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नवरात्रि पर अक्षत से लेकर चुनरी तक, मां दुर्गा को इन चीजों को अर्पित करने से बदलती है किस्मत
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Sun, 22 Mar 2026 12:16 PM IST
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सार
chaitra navratri 2026: चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा को प्रसन्न करने के लिए कई तरह की पूजा सामग्री को अर्पित किया जाता है।
Chaitra Navratri 2026
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Chaitra Navratri 2026: नवरात्रि के पावन अवसर पर मां दुर्गा की आराधना केवल श्रद्धा का ही नहीं, बल्कि भाव और समर्पण का भी उत्सव होती है। शास्त्रों में कहा गया है कि जब भक्त मां के दरबार में जाता है, तो वह अपने साथ केवल वस्तुएं नहीं, बल्कि अपनी आस्था और कृतज्ञता भी अर्पित करता है। इसलिए मां दुर्गा के मंदिर में खाली हाथ जाना उचित नहीं माना गया है। प्रत्येक भेंट का अपना एक विशेष आध्यात्मिक और प्रतीकात्मक महत्व होता है, जो साधक के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। देवी के मंदिर जाते समय धारण किए हुए परिधान धुले व स्वच्छ हो । उचित यही है कि घर से निकलकर पहले मंदिर जाएं और उसके बाद ही अगर कहीं और जाना हो तो जाएं। मां के मंदिर जाएं तो पुरुषों के मस्तक कोरे ना हो उनमें तिलक लगा हो, वहीं स्त्रियों के सिर ढके हों।
अक्षत चढ़ाने का महत्व
चावल को अक्षत कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है। जो कभी टूटता नहीं। मां दुर्गा को चावल अर्पित करना अखंडता, समृद्धि और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है। यह जीवन में निरंतर सुख-शांति और अन्न-धन की वृद्धि का संकेत देता है।
लाल पुष्प
लाल रंग शक्ति, उत्साह और साहस का प्रतीक है। मां दुर्गा को लाल पुष्प चढ़ाने से साधक के भीतर ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार होता है। यह देवी की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावी माध्यम माना गया है।
मां को चुनरी अर्पित करना सम्मान, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। लाल या पीली चुनरी चढ़ाने से जीवन में सौभाग्य और सुरक्षा की भावना मजबूत होती है। यह भक्त और देवी के बीच भावनात्मक संबंध को और गहरा करती है।
सिक्का
मंदिर में सिक्का चढ़ाना दान और त्याग की भावना को दर्शाता है। यह संकेत देता है कि भक्त अपनी कमाई का कुछ अंश देवी को समर्पित कर रहा है। इससे धन संबंधी बाधाएं दूर होने और आर्थिक स्थिरता प्राप्त होने की मान्यता है।
ऋतु फल
मौसमी फल प्रकृति की ताजगी और पवित्रता का प्रतीक होते हैं। मां को ऋतु फल चढ़ाने से यह भाव व्यक्त होता है कि भक्त प्रकृति के प्रति कृतज्ञ है। इससे जीवन में स्वास्थ्य, संतुलन और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सुहाग का सामान
सिंदूर, चूड़ी, बिंदी और अन्य सुहाग सामग्री मां दुर्गा को अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यह अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और परिवार की समृद्धि का प्रतीक होता है। विशेषकर महिलाएं इस भेंट के माध्यम से अपने जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं।
समर्पण भाव का महत्व
इन सभी वस्तुओं का वास्तविक महत्व उनके पीछे छिपे भाव में निहित होता है। जब भक्त सच्चे मन, श्रद्धा और विश्वास के साथ मां को भेंट अर्पित करता है, तो यह साधना और भक्ति को और अधिक प्रभावी बना देता है। यही समर्पण भाव साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनता है।
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अक्षत चढ़ाने का महत्व
चावल को अक्षत कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है। जो कभी टूटता नहीं। मां दुर्गा को चावल अर्पित करना अखंडता, समृद्धि और स्थायित्व का प्रतीक माना जाता है। यह जीवन में निरंतर सुख-शांति और अन्न-धन की वृद्धि का संकेत देता है।
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लाल पुष्प
लाल रंग शक्ति, उत्साह और साहस का प्रतीक है। मां दुर्गा को लाल पुष्प चढ़ाने से साधक के भीतर ऊर्जा, आत्मविश्वास और सकारात्मकता का संचार होता है। यह देवी की कृपा प्राप्त करने का सरल और प्रभावी माध्यम माना गया है।
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चुनरीमां को चुनरी अर्पित करना सम्मान, श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। लाल या पीली चुनरी चढ़ाने से जीवन में सौभाग्य और सुरक्षा की भावना मजबूत होती है। यह भक्त और देवी के बीच भावनात्मक संबंध को और गहरा करती है।
सिक्का
मंदिर में सिक्का चढ़ाना दान और त्याग की भावना को दर्शाता है। यह संकेत देता है कि भक्त अपनी कमाई का कुछ अंश देवी को समर्पित कर रहा है। इससे धन संबंधी बाधाएं दूर होने और आर्थिक स्थिरता प्राप्त होने की मान्यता है।
ऋतु फल
मौसमी फल प्रकृति की ताजगी और पवित्रता का प्रतीक होते हैं। मां को ऋतु फल चढ़ाने से यह भाव व्यक्त होता है कि भक्त प्रकृति के प्रति कृतज्ञ है। इससे जीवन में स्वास्थ्य, संतुलन और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सुहाग का सामान
सिंदूर, चूड़ी, बिंदी और अन्य सुहाग सामग्री मां दुर्गा को अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यह अखंड सौभाग्य, दांपत्य सुख और परिवार की समृद्धि का प्रतीक होता है। विशेषकर महिलाएं इस भेंट के माध्यम से अपने जीवन में सुख-शांति की कामना करती हैं।
समर्पण भाव का महत्व
इन सभी वस्तुओं का वास्तविक महत्व उनके पीछे छिपे भाव में निहित होता है। जब भक्त सच्चे मन, श्रद्धा और विश्वास के साथ मां को भेंट अर्पित करता है, तो यह साधना और भक्ति को और अधिक प्रभावी बना देता है। यही समर्पण भाव साधक के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बनता है।

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