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Hockey World Cup: हॉकी विश्वकप में भारत के चार ऐसे दिग्गज, जिन्होंने पदकों की हैट्रिक लगाई
Thu, 06 Aug 2026 11:18 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, लंदन
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Thu, 06 Aug 2026 11:18 AM IST
सार
हॉकी विश्वकप से पहले भारतीय हॉकी के उन चार दिग्गजों को याद किया जा रहा है, जिन्होंने विश्वकप में तीन-तीन पदक जीतने का गौरव हासिल किया। भारत के नाम अब तक विश्वकप में 31 पदकवीर और कुल 167 पदक हैं।
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भारतीय हॉकी टीम
- फोटो : Hockey india twitter
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विस्तार
15 अगस्त से हॉकी विश्वकप शुरू होने जा रहा है। इस बार भारतीय पुरुष टीम का लक्ष्य 70 के दशक का दबदबा फिर से कायम करने का होगा। भारत ने 1971 में कांस्य, 1973 में रजत और 1975 में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता था। भारतीय टीम के इतिहास में चार ऐसे दिग्गज खिलाड़ी हुए हैं, जिन्हें तीन विश्वकप में पदक जीतने का गौरव मिला।
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अशोक कुमार
- फोटो : Wikipedia
अशोक कुमार: महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार अपनी शानदार हॉकी कला, गेंद पर नियंत्रण और गोल करने की क्षमता के लिए जाने जाते थे। 1975 के कुआलालंपुर विश्वकप में पाकिस्तान के खिलाफ फाइनल में विजयी गोल कर उन्होंने भारत को पहला और अब तक का इकलौता विश्वकप खिताब दिलाया। खेल से संन्यास लेने के बाद उन्होंने विवेक प्रसाद, दिलीप तिर्की और धनराज पिल्लै जैसे खिलाड़ियों को प्रशिक्षित किया।
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हरचरण सिंह
- फोटो : ANI
हरचरण सिंह: 1970 के दशक के सबसे तेज और प्रभावशाली खिलाड़ियों में गिने जाने वाले हरचरण सिंह अपनी रफ्तार के लिए मशहूर थे। 1975 विश्वकप में मलयेशिया के खिलाफ अतिरिक्त समय में उनका गोल भारत की जीत की शुरुआत बना। उन्होंने भारतीय टीम के लिए 1970 से 1974 तक रजत पदक जीते और संन्यास के बाद युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करते रहे।
किंडो
- फोटो : ANI
माइकल किंडो: आदिवासी पृष्ठभूमि से आने वाले माइकल किंडो भारत के सबसे भरोसेमंद फुलबैक में से एक थे। उनका मजबूत टैकल, शांत स्वभाव और बेहतरीन डिफेंस उनकी पहचान थी। 1972 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार मिला। वे पहले आदिवासी खिलाड़ी थे जिन्होंने नौसेना और रेलवे से जुड़कर भारतीय हॉकी में पहचान बनाई। 2020 में उनके निधन के बाद ओडिशा सरकार ने युवा खेल प्रतिभाओं के लिए उनके नाम पर योजना शुरू की।
अजित पाल सिंह
- फोटो : ANI
अजित पाल सिंह: दुनिया के सर्वश्रेष्ठ मिडफील्डरों में शामिल अजित पाल सिंह बेहतरीन फिटनेस, खेल की समझ और शानदार नेतृत्व के लिए जाने जाते थे। उन्होंने भारत को 1975 विश्वकप में चैंपियन बनाया। उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने पाकिस्तान को हराकर इतिहास रचा। 2012 लंदन ओलंपिक के बाद भी वे भारतीय हॉकी के प्रशासनिक और मार्गदर्शक कार्यों से जुड़े रहे।
भारत के नाम विश्वकप में 167 पदक
भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक हॉकी विश्वकप में 31 पदकवीर तैयार किए हैं, जिन्होंने मिलकर 167 पदक जीते हैं। इनमें सात खिलाड़ियों ने केवल स्वर्ण पदक जीते, जबकि तीन खिलाड़ियों के नाम सिर्फ रजत पदक दर्ज हैं।
भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक हॉकी विश्वकप में 31 पदकवीर तैयार किए हैं, जिन्होंने मिलकर 167 पदक जीते हैं। इनमें सात खिलाड़ियों ने केवल स्वर्ण पदक जीते, जबकि तीन खिलाड़ियों के नाम सिर्फ रजत पदक दर्ज हैं।
1986 के बाद नहीं मिला पदक
हॉकी विश्वकप 1986 में पहली बार सिंथेटिक टर्फ पर खेला गया था। इसके बाद से भारत विश्वकप में कोई पदक नहीं जीत पाया है। इससे पहले भारत के तीनों विश्वकप पदक प्राकृतिक घास पर खेले गए टूर्नामेंट में आए थे।
हॉकी विश्वकप 1986 में पहली बार सिंथेटिक टर्फ पर खेला गया था। इसके बाद से भारत विश्वकप में कोई पदक नहीं जीत पाया है। इससे पहले भारत के तीनों विश्वकप पदक प्राकृतिक घास पर खेले गए टूर्नामेंट में आए थे।