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Shimla News: इवनिंग कॉलेज भवन का जीर्णोद्धार शुरू, पुरानी शान रहेगी बरकरार
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छत बदलने से लेकर संरचनात्मक सुधार तक का काम जारी, छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत, हेरिटेज लुक से नहीं होगा समझौता
36.62 लाख रुपये से सीपीडब्ल्यूडी कर रहा काम
हर्षित शर्मा
शिमला। राजधानी के मालरोड स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के इवनिंग कॉलेज भवन का मरम्मत कार्य शुरू हो गया है। लंबे समय से जर्जर हालत और रिसाव की समस्या झेल रहे इस भवन को 36.62 लाख रुपये की लागत से केंद्रीय लोक निर्माण विभाग दुरुस्त कर रहा है।
मरम्मत के दौरान भवन के पुराने क्लासिक और औपनिवेशिक स्वरूप को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। यानी बाहर से यह भवन पहले जैसा ही नजर आएगा लेकिन अंदर से सुविधाएं बेहतर होंगी। नवंबर तक निर्माण कार्य पूरा करने की डेड लाइन रखी है। सबसे बड़ा काम भवन की पुरानी छत को बदलने का है जो बारिश और बर्फबारी के दौरान छात्रों के लिए परेशानी का कारण बनती रही है। कई कक्षाओं में पानी टपकने और ठंड बढ़ने की शिकायतें सामने आती थी जिससे पढ़ाई प्रभावित होती थी। अब नई छत और बाहरी मरम्मत के साथ इन समस्याओं को दूर करने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ बाहरी दीवारों की फिनिशिंग और संरचनात्मक मजबूती का काम भी चल रहा है। विश्वविद्यालय स्तर पर करीब 1.78 लाख रुपये के अंदरूनी सुधार जैसे स्टील वर्क, अल्मारियां और रसोई उन्नयन भी समानांतर रूप से किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कार्य को चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है कि शाम की कक्षाएं प्रभावित न हों। छात्रों के लिए यह राहत की बात है कि लंबे समय से चली आ रही बुनियादी समस्याओं का समाधान अब जमीन पर दिखने लगा है।
अपनी तरह का एकमात्र शैक्षणिक संस्थान
मालरोड स्थित इवनिंग कॉलेज का यह भवन शिमला के औपनिवेशिक इतिहास से जुड़ा हुआ है। ब्रिटिश काल में इस इमारत का उपयोग प्रशासनिक और आवासीय उद्देश्यों के लिए किया जाता था और यह उस दौर की विशिष्ट यूरोपीय स्थापत्य शैली ढलानदार छत, लकड़ी के ढांचे और पत्थर की दीवारों का उदाहरण है। आजादी के बाद इस भवन का उपयोग सरकारी और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए होने लगा। हिमाचल प्रदेश में अपनी तरह का पहला और एकमात्र शैक्षणिक संस्थान संध्या अध्ययन विभाग की स्थापना का प्रस्ताव 1961 में कोठारी समिति के निर्देशों के अनुसार किया था और जुलाई 1962 में पंजाब विश्वविद्यालय संध्या महाविद्यालय के रूप में इसकी स्थापना हुई थी। 1971 में हिमाचल प्रदेश के गठन के बाद वर्ष 1975 में इसे आधिकारिक रूप से इवनिंग कॉलेज (डिपार्टमेंट ऑफ इवनिंग स्टडीज) के रूप में शुरू किया गया।
शहर के अन्य हेरिटेज भवनों पर ध्यान
शिमला में हेरिटेज भवनों के संरक्षण को लेकर केंद्रीय लोक निर्माण विभाग बड़े स्तर पर काम कर रहा है और इस पर लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। मालरोड स्थित डाकघर के 141 साल पुराने भवन के जीर्णोद्धार पर करीब 14 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। वहीं चैडविक हाउस के नवीनीकरण पर लगभग 7 करोड़ की परियोजना लागू है। एजी ऑफिस में करीब 25 लाख की लागत से मरम्मत और आधुनिक सुरक्षा कार्य चल रहे हैं। इसके अलावा एडवांस स्टडी में भी भवन संरक्षण और संरचनात्मक मजबूती के लिए दर्जनों करोड़ रुपये के कार्य विभिन्न चरणों में जारी हैं। सीपीडब्ल्यूडी कोनी कॉटेज और अन्य पुराने सरकारी भवनों में भी चरणबद्ध मरम्मत कार्य किए जा रहे हैं।
