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Shimla News: महिलाएं ऊन के धागों से बुन रहीं भाई-बहन का प्यार
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धामी की महिलाएं और युवतियां कर रहीं खरीदारी, हाथों से बनी राखियों की बाजार में भी है खूब मांग
सजावटी मोती और स्टोन का भी किया है इस्तेमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। धामी क्षेत्र की ग्रामीण महिलाएं ऊन के रंग-बिरंगे धागों से भाई-बहन के प्यार की डोर बुन रही हैं। इन महिलाओं ने रक्षाबंधन के त्योहार के लिए हाथों से राखियां तैयार की हैं।
राखियां बनाने के लिए ऊन के साथ सजावटी मोती और स्टोन का भी इस्तेमाल किया गया है। स्थानीय महिलाएं और युवतियां इन राखियों को खूब पसंद कर रही हैं और इनकी मांग भी बनी हुई है। राखियों को इविल आई, सूरजमुखी और अन्य फूलों के आकर्षक डिजाइनों में तैयार किया है। प्रशिक्षक चंपा देवी ने बताया कि महिलाएं इन उत्पादों को बनाने में पूरी रुचि ले रही हैं। स्थानीय महिलाएं और युवतियां हाथों से बनी राखियों की खरीदारी कर रही हैं। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास के साथ आय का अवसर भी प्रदान कर रही है। राखियों के अलावा महिलाएं सजावटी वॉल हैंगिंग, टेबल कवर, फ्लावर पॉट और फ्रिज कवर जैसे अन्य उत्पाद भी बना रही हैं। इन उत्पादों को भी विभिन्न आकर्षक डिजाइनों में तैयार किया जा रहा है। यह कार्य स्थानीय हस्तकला को बढ़ावा देने में सहायक साबित हो रहा है। चंपा देवी ने बताया कि केंद्र में 20 महिलाएं हाथों से राखियां तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग है और ग्राहक इन्हें पसंद कर रहे हैं। अब तक 50 से 60 राखियों की बिक्री हो चुकी है, जो इस पहल की शुरुआती सफलता को दर्शाती है। राखियों की कीमत 20 रुपये से शुरू होती है, जिससे यह ग्राहकों के लिए किफायती हैं।
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सजावटी मोती और स्टोन का भी किया है इस्तेमाल
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। धामी क्षेत्र की ग्रामीण महिलाएं ऊन के रंग-बिरंगे धागों से भाई-बहन के प्यार की डोर बुन रही हैं। इन महिलाओं ने रक्षाबंधन के त्योहार के लिए हाथों से राखियां तैयार की हैं।
राखियां बनाने के लिए ऊन के साथ सजावटी मोती और स्टोन का भी इस्तेमाल किया गया है। स्थानीय महिलाएं और युवतियां इन राखियों को खूब पसंद कर रही हैं और इनकी मांग भी बनी हुई है। राखियों को इविल आई, सूरजमुखी और अन्य फूलों के आकर्षक डिजाइनों में तैयार किया है। प्रशिक्षक चंपा देवी ने बताया कि महिलाएं इन उत्पादों को बनाने में पूरी रुचि ले रही हैं। स्थानीय महिलाएं और युवतियां हाथों से बनी राखियों की खरीदारी कर रही हैं। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास के साथ आय का अवसर भी प्रदान कर रही है। राखियों के अलावा महिलाएं सजावटी वॉल हैंगिंग, टेबल कवर, फ्लावर पॉट और फ्रिज कवर जैसे अन्य उत्पाद भी बना रही हैं। इन उत्पादों को भी विभिन्न आकर्षक डिजाइनों में तैयार किया जा रहा है। यह कार्य स्थानीय हस्तकला को बढ़ावा देने में सहायक साबित हो रहा है। चंपा देवी ने बताया कि केंद्र में 20 महिलाएं हाथों से राखियां तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों की स्थानीय बाजार में अच्छी मांग है और ग्राहक इन्हें पसंद कर रहे हैं। अब तक 50 से 60 राखियों की बिक्री हो चुकी है, जो इस पहल की शुरुआती सफलता को दर्शाती है। राखियों की कीमत 20 रुपये से शुरू होती है, जिससे यह ग्राहकों के लिए किफायती हैं।
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