हिमाचल: कांगड़ा-चंबा में 7.0 रिक्टर से अधिक तीव्रता के भूकंप की आशंका, सांसद के सवाल पर मंत्रालय ने दिया जवाब
लोकसभा में सांसद अनुराग ठाकुर के सवाल के जवाब में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) सहित विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के अध्ययन इस क्षेत्र में बड़े भूकंप की संभावना जताते हैं। केंद्र ने कहा कि भूकंप निगरानी तंत्र और आपदा तैयारियों को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
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भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील कांगड़ा-चंबा-धर्मशाला क्षेत्र में 7.0 से अधिक तीव्रता का भूकंप आने की आशंका को लेकर केंद्र सरकार ने वैज्ञानिक अध्ययनों का हवाला दिया है। लोकसभा में सांसद अनुराग ठाकुर के सवाल के जवाब में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) सहित विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों के अध्ययन इस क्षेत्र में बड़े भूकंप की संभावना जताते हैं। केंद्र ने कहा कि भूकंप निगरानी तंत्र और आपदा तैयारियों को लगातार मजबूत किया जा रहा है। सांसद अनुराग ठाकुर ने संसद में कांगड़ा-चंबा-धर्मशाला क्षेत्र की भूकंप सुरक्षा, जनजीवन और आधारभूत ढांचे की सुरक्षा को लेकर उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी थी।
जवाब में मंत्रालय ने बताया कि यह पूरा क्षेत्र देश के सर्वाधिक संवेदनशील सीस्मिक जोन-5 में आता है। इसी कारण यहां भूकंपीय गतिविधियों पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (एनसीएस) के 24×7 निगरानी नेटवर्क के तहत जून 2026 में कांगड़ा-चंबा क्षेत्र में 16 भूकंप दर्ज किए गए। इनमें एक की तीव्रता 5.0 से 5.9 के बीच रही, जबकि अन्य सभी कम तीव्रता के थे। देशभर में 172 भूकंपीय निगरानी केंद्र संचालित हैं, जिनमें हिमाचल के शिमला, धर्मशाला, तिस्सा, सुंदरनगर, कल्पा, भाखड़ा और पोंग बांध में सात केंद्र स्थापित हैं। इनसे प्रदेश में वास्तविक समय में भूकंपीय गतिविधियों की निगरानी की जा रही है।
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) राज्य सरकारों के साथ मिलकर नियमित मॉक ड्रिल, अधिकारियों और प्रथम प्रतिक्रिया दलों का प्रशिक्षण, आपदा प्रबंधन योजनाओं का निर्माण, जनजागरूकता अभियान और क्षमता निर्माण कार्यक्रम चला रहा है। वहीं, भूकंपरोधी निर्माण को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय भवन संहिता, भारतीय मानक ब्यूरो के भूकंप डिजाइन मानकों और मॉडल बिल्डिंग बायलॉज के अनुरूप दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं। इनके पालन की जिम्मेदारी राज्य सरकारों और शहरी निकायों की है, जबकि केंद्र सरकार वित्तीय और तकनीकी सहयोग उपलब्ध करा रही है।