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36.62 लाख रुपये से सीपीडब्ल्यूडी कर रहा काम
हर्षित शर्मा
शिमला। राजधानी के मालरोड स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला के इवनिंग कॉलेज भवन का मरम्मत कार्य शुरू हो गया है। लंबे समय से जर्जर हालत और रिसाव की समस्या झेल रहे इस भवन को 36.62 लाख रुपये की लागत से केंद्रीय लोक निर्माण विभाग दुरुस्त कर रहा है।
मरम्मत के दौरान भवन के पुराने क्लासिक और औपनिवेशिक स्वरूप को पूरी तरह सुरक्षित रखा जाएगा। यानी बाहर से यह भवन पहले जैसा ही नजर आएगा लेकिन अंदर से सुविधाएं बेहतर होंगी। नवंबर तक निर्माण कार्य पूरा करने की डेड लाइन रखी है। सबसे बड़ा काम भवन की पुरानी छत को बदलने का है जो बारिश और बर्फबारी के दौरान छात्रों के लिए परेशानी का कारण बनती रही है। कई कक्षाओं में पानी टपकने और ठंड बढ़ने की शिकायतें सामने आती थी जिससे पढ़ाई प्रभावित होती थी। अब नई छत और बाहरी मरम्मत के साथ इन समस्याओं को दूर करने की कोशिश की जा रही है। इसके साथ बाहरी दीवारों की फिनिशिंग और संरचनात्मक मजबूती का काम भी चल रहा है। विश्वविद्यालय स्तर पर करीब 1.78 लाख रुपये के अंदरूनी सुधार जैसे स्टील वर्क, अल्मारियां और रसोई उन्नयन भी समानांतर रूप से किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कार्य को चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है कि शाम की कक्षाएं प्रभावित न हों। छात्रों के लिए यह राहत की बात है कि लंबे समय से चली आ रही बुनियादी समस्याओं का समाधान अब जमीन पर दिखने लगा है।
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अपनी तरह का एकमात्र शैक्षणिक संस्थान
मालरोड स्थित इवनिंग कॉलेज का यह भवन शिमला के औपनिवेशिक इतिहास से जुड़ा हुआ है। ब्रिटिश काल में इस इमारत का उपयोग प्रशासनिक और आवासीय उद्देश्यों के लिए किया जाता था और यह उस दौर की विशिष्ट यूरोपीय स्थापत्य शैली ढलानदार छत, लकड़ी के ढांचे और पत्थर की दीवारों का उदाहरण है। आजादी के बाद इस भवन का उपयोग सरकारी और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए होने लगा। हिमाचल प्रदेश में अपनी तरह का पहला और एकमात्र शैक्षणिक संस्थान संध्या अध्ययन विभाग की स्थापना का प्रस्ताव 1961 में कोठारी समिति के निर्देशों के अनुसार किया था और जुलाई 1962 में पंजाब विश्वविद्यालय संध्या महाविद्यालय के रूप में इसकी स्थापना हुई थी। 1971 में हिमाचल प्रदेश के गठन के बाद वर्ष 1975 में इसे आधिकारिक रूप से इवनिंग कॉलेज (डिपार्टमेंट ऑफ इवनिंग स्टडीज) के रूप में शुरू किया गया।
शहर के अन्य हेरिटेज भवनों पर ध्यान
शिमला में हेरिटेज भवनों के संरक्षण को लेकर केंद्रीय लोक निर्माण विभाग बड़े स्तर पर काम कर रहा है और इस पर लाखों से लेकर करोड़ों रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं। मालरोड स्थित डाकघर के 141 साल पुराने भवन के जीर्णोद्धार पर करीब 14 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। वहीं चैडविक हाउस के नवीनीकरण पर लगभग 7 करोड़ की परियोजना लागू है। एजी ऑफिस में करीब 25 लाख की लागत से मरम्मत और आधुनिक सुरक्षा कार्य चल रहे हैं। इसके अलावा एडवांस स्टडी में भी भवन संरक्षण और संरचनात्मक मजबूती के लिए दर्जनों करोड़ रुपये के कार्य विभिन्न चरणों में जारी हैं। सीपीडब्ल्यूडी कोनी कॉटेज और अन्य पुराने सरकारी भवनों में भी चरणबद्ध मरम्मत कार्य किए जा रहे हैं।