Shimla: मेयर का कार्यकाल बढ़ाने के खिलाफ दायर याचिका ली वापस, हाईकोर्ट में चल रहा है मामला
हाईकोर्ट में नगर निगम शिमला के मेयर के कार्यकाल को ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका को याचिकाकर्ता ने वापस ले लिया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में नगर निगम शिमला के मेयर के कार्यकाल को ढाई वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका को याचिकाकर्ता ने वापस ले लिया है। याचिकाकर्ता ने यह फैसला सरकार की ओर से म्युनिसिपल कॉरपोरेशन एक्ट में मेयर के कार्यकाल को ढाई वर्ष से 5 वर्ष किए गए संशोधन के बाद लिया है। याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की कि उन्हें इस विषय पर नए सिरे से याचिका को दाखिल करने की अनुमति दी जाए। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से की गई प्रार्थना को स्वीकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। गौरतलब है कि याचिकाकर्ता ने नगर निगम शिमला के मेयर के कार्यकाल को ढाई साल से बढ़ाकर 5 वर्ष किए जाने के निर्णय को चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि नगर निगम शिमला के महापौर का कार्यकाल बढ़ाने को लेकर अध्यादेश लाया गया था जिसकी अवधि पूरी हो चुकी है। इसके अलावा महापौर का कार्यकाल 5 साल हो ऐसा कोई कानून भी नहीं है। लिहाजा मेयर अपने पद पर नहीं बने रह सकते हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि तय रोस्टर के मुताबिक मेयर का पद महिला के लिए आरक्षित था और सरकार का निर्णय उस रोस्टर का उल्लंघन करता है। इस संबंध में बीते साल 25 अक्तूबर को हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक अध्यादेश लाकर नगर निगम शिमला के मेयर का कार्यकाल बढ़ाया था। शिमला नगर निगम महापौर का कार्यकाल ढाई वर्ष से बढ़कर 5 वर्ष कर दिया गया था। बाद में हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने कार्यकाल बढ़ाने को लेकर एक बिल पारित कर राज्यपाल को भेजा, जिस पर राज्यपाल ने 5 मार्च 2026 को सहमति दे दी। अदालत के संज्ञान में यह भी लाया था कि दूसरा संशोधन विधेयक, 2025 वास्तव में 1 नवंबर 2025 से प्रभावी माना जाएगा। यह वही तारीख है जब शुरुआत में इस संबंध में अध्यादेश जारी किया था।
यह है पूरा मामला
नगर निगम शिमला में अभी तक मेयर और डिप्टी मेयर को ढाई ढाई साल के लिए चुना जाता था। कांग्रेस शासित नगर निगम के महापौर सुरेंद्र चौहान और उप महापौर उमा कौशल का ढाई साल का कार्यकाल बीते साल 15 नवंबर को पूरा हो गया था। हालांकि सरकार ने विधेयक लाते हुए यह कार्यकाल ढाई साल से बढ़ाकर पांच साल कर दिया। इस पर शिमला शहर में काफी सियासत भी गरमाई थी। भाजपा के साथ कांग्रेस के अपने पार्षदों ने भी सरकार के इस फैसले पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, अब यह फैसला लागू हो चुका है। महापौर और उप महापौर अब पांच साल तक अपने पद पर बने रहेंगे।