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Shimla News: महिला आयोग को मिले सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां
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बचत भवन में आयाेजित कार्यशाला में महिला आयोग की सदस्यों ने की वकालत
अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल निश्चित करने का आग्रह
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के उपायुक्त कार्यालय के पास स्थित बचत भवन में राज्य महिला आयोग की कार्यशाला में राज्य महिला आयोग को सिविल न्यायालय जैसी शक्तियां देने पर मंथन किया गया। साथ ही आयोग की अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल निश्चित करने का सुझाव भी दिया।
हिमाचल प्रदेश महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस दो दिवसीय कार्यशाला का आगाज किया। कार्यशाला में पहले दिन महिला आयोग अधिनियम 1996 में आवश्यक संशोधनों, प्रावधानों और उचित बदलावों को लेकर सुझाव और विचार-विमर्श किया गया। कार्यशाला में महिला आयोग अध्यक्ष, चार सदस्यों और करीब तीस विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी भी मौजूद रही। इस सुझाव पर जोर दिया कि राज्य महिला आयोग को सिविल न्यायालय जैसी शक्तियां मिलनी चाहिए। इसके अनुसार राजस्थान वैधानिक, अर्ध-न्यायिक निकाय है जिसमें आयोग को मामलों के पक्षकारों को समन भेजकर बुलाने की शक्तियां मिली हैं। इसके अलावा गवाहों से शपथ पर पूछताछ करने, दस्तावेज और सार्वजनिक रिकॉर्ड मंगवाने और साक्ष्य लेने जैसे अधिकारों सहित जन सुनवाई यानी जिलों में जाकर पीड़ित महिलाओं को सुनना, स्वत: संज्ञान लेने, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के लिए निर्देशित करने का अधिकार है।
विशेषज्ञों ने कहा कि इससे आयोग महिलाओं से जुड़े मामलों में अधिक प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर पाएगा। सुझाव में आयोग के वित्तीय संसाधनों को बढ़ाने की बात भी शामिल थी। इस अवसर पर सदस्य सचिव बुशरा अंसारी, सदस्य रीना पुंडीर, सरोज वर्मा और रीना दरोच सहित विधि अधिकारी यशपाल ने भाग लिया।
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इन विषयों पर भी हुई चर्चा
कार्यशाला के दौरान हर विभाग में लैंगिक संवेदनशीलता के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर देने पर भी व्यापक मंथन हुआ। इसके साथ ही हर जिले में खुले वन स्टॉप सेंटरों में प्रशिक्षित स्टाफ रखने की आवश्यकता, महिला थानों की संवेदनशील कार्यप्रणाली, पंचायतों तक महिलाओं की आसान पहुंच के लिए नियमित ग्राम सभाओं का आयोजन, संपत्ति पर बेटे-बेटियों का समान अधिकार के कानून को जमीनी स्तर पर लागू करने के सुझाव दिए गए।
अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल निश्चित करने का आग्रह
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी के उपायुक्त कार्यालय के पास स्थित बचत भवन में राज्य महिला आयोग की कार्यशाला में राज्य महिला आयोग को सिविल न्यायालय जैसी शक्तियां देने पर मंथन किया गया। साथ ही आयोग की अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल निश्चित करने का सुझाव भी दिया।
हिमाचल प्रदेश महिला आयोग और राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस दो दिवसीय कार्यशाला का आगाज किया। कार्यशाला में पहले दिन महिला आयोग अधिनियम 1996 में आवश्यक संशोधनों, प्रावधानों और उचित बदलावों को लेकर सुझाव और विचार-विमर्श किया गया। कार्यशाला में महिला आयोग अध्यक्ष, चार सदस्यों और करीब तीस विशेषज्ञों ने भाग लिया। कार्यशाला में राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी भी मौजूद रही। इस सुझाव पर जोर दिया कि राज्य महिला आयोग को सिविल न्यायालय जैसी शक्तियां मिलनी चाहिए। इसके अनुसार राजस्थान वैधानिक, अर्ध-न्यायिक निकाय है जिसमें आयोग को मामलों के पक्षकारों को समन भेजकर बुलाने की शक्तियां मिली हैं। इसके अलावा गवाहों से शपथ पर पूछताछ करने, दस्तावेज और सार्वजनिक रिकॉर्ड मंगवाने और साक्ष्य लेने जैसे अधिकारों सहित जन सुनवाई यानी जिलों में जाकर पीड़ित महिलाओं को सुनना, स्वत: संज्ञान लेने, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई के लिए निर्देशित करने का अधिकार है।
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विशेषज्ञों ने कहा कि इससे आयोग महिलाओं से जुड़े मामलों में अधिक प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर पाएगा। सुझाव में आयोग के वित्तीय संसाधनों को बढ़ाने की बात भी शामिल थी। इस अवसर पर सदस्य सचिव बुशरा अंसारी, सदस्य रीना पुंडीर, सरोज वर्मा और रीना दरोच सहित विधि अधिकारी यशपाल ने भाग लिया।
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कार्यशाला के दौरान हर विभाग में लैंगिक संवेदनशीलता के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर देने पर भी व्यापक मंथन हुआ। इसके साथ ही हर जिले में खुले वन स्टॉप सेंटरों में प्रशिक्षित स्टाफ रखने की आवश्यकता, महिला थानों की संवेदनशील कार्यप्रणाली, पंचायतों तक महिलाओं की आसान पहुंच के लिए नियमित ग्राम सभाओं का आयोजन, संपत्ति पर बेटे-बेटियों का समान अधिकार के कानून को जमीनी स्तर पर लागू करने के सुझाव दिए गए।