Himachal: वल्लभ कॉलेज मंडी में चल रहे बीएड कोर्स की मान्यता रद्द, हाईकोर्ट में याचिका खारिज
वल्लभ कॉलेज मंडी में हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन सोसायटी की ओर से चलाए जा रहे बीएड कोर्स की मान्यता को रद्द करने के आदेश के खिलाफ नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनटीसीई) के विरुद्ध दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने वल्लभ कॉलेज मंडी में हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन सोसायटी की ओर से चलाए जा रहे बीएड कोर्स की मान्यता को रद्द करने के आदेश के खिलाफ नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनटीसीई) के विरुद्ध दायर रिट याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में नए घटनाक्रमों को देखते हुए संस्थान अब एनसीटीई के नए आदेश के खिलाफ कानूनी रास्ता अपना सकता है। दरअसल संस्थान की बीएड प्रोग्राम (100 सीटें) की मान्यता को एनसीटीई की ओर से 31 जुलाई 2024 को रद्द कर दिया गया था। इसके साथ ही शैक्षणिक सत्र 2024-25 के लिए नए प्रवेश पर भी रोक लगा दी गई थी। इस आदेश के खिलाफ संस्थान ने अपील की थी, जिसके बाद मामले को पुनर्विचार के लिए उत्तरी क्षेत्रीय समिति (एनआरसी) के पास वापस भेज दिया गया था।
सुनवाई के दौरान अदालत को सूचित किया गया कि एनसीटीई की क्षेत्रीय समिति ने 2 फरवरी 2026 को एक नया आदेश पारित किया है, जिसमें विभिन्न आधारों पर संस्थान की बीएड मान्यता को पुनः वापस ले लिया गया है। न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने कहा कि चूंकि अब नया आदेश आ चुका है। इसलिए पुरानी याचिका पर सुनवाई का आधार नहीं बचता। याचिकाकर्ता के पास नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन एक्ट, 1993 की धारा 18 के तहत नए आदेश के खिलाफ अपील करने का वैधानिक विकल्प मौजूद है। संस्थान सभी शिकायतों के लिए कानून के अनुसार उचित प्राधिकारी के पास जाने के लिए स्वतंत्र है।
गौरतलब है कि याचिका लंबित रहने के दौरान हाईकोर्ट ने 2 सितंबर 2025 को संस्थान को काउंसलिंग में भाग लेने की जो अंतरिम अनुमति दी थी, वह अब इस फैसले के साथ ही समाप्त हो गई है। हाईकोर्ट ने छात्रों को इस कॉलेज में अस्थायी प्रवेश देने की अनुमति तो दे दी थी, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी गई थी कि प्रवेश पूरी तरह अपने जोखिम और न्यायालय के अंतरिम आदेश पर आधारित है। अंतिम निर्णय कोर्ट व एनसीटीई की रीजनल कमेटी के आदेश के बाद ही मान्य होना था। बीते वर्ष इस कोर्स की मान्यता संचालन में गंभीर खामियां पाए जाने के बाद रद्द कर दी गई थी। इस घटनाक्रम ने सैकड़ों छात्र-छात्राओं के भविष्य को अनिश्चितता के भंवर में डाल दिया है।
कोर्ट के आदेशों पर 6 शिक्षकों के तबादले, एक का मामला खारिज
प्रदेश शिक्षा विभाग ने हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद विभिन्न मामलों में छह शिक्षकों के तबादले और एक मामले में तबादला अनुरोध खारिज करने के आदेश जारी किए हैं। शिक्षा निदेशालय ने सभी मामलों में संबंधित शिक्षकों को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने के बाद निर्णय लिया। अधिकांश तबादले रिक्त पदों के आधार पर किए गए हैं और इनमें टीटीए, ज्वाइनिंग टाइम का लाभ नहीं दिया जाएगा। निदेशालय के आदेशों के अनुसार कई शिक्षकों ने स्थानांतरण के लिए हाईकोर्ट में याचिकाएं दायर की थीं। अदालत के निर्देश पर विभाग ने याचिकाओं पर विचार करते हुए अंतिम निर्णय जारी किए हैं। आदेशानुसार टीजीटी (नॉन मेडिकल) सीमा राणा को सोलन जिले के राजड़ी जाबली अधीन जीएचएस दत्यार से मंडी जिले के जीएमएसएसएस द्रंग स्थानांतरित किया गया है। संबंधित पद वहां रिक्त था। शिक्षक के अनुरोध पर तबादला किया गया। टीजीटी (मेडिकल) सीमा को हमीरपुर में जीएचएस जानसूह में रिक्त पद के आधार पर समायोजित किया गया है।
इससे पहले उन्हें निरीक्षण कैडर में प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया था। टीजीटी (मेडिकल) सुनील कुमार को लाहौल-स्पीति के जनजातीय क्षेत्र त्रिलोकनाथ से मंडी जिले के जीएसएसएस बडोग स्थानांतरित किया गया है। वर्तमान पद पर नियुक्त की 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्ति से खाली होने वाले पद पर उन्हें तैनाती दी गई है। टीजीटी (नॉन मेडिकल) राजेश कुमार को जीएसएसएस घैण मंडी से जीएमएस कफानगूंन (जीएसएसएस कटौला) में रिक्त पद पर भेजा गया है। उन्होंने तीन वर्ष का सामान्य कार्यकाल पूरा कर लिया था और पारिवारिक आधार पर तबादले का अनुरोध किया था। टीजीटी (मेडिकल) पूजा शर्मा को कुल्लू जिले के जीएसएसएस कोठी से मंडी जिले के जीएसएसएस टांडू स्थानांतरित किया गया है। संबंधित पद 31 मार्च 2026 को सेवानिवृत्ति के कारण खाली होगा। टीजीटी (मेडिकल) पूजा डोगरा के मामले में विभाग ने तबादला अनुरोध खारिज कर दिया है। शिक्षिका ने मंडी जिले से कांगड़ा में समायोजन की मांग की थी, लेकिन विभाग ने कहा कि उन्होंने वर्तमान स्थान पर सामान्य कार्यकाल पूरा नहीं किया है और स्थानांतरण किसी विशेष स्थान पर अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता। सभी मामलों में हाईकोर्ट ने विभाग को याचिकाओं पर विचार कर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।