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Archery: 17 साल की प्रिथिका ने पहली बार विश्व कप में जीता व्यक्तिगत कांस्य पदक, जानें किस तीरंदाज को दी मात
Sat, 11 Jul 2026 07:44 PM IST
शोभित चतुर्वेदी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मैड्रिड
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मैड्रिड
Published by: शोभित चतुर्वेदी
Updated Sat, 11 Jul 2026 07:44 PM IST
सार
भारतीय तीरंदाज प्रिथिका प्रदीप ने मैड्रिड में विश्व कप में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। उन्होंने दुनिया की नंबर-11 तुर्किये की हजल बुरुन को 145-142 से हराया। प्रिथिका ने इससे पहले महिला कंपाउंड टीम स्पर्धा में भारत को रजत पदक दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई थी।
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प्रिथिका प्रदीप
- फोटो : ARCHERY ASSOCIATION OF INDIA
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विस्तार
भारत की 17 वर्षीय तीरंदाज प्रिथिका प्रदीप ने शानदार वापसी करते हुए दुनिया की 11वें नंबर की तीरंदाज हजल बुरुन को 145-142 से हराकर मैड्रिड तीरंदाजी विश्व कप में अपने करियर का पहला व्यक्तिगत विश्व कप कांस्य पदक जीता। उन्होंने इसके साथ ही एक ही दिन में भारत के लिए दो पदक जीतकर यादगार प्रदर्शन किया। प्रिथिका ने ज्योति सुरेखा वेन्नम और चिकिथा तनीपार्थी के साथ मिलकर महिला कंपाउंड टीम स्पर्धा में भारत को रजत पदक दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी।
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कंपाउंड वर्ग में भारत ने जीते दो पदक
भारत ने इस तरह कंपाउंड वर्ग में अपने अभियान का समापन दो पदकों के साथ किया। अब रविवार को रिकर्व वर्ग में भारतीय तीरंदाजों के पास दो और पदक जीतने का मौका होगा। प्रिथिका को सेमीफाइनल में मलयेशिया की फातिन नूरफतेहाह मत सालेह के खिलाफ 142-144 से करीबी हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्हें कांस्य पदक मुकाबला खेलना पड़ा। अपने करियर के पहले विश्व कप पदक मुकाबले में प्रिथिका शुरुआत में दबाव में नजर आईं। तुर्किये की बुरुन ने पहले ही दौर में लगातार तीन सटीक 10 लगाकर बढ़त बना ली और प्रिथिका 28-30 से पीछे हो गईं।
भारतीय तीरंदाज ने हालांकि शानदार संयम दिखाया। दूसरे दौर में उन्होंने 29-28 से बढ़त बनाकर अंतर कम किया और तीसरे दौर में तीनों तीरों पर सटीक निशाना लगाते हुए स्कोर 87-87 से बराबर कर दिया। अंतिम तीर पर उन्हें जीत सुनिश्चित करने के लिए कम से कम आठ अंक की जरूरत थी, लेकिन प्रिथिका ने दबाव को मात देते हुए शानदार परफेक्ट 10 लगाया और अपने करियर का पहला विश्व कप कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
भारत ने इस तरह कंपाउंड वर्ग में अपने अभियान का समापन दो पदकों के साथ किया। अब रविवार को रिकर्व वर्ग में भारतीय तीरंदाजों के पास दो और पदक जीतने का मौका होगा। प्रिथिका को सेमीफाइनल में मलयेशिया की फातिन नूरफतेहाह मत सालेह के खिलाफ 142-144 से करीबी हार का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उन्हें कांस्य पदक मुकाबला खेलना पड़ा। अपने करियर के पहले विश्व कप पदक मुकाबले में प्रिथिका शुरुआत में दबाव में नजर आईं। तुर्किये की बुरुन ने पहले ही दौर में लगातार तीन सटीक 10 लगाकर बढ़त बना ली और प्रिथिका 28-30 से पीछे हो गईं।
भारतीय तीरंदाज ने हालांकि शानदार संयम दिखाया। दूसरे दौर में उन्होंने 29-28 से बढ़त बनाकर अंतर कम किया और तीसरे दौर में तीनों तीरों पर सटीक निशाना लगाते हुए स्कोर 87-87 से बराबर कर दिया। अंतिम तीर पर उन्हें जीत सुनिश्चित करने के लिए कम से कम आठ अंक की जरूरत थी, लेकिन प्रिथिका ने दबाव को मात देते हुए शानदार परफेक्ट 10 लगाया और अपने करियर का पहला विश्व कप कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया।
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कंपाउंड टीम वर्ग में जीता रजत
इससे पहले सुबह खेले गए महिला कंपाउंड टीम फाइनल में ज्योति सुरेखा वेन्नम, प्रिथिका प्रदीप और चिकिता तानीपार्थी की भारतीय तिकड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं दोहरा सकी। कोलंबिया ने पूरे मुकाबले में दबदबा बनाए रखते हुए भारत को 232-228 से हराया, जिससे भारतीय टीम को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
इससे पहले सुबह खेले गए महिला कंपाउंड टीम फाइनल में ज्योति सुरेखा वेन्नम, प्रिथिका प्रदीप और चिकिता तानीपार्थी की भारतीय तिकड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं दोहरा सकी। कोलंबिया ने पूरे मुकाबले में दबदबा बनाए रखते हुए भारत को 232-228 से हराया, जिससे भारतीय टीम को रजत पदक से संतोष करना पड़ा।