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क्यों खास है इस बार की सोमवती अमावस्या ? जानिए संयोग, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: Vinod Shukla Updated Sun, 14 Jun 2026 12:19 AM IST
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सार

सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष सोमवती पर कई तरह के महासंयोग का निर्माण होगा। आइए जानते हैं आखिरकार क्यों खास है इस बार की सोमवती अमावस्या।

kab hai somvati amavasya time puja vidhi shubh muhurat and amavasya tithi importance
सोमवती अमावस्या - फोटो : amar ujala
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विस्तार

हिंदू धर्म में हर एक तिथि का अपना खास और विशेष महत्व होता है। जिसमें हर माह पड़ने वाली अमावस्या तिथि का धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से काफी महत्व होता है। वर्ष में कुल 12 अमावस्या आती है जिसमें सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या तिथि को सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा-आराधना के लिए समर्पित होता है साथ ही अमावस्या तिथि पितरों की पूजा, तर्पण, गंगा स्नान और दान करने के लिए बहुत ही शुभ तिथि मानी जाती है। इस वर्ष पड़ने वाली सोमवाती अमावस्या विशेष फलदायी मानी जा रही है। आइए जानते हैं क्या है सोमवती अमावस्या का संयोग, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त। 



सोमवती अमावस्या पर खास संयोग
हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष सोमवती अमावस्या पर कई तरह के धार्मिक और ज्योतिषीय संयोग बना हुआ है जिससे कारण यह अमावस्या विशेष फलदायी मानी जाती है। इस बार यह सोमवाती अमावस्या पर 3 साल बाद अधिकमास का योग बना बनेगा जिसके कारण इसका विशेष महत्व है। अधिकमास हर तीन साल में एक बार आती है और अधिकमास में पड़ने वाली अमावस्या पर दान, स्नान और पूजा का फल कई अधिक गुना बढ़ जाता है। इस अलावा सोमवती अमावस्या पर मिथुन संक्रांति का योग भी बनेगा। इस दिन सूर्य राशि परिवर्तन करते हुए मिथुन राशि में आएंगे। इसके अलावा 15 जून को सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग का संयोग बनेगा जिससे शास्त्रों में बहुत ही शुभ माना जाता है। इस योग में काम करने पर विशेष फल की प्राप्ति होती है।  
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सोमवती अमावस्या तिथि और पूजा शुभ मुहूर्त 
पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि की शुरुआत, 14 जून 2026 को दोपहर 12 बजकर 19 मिनट पर होगी और इसका समापन 15 जून को सुबह 08 बजकर 23 मिनट पर होगा। ऐसे में स्नान, दान और पूजा के लिए मुहुर्त 15 जून को सुबह 03 बजकर 33 मिनट से लेकर सुबह 04 बजकर 55 मिनट तक रहेगा। 
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सोमवती अमावस्या पूजा विधि

  • - सबसे पहले सुबह ब्रह्राा मुहूर्त में किसी पवित्र नदी में स्नान करें और व्रत रखने और दान करने का संकल्प लें। 
  • - इसके बाद तांबे के लोटे में जल, गंगाजल की कुछ बूंदे, लाल फूल, अक्षत और रोली को डालकर सूर्यदेव को अर्घ्य दें। 
  • - सूर्यदेव को अर्घ्य देने के बाद जल में काला तिल डाल पितरों को तर्पण दें।
  • - सोमवती अमावस्या तिथि पर अपने कुल देवता, भगवान विष्णु, भवगवान शिव की पूजा करें। 
  • - भगवान शिव को दूध, गंगाजल और शहद से अभिषेक करें ,भगवान विष्णु की पूजा करते करते हुए मंत्रों का जाप करें। 
  • - अमावस्या तिथि पर पीपल के पेड़ की पूजा करने का विधान होता है। इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाएं और दूध अर्पित करें। 
  • - अमावस्या तिथि पर पूजा के बाद गरीबों और जरूरतमंदों को अपने सामर्थ्य के अनुसार दान करें। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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