्ला ने कहा कि यह कानून एक दशक से निजी अस्पतालों की व्यावसायिक लॉबी के दबाव के कारण लागू नहीं हुए। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हुई है। यह नियम लागू होते हैं, तो स्वास्थ्य सेवाओं की फीस नियंत्रित होगी।
पीआईएल के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने हिमाचल को मिलाकर बारह राज्यों में इस कानून सख्ती से लागू करने के आदेश दिए हैं।



जीडीपी का 0.27% है स्वास्थ्य खर्च
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मरीजों के अधिकारों का घोषणापत्र जारी कर मरीजों को 20 अधिकार दिए हैं। अधिवेशन में मरीजों हितों की रक्षा, सुलभ, किफायती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने को आगामी रणनीति, ठोस कार्ययोजना बनाई है। राष्ट्रीय सह संयोजक प्रो. इंद्रनिल मुखौपाध्याय ने कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य बजट 2026-27 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति के वादे को पूरा नहीं किया है। बजट में स्वास्थ्य खर्च केवल जीडीपी का 0.27% है। स्वास्थ्य की हिस्सेदारी भी घटकर 2.07% रह गई है। केंद्र सरकार से स्वास्थ्य को केंद्रीय बजट को दोगुना करने, 5% स्वास्थ्य को आबंटित करने की मांग की। इस मौके पर डाॅ. कुलदीप सिंह तंवर, पद्मश्री डाॅ. अमेश भारती सहित गणमान्य लोगों ने भाग लिया।

सत्यावान पुंडीर राज्य संयोजक नियुक्त
अधिवेशन में नई कमेटी का भी गठन किया गया जिसमें सत्यवान पुंडीर को पुन: राज्य संयोजक चुना गया। इनके अलावा हुक्म शर्मा, जीयानंद शर्मा, चमन ठाकुर, सुमित्रा चंदेल, डॉ. अमित सचदेवा, डॉ. ओपी भूरेटा, डॉ. रवि भूषण और जयंत शर्मा को कोर कमेटी का सदस्य बनाया गया है। अधिवेशन में सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, निजी स्वास्थ्य क्षेत्र के नियमन, मरीजों के अधिकारों की रक्षा, नशे से प्रभावित एवं आदी व्यक्तियों के लिए बड़े अस्पतालों में अलग वार्ड की स्थापना करने, स्वास्थ्य सेवाओं की सामुदायिक निगरानी सुनिश्चित करने जैसे फैसले लिए गए।
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