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Shimla News: एग्रीमेंट के बावजूद रजिस्ट्री न करने वाले विक्रेता पर शिकंजा
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जमीन से जुड़े मामले में रजिस्ट्री करने का आदेश
सिविल जज सिमरन की अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अदालत ने संपत्ति से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एग्रीमेंट टू सेल के मुताबिक रजिस्ट्री न करने वाले विक्रेता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
सिविल जज कोर्ट नंबर-8 शिमला सिमरन की अदालत ने कृष्ण कुमार द्वारा दायर वाद को स्वीकार करते हुए भूमि के विशिष्ट निष्पादन का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि विक्रेता निर्धारित समय में रजिस्ट्री नहीं कराता है तो अदालत की प्रक्रिया के माध्यम से रजिस्ट्री पूरी करवाई जाएगी। शिमला निवासी वादी कृष्ण कुमार ने अदालत में मुकदमा दायर किया था कि उसने शिमला निवासी संत राम के साथ 3 मार्च 2022 को दो बिस्वा भूमि खरीदने के लिए चार लाख रुपये में अनुबंध किया था। अनुबंध के समय तीन लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका था जबकि शेष एक लाख रुपये सेल डीड (रजिस्ट्री) के समय दिए जाने थे। अनुबंध के अनुसार एक मार्च 2023 तक रजिस्ट्री कराई जानी थी लेकिन विक्रेता संत राम लगातार टालमटोल करता रहा। इसके बाद वादी ने कानूनी सूचना भी भेजा, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उसने अदालत की शरण ली।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वादी को फैसले की तारीख से एक महीने के भीतर एक लाख रुपये की शेष राशि अदालत में जमा करानी होगी। राशि जमा होने के बाद विक्रेता को दो महीने के भीतर अपने खर्चे पर वादी के पक्ष में भूमि की सेल डीड निष्पादित कर उसका पंजीकरण करवाना होगा। यदि विक्रेता ऐसा करने में असफल रहता है या रजिस्ट्री करने से इन्कार करता है तो वादी को सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत अदालत के माध्यम से रजिस्ट्री करवाने का अधिकार होगा।
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सिविल जज सिमरन की अदालत ने सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अदालत ने संपत्ति से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए एग्रीमेंट टू सेल के मुताबिक रजिस्ट्री न करने वाले विक्रेता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
सिविल जज कोर्ट नंबर-8 शिमला सिमरन की अदालत ने कृष्ण कुमार द्वारा दायर वाद को स्वीकार करते हुए भूमि के विशिष्ट निष्पादन का आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि विक्रेता निर्धारित समय में रजिस्ट्री नहीं कराता है तो अदालत की प्रक्रिया के माध्यम से रजिस्ट्री पूरी करवाई जाएगी। शिमला निवासी वादी कृष्ण कुमार ने अदालत में मुकदमा दायर किया था कि उसने शिमला निवासी संत राम के साथ 3 मार्च 2022 को दो बिस्वा भूमि खरीदने के लिए चार लाख रुपये में अनुबंध किया था। अनुबंध के समय तीन लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका था जबकि शेष एक लाख रुपये सेल डीड (रजिस्ट्री) के समय दिए जाने थे। अनुबंध के अनुसार एक मार्च 2023 तक रजिस्ट्री कराई जानी थी लेकिन विक्रेता संत राम लगातार टालमटोल करता रहा। इसके बाद वादी ने कानूनी सूचना भी भेजा, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उसने अदालत की शरण ली।
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अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि वादी को फैसले की तारीख से एक महीने के भीतर एक लाख रुपये की शेष राशि अदालत में जमा करानी होगी। राशि जमा होने के बाद विक्रेता को दो महीने के भीतर अपने खर्चे पर वादी के पक्ष में भूमि की सेल डीड निष्पादित कर उसका पंजीकरण करवाना होगा। यदि विक्रेता ऐसा करने में असफल रहता है या रजिस्ट्री करने से इन्कार करता है तो वादी को सिविल प्रक्रिया संहिता के तहत अदालत के माध्यम से रजिस्ट्री करवाने का अधिकार होगा।
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