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Shimla News: चेक बाउंस में दोषी को पांच माह के लिए जाना होगा जेल
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निचली अदालत का फैसला रखा बरकरार
दोषी को तीन लाख रुपये का जुर्माना भी करना होगा अदा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (सीबीआई कोर्ट) शिमला डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में निचली अदालत की सुनाई सजा और जुर्माने के फैसले को बरकरार रखा है। चौपाल निवासी बागवान वीरेंद्र सिंह ठाकुर ने वर्ष 2021 में चौपाल की निचली अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। वर्ष 2018 के सेब सीजन के दौरान शिकायतकर्ता ने अपनी सेब की फसल सोलन की वर्मा फ्रूट कंपनी के आढ़ती रमेश वर्मा को बेची थी। कमीशन और अन्य खर्चे काटने के बाद 2,07,500 रुपये की राशि देय थी। लंबे समय तक भुगतान न करने पर सितंबर 2020 में आरोपी ने देय राशि के एवज में एक पोस्ट-डेटेड चेक जारी किया था। इस चेक को बैंक में प्रस्तुत किया तो यह बाउंस हो गया। चौपाल के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने 8 जुलाई 2025 को आरोपी रमेश वर्मा को दोषी करार दिया और 30 अगस्त 2025 को उसे पांच महीने के साधारण कारावास और 3 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले को दोषी ने सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। अदालत ने अपील खारिज करते हुए दोषी को 30 दिन के भीतर निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। संवाद
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दोषी को तीन लाख रुपये का जुर्माना भी करना होगा अदा
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (सीबीआई कोर्ट) शिमला डॉ. परविंदर सिंह अरोड़ा की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में निचली अदालत की सुनाई सजा और जुर्माने के फैसले को बरकरार रखा है। चौपाल निवासी बागवान वीरेंद्र सिंह ठाकुर ने वर्ष 2021 में चौपाल की निचली अदालत में शिकायत दर्ज कराई थी। वर्ष 2018 के सेब सीजन के दौरान शिकायतकर्ता ने अपनी सेब की फसल सोलन की वर्मा फ्रूट कंपनी के आढ़ती रमेश वर्मा को बेची थी। कमीशन और अन्य खर्चे काटने के बाद 2,07,500 रुपये की राशि देय थी। लंबे समय तक भुगतान न करने पर सितंबर 2020 में आरोपी ने देय राशि के एवज में एक पोस्ट-डेटेड चेक जारी किया था। इस चेक को बैंक में प्रस्तुत किया तो यह बाउंस हो गया। चौपाल के न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की अदालत ने 8 जुलाई 2025 को आरोपी रमेश वर्मा को दोषी करार दिया और 30 अगस्त 2025 को उसे पांच महीने के साधारण कारावास और 3 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। इस फैसले को दोषी ने सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। अदालत ने अपील खारिज करते हुए दोषी को 30 दिन के भीतर निचली अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया है। संवाद