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Explainer: क्वार्टर फाइनल नहीं होंगे, तो अब सेमीफाइनल में कैसे पहुंचेगी टीम? हॉकी विश्वकप का नया फॉर्मेट समझें
Tue, 11 Aug 2026 10:09 PM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, एम्सटरडैम
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, एम्सटरडैम
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Tue, 11 Aug 2026 10:09 PM IST
सार
हॉकी विश्व कप 2026 में इस बार क्वार्टर फाइनल नहीं होंगे। 16 टीमों को चार पूल में बांटा गया है और शीर्ष दो चरणों के बाद टीमें दोबारा ग्रुप में बंटेंगी। दूसरे चरण के शीर्ष दो-दो स्थान पर रहने वाली टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी।
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हॉकी विश्वकप 2026
- फोटो : ANI
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विस्तार
हॉकी विश्व कप में इस बार सिर्फ टीमें ही नहीं, टूर्नामेंट का पूरा गणित भी बदला हुआ नजर आएगा। 15 अगस्त से नीदरलैंड और बेल्जियम में शुरू हो रहे पुरुष और महिला विश्व कप में क्वार्टर फाइनल का दौर खत्म कर दिया गया है। अब खिताब तक पहुंचने के लिए टीमों को दो ग्रुप चरणों से गुजरना होगा। ऐसे में शुरुआती मुकाबलों की अहमियत पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। आखिर नया फॉर्मेट कैसे काम करेगा, भारत का रास्ता क्या होगा और सेमीफाइनल में पहुंचने के लिए कितने चरण पार करने होंगे? आइए आसान भाषा में समझते हैं।
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हॉकी विश्व कप में क्या बदला है?
2026 हॉकी विश्व कप में सबसे बड़ा बदलाव क्वार्टर फाइनल का हटना है। पिछले कुछ संस्करणों में ग्रुप स्टेज के बाद क्वार्टर फाइनल के जरिए सेमीफाइनलिस्ट तय होते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।
पुरुष और महिला दोनों विश्व कप में 16 टीमें हिस्सा लेंगी। इन्हें चार पूल- A, B, C और D में बांटा गया है। हर पूल में चार टीमें होंगी और सभी टीमें अपने पूल की बाकी तीन टीमों से एक-एक मुकाबला खेलेंगी।
यानी पहले चरण में हर टीम को तीन मैच मिलेंगे। इन मैचों के बाद हर पूल की रैंकिंग तय होगी।
पहले चरण में टॉप-2 पर रहना क्यों जरूरी?
पुरुष हॉकी विश्व कप: सभी ग्रुप्स
महिला हॉकी विश्व कप: सभी ग्रुप्स
2026 हॉकी विश्व कप में सबसे बड़ा बदलाव क्वार्टर फाइनल का हटना है। पिछले कुछ संस्करणों में ग्रुप स्टेज के बाद क्वार्टर फाइनल के जरिए सेमीफाइनलिस्ट तय होते थे, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा।
पुरुष और महिला दोनों विश्व कप में 16 टीमें हिस्सा लेंगी। इन्हें चार पूल- A, B, C और D में बांटा गया है। हर पूल में चार टीमें होंगी और सभी टीमें अपने पूल की बाकी तीन टीमों से एक-एक मुकाबला खेलेंगी।
यानी पहले चरण में हर टीम को तीन मैच मिलेंगे। इन मैचों के बाद हर पूल की रैंकिंग तय होगी।
पहले चरण में टॉप-2 पर रहना क्यों जरूरी?
