हिमाचल: सबसे पहले सेवारत, सेवानिवृत्त कर्मियों के घरों में स्मार्ट मीटर लगाएगा राज्य बिजली बोर्ड
बोर्ड ने निर्णय लिया है कि स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत पहले अपने ही सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के घरों से की जाएगी, ताकि लोगों में इस परियोजना के प्रति भरोसा पैदा किया जा सके।
विस्तार
स्मार्ट बिजली मीटरों को लेकर कांगड़ा जिले में बढ़ते विरोध के बीच राज्य बिजली बोर्ड प्रबंधन ने नई रणनीति अपनाई है। बोर्ड ने निर्णय लिया है कि स्मार्ट मीटर लगाने की शुरुआत पहले अपने ही सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के घरों से की जाएगी, ताकि लोगों में इस परियोजना के प्रति भरोसा पैदा किया जा सके और विरोध को शांत किया जा सके। कांगड़ा जोन के मुख्य अभियंता (ऑपरेशन) कार्यालय की ओर से सभी सहायक अभियंताओं को जारी निर्देशों में कहा गया है कि अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की सूची तैयार कर एक सप्ताह के भीतर कार्यालय को भेजी जाए।
बोर्ड ने सहायक अभियंताओं को दिए ये निर्देश
इसके बाद कर्मचारियों के घरों में स्मार्ट मीटर लगाने या पुराने मीटर बदलने का कार्य प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा। बोर्ड ने स्मार्ट मीटर प्रतिस्थापन की जिम्मेदारी सीधे फील्ड अधिकारियों को सौंपी है। सहायक अभियंताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस पूरी प्रक्रिया की व्यक्तिगत निगरानी करें और प्रगति रिपोर्ट नियमित रूप से कार्यालय को भेजें। निर्देशों के अनुसार यदि किसी कर्मचारी या सेवानिवृत्त कर्मचारी के घर का बिजली कनेक्शन उसके नाम पर नहीं है, लेकिन आवास उसके कब्जे में है, तो वहां भी प्राथमिकता के आधार पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे।
कांगड़ा जिले में सबसे ज्यादा विरोध
कांगड़ा के कई क्षेत्रों में लोग स्मार्ट बिजली मीटर लगाने का विरोध कर रहे हैं। कई स्थानों पर रोजाना प्रदर्शन हो रहे हैं और उपभोक्ता पुराने मीटर हटाने का विरोध कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगने से बिजली बिल बढ़ सकते हैं और तकनीकी खराबी की स्थिति में परेशानी हो सकती है। ऐसे हालात में बिजली बोर्ड ने पहले अपने कर्मचारियों के घरों में स्मार्ट मीटर लगाने का फैसला किया है, ताकि आम उपभोक्ताओं के बीच यह संदेश जाए कि नई प्रणाली सुरक्षित और भरोसेमंद है।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों से भी जागरूक करने की अपील
बोर्ड के आदेश में कहा गया है कि स्मार्ट मीटरिंग परियोजना का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, बिलिंग प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाना और उपभोक्ता सेवाओं में सुधार करना है। स्मार्ट मीटर परियोजना का किसी भी प्रकार से निजीकरण से कोई संबंध नहीं है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों से भी अपील की गई है कि वे स्मार्ट मीटर परियोजना के बारे में लोगों को जागरूक करने में सहयोग करें।