{"_id":"6a2f6373881370ea5a07d879","slug":"somvati-amavasya-2026-date-shubh-yog-and-importance-of-somvati-amavasya-2026-06-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Somvati Amavasya 2026: आज सोमवती अमावस्या, जानें शिव-विष्णु कृपा और अक्षय पुण्य का दुर्लभ संयोग","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
Somvati Amavasya 2026: आज सोमवती अमावस्या, जानें शिव-विष्णु कृपा और अक्षय पुण्य का दुर्लभ संयोग
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Vinod Shukla
Updated Mon, 15 Jun 2026 07:59 AM IST
विज्ञापन
सार
15 जून का देशभर में सोमवती अमावस्या का पर्व मनाया जा रहा है। सोमवार का दिन भगवान शिव को प्रिय है और अमावस्या तिथि पितरों के निमित्त समर्पित मानी जाती है। जब ये दोनों योग एक साथ आते हैं तो यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है।
सोमवती अमावस्या 2026
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
सनातन धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस वर्ष यह पावन तिथि पुरुषोत्तम मास में पड़ रही है, जिससे इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। शास्त्रों के अनुसार पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को समर्पित है, जबकि सोमवार भगवान शिव की आराधना का दिन माना जाता है। ऐसे में यह दुर्लभ संयोग भगवान विष्णु, भगवान शिव और पितरों की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर माना गया है।
क्या है पुरुषोत्तम मास का महत्व ?
धार्मिक ग्रंथों में पुरुषोत्तम मास को सभी महीनों में विशेष स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि इस मास में किए गए जप, तप, दान, व्रत और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक प्राप्त होता है। कई पुराणों में वर्णन मिलता है कि भगवान विष्णु ने इस मास को अपना नाम देकर इसे "पुरुषोत्तम मास" का गौरव प्रदान किया। इसलिए इस मास में किए गए धार्मिक कार्य विशेष पुण्यदायक माने जाते हैं।
सोमवती अमावस्या क्यों मानी जाती है विशेष ?
सनातन धर्म में हर तिथि, वार और व्रत का विशेष महत्व होता है। सोमवार का दिन भगवान शिव को प्रिय है और अमावस्या तिथि पितरों के निमित्त समर्पित मानी जाती है। जब ये दोनों योग एक साथ आते हैं तो यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से किए गए पूजन, व्रत और दान से व्यक्ति के जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।
विज्ञापन
स्नान, जप और पूजा का मिलता है विशेष फल
सोमवती अमावस्या के दिन प्रातःकाल स्नान करके भगवान शिव और भगवान विष्णु का पूजन करना शुभ माना गया है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं तथा भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अर्पित करते हैं। इस दिन महामृत्युंजय मंत्र, विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और भगवान के नाम-जप का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से मन की शुद्धि होती है और घर में सुख-शांति आती है।
अमावस्या तिथि का संबंध पितरों से माना जाता है। इस दिन तर्पण, पितृ स्मरण और श्राद्ध कर्म करने से पूर्वजों की आत्मा को संतोष प्राप्त होता है। मान्यता है कि पितरों की कृपा से परिवार में सुख, शांति और उन्नति बनी रहती है। इसलिए अनेक लोग इस दिन जल, तिल और कुश से तर्पण कर अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं।
सोमवती अमावस्या पर दान का महत्व
धर्मशास्त्रों में सोमवती अमावस्या पर दान को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। विशेष रूप से पुरुषोत्तम मास में किया गया दान अक्षय फल प्रदान करने वाला माना जाता है। इस दिन अन्न दान करने से कभी अन्न की कमी नहीं होती, जल दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है, वस्त्र दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है तथा तिल दान को पितृ तृप्ति का श्रेष्ठ साधन माना गया है। इसके अतिरिक्त गुड़, फल, छाता, जूते-चप्पल, दक्षिणा और जरूरतमंदों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान व्यक्ति को पुण्य, यश और मानसिक संतोष प्रदान करता है।
पीपल पूजा का विशेष महत्व
सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों में पीपल में भगवान विष्णु का निवास माना गया है। श्रद्धालु पीपल को जल अर्पित कर उसकी परिक्रमा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह परंपरा प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
क्या है पुरुषोत्तम मास का महत्व ?
धार्मिक ग्रंथों में पुरुषोत्तम मास को सभी महीनों में विशेष स्थान प्राप्त है। मान्यता है कि इस मास में किए गए जप, तप, दान, व्रत और पूजा का फल सामान्य दिनों की तुलना में अधिक प्राप्त होता है। कई पुराणों में वर्णन मिलता है कि भगवान विष्णु ने इस मास को अपना नाम देकर इसे "पुरुषोत्तम मास" का गौरव प्रदान किया। इसलिए इस मास में किए गए धार्मिक कार्य विशेष पुण्यदायक माने जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सोमवती अमावस्या क्यों मानी जाती है विशेष ?
सनातन धर्म में हर तिथि, वार और व्रत का विशेष महत्व होता है। सोमवार का दिन भगवान शिव को प्रिय है और अमावस्या तिथि पितरों के निमित्त समर्पित मानी जाती है। जब ये दोनों योग एक साथ आते हैं तो यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से किए गए पूजन, व्रत और दान से व्यक्ति के जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।
स्नान, जप और पूजा का मिलता है विशेष फल
सोमवती अमावस्या के दिन प्रातःकाल स्नान करके भगवान शिव और भगवान विष्णु का पूजन करना शुभ माना गया है। श्रद्धालु शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करते हैं तथा भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल अर्पित करते हैं। इस दिन महामृत्युंजय मंत्र, विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और भगवान के नाम-जप का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि ऐसा करने से मन की शुद्धि होती है और घर में सुख-शांति आती है।
आज सोमवती अमावस्या पर करें इन चीजों क दान, मिलेगा पितरों और भगवान शिव की विशेष कृपा
क्यों खास है इस बार की सोमवती अमावस्या ? जानिए संयोग, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त
पितृ तर्पण और पूर्वजों का आशीर्वादअमावस्या तिथि का संबंध पितरों से माना जाता है। इस दिन तर्पण, पितृ स्मरण और श्राद्ध कर्म करने से पूर्वजों की आत्मा को संतोष प्राप्त होता है। मान्यता है कि पितरों की कृपा से परिवार में सुख, शांति और उन्नति बनी रहती है। इसलिए अनेक लोग इस दिन जल, तिल और कुश से तर्पण कर अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं।
सोमवती अमावस्या पर दान का महत्व
धर्मशास्त्रों में सोमवती अमावस्या पर दान को अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। विशेष रूप से पुरुषोत्तम मास में किया गया दान अक्षय फल प्रदान करने वाला माना जाता है। इस दिन अन्न दान करने से कभी अन्न की कमी नहीं होती, जल दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है, वस्त्र दान करने से जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है तथा तिल दान को पितृ तृप्ति का श्रेष्ठ साधन माना गया है। इसके अतिरिक्त गुड़, फल, छाता, जूते-चप्पल, दक्षिणा और जरूरतमंदों को भोजन कराने का भी विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन अपनी सामर्थ्य के अनुसार किया गया दान व्यक्ति को पुण्य, यश और मानसिक संतोष प्रदान करता है।
पीपल पूजा का विशेष महत्व
सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। शास्त्रों में पीपल में भगवान विष्णु का निवास माना गया है। श्रद्धालु पीपल को जल अर्पित कर उसकी परिक्रमा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। यह परंपरा प्रकृति के प्रति सम्मान और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।