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अनुदान की भरपाई फीस वृद्धि से करना स्वीकार नहीं : सेक्टा
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फीस वृद्धि के फैसले को तुरंत वापस ले विवि
विवि ने पीजी कक्षाओं की फीस 25 फीसदी तक बढ़ा दी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद में हुए फीस वृद्धि के फैसले के खिलाफ छात्र संगठन एसएफआई ने मोर्चा खोल दिया है। छात्र नेताओं ने आरोप लगाते हुए कहा प्रदेश सरकार ने बजट में विवि का अनुदान कम किया है और विवि प्रशासन फीस में वृद्धि कर उसकी भरपाई करना चाहता है। छात्र संगठन ने शनिवार को शिमला में प्रेसवार्ता कर फीस बढ़ाने के फैसले को गलत बताया तथा आंदोलन का एलान कर दिया है।
एसएफआई के राज्य सचिव सनी सेक्टा ने कहा कि ईसी की बैठक में रिसोर्स मोबिलाइजेशन कमेटी के प्रस्ताव पर लिए फीस वृद्धि के फैसले की एसएफआई निंदा करती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने बजट 2026-27 में विवि की ग्रांट 152 करोड़ से घटाकर 142 करोड़ कर दी है। सरकार ने विवि की ग्रांट कम की है और विवि प्रशासन उसकी भरपाई फीस वृद्धि कर छात्रों से करना चाहता है जो कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईसी ने रिसोर्स मोबिलाइजेशन कमेटी की सिफारिशों पर फीस के अलावा परीक्षा शुल्क, बस पास की दरों के साथ छात्रावासों की फीस में एक साथ वृद्धि की है। इस कारण एकसाथ छात्रों पर आर्थिक बोझ कई गुणा बढ़ जाएगा। एसएफआई विवि के इस फैसले का कड़ा विरोध करती है और इसे तुरंत वापस लेने की मांग करती है।
राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने कहा कि विवि ने पीजी कक्षाओं की फीस 25 फीसदी, परीक्षा शुल्क में 50 फीसदी, छात्रावासों की फीस में 10 से 15 फीसदी, पीएचडी स्कॉलर की थीसिस जमा और उसके मूल्यांकन की फीस में 50 प्रतिशत समेत बस पास की फीस में 300 से 400 फीसदी तक बढ़ोतरी की है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि विवि प्रशासन ने प्रदेश सरकार द्वारा बजट में कम की गई विवि ग्रांट की भरपाई करने के लिए छात्रों पर आर्थिक बोझ डाला है। उन्होंने कहा एसएफआई इस फैसले का पुरजोर विरोध करती है।
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विवि ने पीजी कक्षाओं की फीस 25 फीसदी तक बढ़ा दी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद में हुए फीस वृद्धि के फैसले के खिलाफ छात्र संगठन एसएफआई ने मोर्चा खोल दिया है। छात्र नेताओं ने आरोप लगाते हुए कहा प्रदेश सरकार ने बजट में विवि का अनुदान कम किया है और विवि प्रशासन फीस में वृद्धि कर उसकी भरपाई करना चाहता है। छात्र संगठन ने शनिवार को शिमला में प्रेसवार्ता कर फीस बढ़ाने के फैसले को गलत बताया तथा आंदोलन का एलान कर दिया है।
एसएफआई के राज्य सचिव सनी सेक्टा ने कहा कि ईसी की बैठक में रिसोर्स मोबिलाइजेशन कमेटी के प्रस्ताव पर लिए फीस वृद्धि के फैसले की एसएफआई निंदा करती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने बजट 2026-27 में विवि की ग्रांट 152 करोड़ से घटाकर 142 करोड़ कर दी है। सरकार ने विवि की ग्रांट कम की है और विवि प्रशासन उसकी भरपाई फीस वृद्धि कर छात्रों से करना चाहता है जो कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईसी ने रिसोर्स मोबिलाइजेशन कमेटी की सिफारिशों पर फीस के अलावा परीक्षा शुल्क, बस पास की दरों के साथ छात्रावासों की फीस में एक साथ वृद्धि की है। इस कारण एकसाथ छात्रों पर आर्थिक बोझ कई गुणा बढ़ जाएगा। एसएफआई विवि के इस फैसले का कड़ा विरोध करती है और इसे तुरंत वापस लेने की मांग करती है।
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राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर ने कहा कि विवि ने पीजी कक्षाओं की फीस 25 फीसदी, परीक्षा शुल्क में 50 फीसदी, छात्रावासों की फीस में 10 से 15 फीसदी, पीएचडी स्कॉलर की थीसिस जमा और उसके मूल्यांकन की फीस में 50 प्रतिशत समेत बस पास की फीस में 300 से 400 फीसदी तक बढ़ोतरी की है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि विवि प्रशासन ने प्रदेश सरकार द्वारा बजट में कम की गई विवि ग्रांट की भरपाई करने के लिए छात्रों पर आर्थिक बोझ डाला है। उन्होंने कहा एसएफआई इस फैसले का पुरजोर विरोध करती है।