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Himachal: अमेरिका-जर्मनी में बैठे हैंडलर के इशारे पर हुआ थाने में धमाका, कोर्ट ने आरोपियों को भेजा जेल

Sat, 15 Aug 2026 06:45 AM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Sat, 15 Aug 2026 06:45 AM IST
सार

मामले में विशेष अदालत शिमला के विशेष न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी ने मुख्य साजिश से जुड़े तीन आरोपियों को छह दिन की जेल भेजने के आदेश दिए हैं। अदालत के आदेश के अनुसार आरोपी महावीर कुमार उर्फ काका, मनप्रीत सिंह उर्फ मणि और अजय मेहरा को 19 अगस्त जेल में भेजने निर्देश दिए गए हैं। 

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police station blast was orchestrated at the behest of handlers based in the US and Germany; the court has se
अदालत(सांकेतिक)। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के नालागढ़ थाना परिसर में हुए आईईडी ब्लास्ट मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस मामले में विशेष अदालत शिमला के विशेष न्यायाधीश भुवनेश अवस्थी ने मुख्य साजिश से जुड़े तीन आरोपियों को छह दिन की जेल भेजने के आदेश दिए हैं। अदालत के आदेश के अनुसार आरोपी महावीर कुमार उर्फ काका, मनप्रीत सिंह उर्फ मणि और अजय मेहरा को 19 अगस्त जेल में भेजने निर्देश दिए गए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि इस खौफनाक वारदात को विदेश में बैठे आकाओं के निर्देश पर अंजाम दिया गया।

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एनआईए के अनुसार अमेरिका और जर्मनी में छिपे बैठे संदिग्ध हैंडलर सुशांत चोपड़ा और जसप्रीत सिंह उर्फ जस्सी कुलम इस पूरी साजिश के मास्टरमाइंड हैं। इन्हीं के इशारे पर भारत में स्थानीय गुर्गों ने आईईडी को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाया और नालागढ़ थाने में प्लांट किया। जनवरी 2026 की सुबह करीब 9:40 बजे नालागढ़ थाने के अंदर जांच अधिकारियों के कमरे से सटी बाहरी दीवार के पास एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) में जोरदार धमाका हुआ था। इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों को निशाना बनाना, मौत या चोट पहुंचाना और सनसनी फैलाना था। एनआईए ने अदालत को बताया कि इस अंतरराष्ट्रीय और बड़े आपराधिक षड्यंत्र की तह तक जाने, अन्य साथियों और विदेशी हैंडलर्स की पहचान करने तथा सबूत जुटाने के लिए इन आरोपियों से आमने-सामने पूछताछ और हिरासत में रखना जरूरी है।
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अभी मामले की जारी है जांच
एनआईए ने अदालत को बताया कि साजिश की जड़ों तक पहुंचने के लिए आरोपियों से कस्टोडियल पूछताछ अनिवार्य है। इसके माध्यम से कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर धमाके की पूरी कड़ी को जोड़ा जाएगा। बाकी साथियों और साजिशकर्ताओं की पहचान करना भी मुख्य लक्ष्य है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रिमांड की मंजूरी दे दी है।

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