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भारतीय हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलने पर रार: परगट सिंह ने उठाए सवाल, धनराज पिल्लै बोले- नीली जर्सी है पहचान

Thu, 30 Jul 2026 07:03 PM IST
शोभित चतुर्वेदी स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शोभित चतुर्वेदी Updated Thu, 30 Jul 2026 07:03 PM IST
सार

भारतीय पुरुष हॉकी टीम की जर्सी का रंग बदलने पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। हॉकी इंडिया की सफाई के बाद भी इस पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब पूर्व कप्तान परगट सिंह और धनराज पिल्लै ने भी इस फैसले पर सवाल खड़े किए हैं।

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Controversy over change in Indian hockey team's jersey color Pargat Singh and Dhanraj Pillay reaction
हॉकी में बढ़ता विवाद - फोटो : IANS/ANI Screen Grab

विस्तार

विश्व कप से पहले भारतीय हॉकी टीमों की जर्सी का रंग नीले से बदलकर केसरिया करने पर भड़के पूर्व कप्तान परगट सिंह ने सवाल दागा कि देश में हर चीज की भगवा ब्रांडिंग क्यो हो रही है। वहीं, धनराज पिल्लै का कहना है कि राष्ट्रीय टीम की पहचान नीली जर्सी रही है, यह कोई फ्रेंचाइजी हॉकी नहीं है। नीदरलैंड और बेल्जियम में 15 अगस्त से शुरू हो रहे विश्व कप से पहले भारतीय महिला और पुरुष टीमों की जर्सी का रंग बदले जाने को लेकर काफी विवाद हो गया है। 
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हॉकी इंडिया ने दिया था स्पष्टीकरण
पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा द्वारा सवाल उठाए जाने के बाद हॉकी इंडिया ने हालांकि सफाई में कहा है कि तकनीकी कारणों से कोचों और खिलाड़ियों के अनुरोध पर यह फैसला लिया गया। चार ओलंपिक, विश्व कप और चैंपियंस ट्रॉफी समेत भारत के लिए 339 मैच खेल चुके महान फॉरवर्ड धनराज ने कहा, भारतीय हॉकी की पहचान नीली जर्सी रही है। केसरिया हमारे ध्वज का रंग है और काफी मायने रखता है लेकिन भारतीय हॉकी से जुड़ा नहीं है। इतने साल बाद लेकिन अचानक क्यो बदला गया, यह समझ से परे है।
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Controversy over change in Indian hockey team's jersey color Pargat Singh and Dhanraj Pillay reaction
भारतीय हॉकी टीम - फोटो : Hockey India
धनराज पिल्लै हॉकी इंडिया के तर्क से सहमत नहीं
उन्होंने कहा, 1928 से लेकर अब तक, दादा ध्यानचंद और बलबीर सिंह सीनियर से लेकर मोहम्मद शाहिद, जफर इकबाल और 1980 मॉस्को ओलंपिक की टीम तक सभी नीली जर्सी में खेले हैं। मैं खुद 15 साल तक खेला और जब तक खेला गहरा और हल्का नीला ही जर्सी का रंग रहा है। वह भाव अब नई केसरिया रंग की जर्सी में कैसे आ सकेगा। यह कोई आईपीएल या हॉकी इंडिया लीग नहीं है जिसमें फ्रेंचाइजी अलग अलग रंगों की जर्सी में खेलते हैं। भारतीय जर्सी का रंग तो नीला ही है। जहां तक मुझे याद है ,हम 1992 बार्सीलोना ओलंपिक में अर्जेंटीना के खिलाफ एक मैच पीली जर्सी पहनकर खेले थे। नीले शॉर्ट और पीली टीशर्ट। इसके अलावा सिर्फ नीली जर्सी ही पहनी है।

धनराज ने इस दलील को भी खारिज किया कि नीली टर्फ पर नीली जर्सी में खेलने से दिक्कत आती है। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि ऐसा कुछ है। नीली टर्फ पर खेलते हुए पांच छह साल हो गए और मैने तो ऐसा कभी नहीं देखा। क्या एफआईएच ने कहा है कि नीले रंग से विरोधी टीम को या आपकी टीम को कोई दिक्कत होती है। 
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परगट सिंह ने भगवा ब्रांडिंग की बात कही
वहीं बार्सीलोना (1992) और अटलांटा (1996) ओलंपिक खेल चुके महान डिफेंडर परगट ने कहा कि देश में हर चीज की भगवा ब्रांडिंग हो रही है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। हॉकी से राजनीति में आए पंजाब में कांग्रेस के विधायक परगट ने कहा, हमारे देश में हर चीज में भगवा ब्रांडिंग हो रही है चाहे शिक्षा हो, इतिहास और अब खेल भी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। खेल ऐसा क्षेत्र है जो हमारे देश का गर्व है और धर्म, जाति, वर्ग सभी से परे है। खेल में भी अगर यही सोच डालनी है तो यह शर्मनाक है। हॉकी इंडिया ने अजीब सा बयान दिया है कि टर्फ का रंग नीला होने से परेशानी होती है लेकिन मैने तो ऐसा कभी नहीं देखा। उसे भी मान लिया जाए तो भी सिर्फ यही रंग क्यो, क्या कोई और रंग नहीं था।
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