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Shimla News: भट्ठाकुफर फल मंडी में स्टोन फ्रूट कारोबार 57.65% घटा, चेरी की आवक में 91% गिरावट
अनिल पंवार, शिमला।
Published by: शिमला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2026 11:22 AM IST
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सार
भट्ठाकुफर फल मंडी में स्टोन फ्रूट की आवक में 57.65 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। चेरी की आवक 91 फीसदी घटी, जिससे हिमाचल के बागवानों को बड़ा नुकसान हुआ है।
भट्ठाकुफर फल मंडी में पहुंची स्टोन फ्रूट की खेप।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
जिला शिमला में इस साल स्टोन फ्रूट के सीजन पर मौसम की भयंकर मार पड़ी है। कम बर्फबारी होने, मार्च व अप्रैल में ओलावृष्टि होने से स्टोन फ्रूट की पैदावार घटी है। एपीएमसी शिमला-किन्नौर की सबसे बड़ी फल मंडी भट्ठाकुफर में 18 जून तक स्टोन फ्रूट की कुल आवक पिछले साल के मुकाबले आधे से भी कम रह गई है। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि सबसे अच्छा दाम देने वाला स्टोन फ्रूट चेरी का बीते साल के मुकाबले सिर्फ 10 फीसदी ही कारोबार हुआ है।
एपीएमसी के आंकड़ों के अनुसार फल मंडी भट्ठाकुफर में स्टोन फ्रूट की गत वर्ष 18 जून 2025 तक 8,13,033 पेटियों की आवक दर्ज की गई थी। वहीं इसकी तुलना में इस बार 18 जून तक मंडी में सिर्फ 3,44,357 पेटियां ही पहुंची हैं जो बीते वर्ष के मुकाबले 4,68,676 पेटियां कम हैं। इसी तरह भट्ठाकुफर फल मंडी में स्टोन फ्रूट के कुल कारोबार में 57.65 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
बागवानों को सबसे अच्छे दाम देने वाले चेरी पर मौसम की सबसे ज्यादा मार पड़ी है। पिछले वर्ष 18 जून तक मंडी में चेरी की 3,30,307 पेटियों के मुकाबले इस बार केवल 29,823 पेटियां ही मंडी पहुंचीं। चेरी की आवक में 3,00,484 पेटियों की कमी आई है। इस तरह चेरी के उत्पादन में 90.98 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा शकरपारा की आवक में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। मंडी में पिछले साल जून तक मंडी में 36,021 पेटियों के मुकाबले इस बार केवल 626 पेटियां मंडी में पहुंची हैं, जिससे 98.26 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
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इसके अलावा प्लम की आवक 3,62,290 से घटकर 2,74,893 पेटियां हुई है। प्लम में भी 24.12 फीसदी गिरावट है। वहीं आड़ू की आवक में 52.77 फीसदी, खुबानी में 35.88 फीसदी, नेक्ट्रीन में 63.86 फीसदी तथा बादाम में 78.59 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। अधिकारियों के अनुसार इसमें आड़ू की पैकिंग 10 किलो, बादाम की 4 किलोग्राम के बॉक्स में आती है। इसके अलावा अन्य स्टोन फ्रूट की पैकेजिंग एक से लेकर पांच किलोग्राम तक आती है। कारोबारियों का कहना है मौसम की मार का सीधा असर स्टोन फ्रूट पर देखने को पड़ रहा है। उत्पादन में कमी का सीधा असर मंडी में कारोबार पर देखने को मिल रहा है।
एपीएमसी के आंकड़ों के अनुसार फल मंडी भट्ठाकुफर में स्टोन फ्रूट की गत वर्ष 18 जून 2025 तक 8,13,033 पेटियों की आवक दर्ज की गई थी। वहीं इसकी तुलना में इस बार 18 जून तक मंडी में सिर्फ 3,44,357 पेटियां ही पहुंची हैं जो बीते वर्ष के मुकाबले 4,68,676 पेटियां कम हैं। इसी तरह भट्ठाकुफर फल मंडी में स्टोन फ्रूट के कुल कारोबार में 57.65 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है।
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बागवानों को सबसे अच्छे दाम देने वाले चेरी पर मौसम की सबसे ज्यादा मार पड़ी है। पिछले वर्ष 18 जून तक मंडी में चेरी की 3,30,307 पेटियों के मुकाबले इस बार केवल 29,823 पेटियां ही मंडी पहुंचीं। चेरी की आवक में 3,00,484 पेटियों की कमी आई है। इस तरह चेरी के उत्पादन में 90.98 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा शकरपारा की आवक में भी भारी गिरावट दर्ज की गई है। मंडी में पिछले साल जून तक मंडी में 36,021 पेटियों के मुकाबले इस बार केवल 626 पेटियां मंडी में पहुंची हैं, जिससे 98.26 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
इसके अलावा प्लम की आवक 3,62,290 से घटकर 2,74,893 पेटियां हुई है। प्लम में भी 24.12 फीसदी गिरावट है। वहीं आड़ू की आवक में 52.77 फीसदी, खुबानी में 35.88 फीसदी, नेक्ट्रीन में 63.86 फीसदी तथा बादाम में 78.59 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। अधिकारियों के अनुसार इसमें आड़ू की पैकिंग 10 किलो, बादाम की 4 किलोग्राम के बॉक्स में आती है। इसके अलावा अन्य स्टोन फ्रूट की पैकेजिंग एक से लेकर पांच किलोग्राम तक आती है। कारोबारियों का कहना है मौसम की मार का सीधा असर स्टोन फ्रूट पर देखने को पड़ रहा है। उत्पादन में कमी का सीधा असर मंडी में कारोबार पर देखने को मिल रहा है।
किस फल की कितनी आवक
| फल का नाम | 2025 | 2026 |
|---|---|---|
| चेरी | 3,30,307 | 29,823 |
| प्लम | 3,62,290 | 2,74,893 |
| आड़ू | 11,948 | 5,643 |
| नेक्ट्रीन | 10,876 | 3,931 |
| शकरपारा | 36,021 | 626 |
| बादाम | 23,534 | 5,039 |
स्टोन फ्रूट पर मौसम की मार का भारी असर पड़ा है। भट्ठाकुफर फल मंडी में बीते वर्ष के मुकाबले इस बार काफी कम कारोबार रह गया है। बागवानों का कहना है कि मौसम की वजह से फसल की पैदावार काफी कम हुई है। यही वजह है कि मंडी में इस बार काफी कम आवक हुई है। -देवानंद वर्मा, एपीएमसी चेयरमैन शिमला