- यही नए फॉर्मेट का सबसे अहम हिस्सा है। चारों पूल से सिर्फ शीर्ष दो टीमें अगले चरण में जाएंगी।
- तीसरे और चौथे स्थान पर रहने वाली टीमें भी टूर्नामेंट से बाहर नहीं होंगी, लेकिन उनका सफर खिताब की दौड़ से खत्म हो जाएगा और वे आगे 9वें से 16वें स्थान के लिए खेलेंगी।
- भारत के पुरुषों को पूल डी में इंग्लैंड, पाकिस्तान और वेल्स के साथ रखा गया है। महिला टीम भी पूल डी में चीन, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के साथ है।
- इसलिए भारत के लिए शुरुआती तीन मुकाबले बेहद अहम होंगे।
पुरुष हॉकी विश्व कप: सभी ग्रुप्स
| पूल | टीमें | आयोजन स्थल |
|---|---|---|
| पूल A | नीदरलैंड, अर्जेंटीना, न्यूजीलैंड, जापान | नीदरलैंड |
| पूल B | बेल्जियम, जर्मनी, फ्रांस, मलेशिया | बेल्जियम |
| पूल C | ऑस्ट्रेलिया, स्पेन, आयरलैंड, दक्षिण अफ्रीका | बेल्जियम |
| पूल D | इंग्लैंड, भारत, पाकिस्तान, वेल्स | नीदरलैंड |
महिला हॉकी विश्व कप: सभी ग्रुप्स
| पूल | टीमें | आयोजन स्थल |
|---|---|---|
| पूल A | नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, चिली, जापान | नीदरलैंड |
| पूल B | अर्जेंटीना, जर्मनी, अमेरिका, स्कॉटलैंड | बेल्जियम |
| पूल C | बेल्जियम, स्पेन, न्यूजीलैंड, आयरलैंड | बेल्जियम |
| पूल D | चीन, इंग्लैंड, भारत, दक्षिण अफ्रीका | नीदरलैंड |
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दूसरे चरण में कैसे बनेगा नया ग्रुप?
पहले चरण के बाद टीमें अपने प्रदर्शन के आधार पर चार नए पूल में बांटी जाएंगी।
यानी भारत अगर पूल डी में टॉप-2 में रहता है, तो वह पूल ई में जाएगा और उसका सामना पूल ए से आगे आने वाली दो टीमों से होगा।
पहले चरण के बाद टीमें अपने प्रदर्शन के आधार पर चार नए पूल में बांटी जाएंगी।
- पूल E: पूल A और D की पहले और दूसरे स्थान वाली टीमें
- पूल F: पूल B और C की पहले और दूसरे स्थान वाली टीमें
- पूल G: पूल A और D की तीसरे और चौथे स्थान वाली टीमें
- पूल H: पूल B और C की तीसरे और चौथे स्थान वाली टीमें
यानी भारत अगर पूल डी में टॉप-2 में रहता है, तो वह पूल ई में जाएगा और उसका सामना पूल ए से आगे आने वाली दो टीमों से होगा।
सबसे बड़ा ट्विस्ट- पुराने मैच का नतीजा भी साथ जाएगा
दूसरे चरण में टीमों को तीन नए मुकाबले खेलने होंगे, लेकिन यहां एक बेहद महत्वपूर्ण नियम है। अगर एक ही शुरुआती पूल की दो टीमें दूसरे चरण में पहुंचती हैं, तो उनके बीच पहले चरण में हुआ मुकाबला दोबारा नहीं खेला जाएगा। उस मैच का परिणाम दूसरे चरण की अंक तालिका में साथ लेकर जाया जाएगा।
उदाहरण के लिए, अगर भारत और इंग्लैंड दोनों पूल डी से टॉप-2 में पहुंचते हैं और भारत ने पहले चरण में इंग्लैंड को हरा दिया है, तो उस जीत के तीन अंक दूसरे चरण में भी भारत के खाते में रहेंगे। यही वजह है कि भारत के लिए सिर्फ टॉप-2 में पहुंचना ही नहीं, बल्कि पूल के मुकाबलों में मजबूत प्रदर्शन करना भी बेहद महत्वपूर्ण है।
दूसरे चरण में टीमों को तीन नए मुकाबले खेलने होंगे, लेकिन यहां एक बेहद महत्वपूर्ण नियम है। अगर एक ही शुरुआती पूल की दो टीमें दूसरे चरण में पहुंचती हैं, तो उनके बीच पहले चरण में हुआ मुकाबला दोबारा नहीं खेला जाएगा। उस मैच का परिणाम दूसरे चरण की अंक तालिका में साथ लेकर जाया जाएगा।
उदाहरण के लिए, अगर भारत और इंग्लैंड दोनों पूल डी से टॉप-2 में पहुंचते हैं और भारत ने पहले चरण में इंग्लैंड को हरा दिया है, तो उस जीत के तीन अंक दूसरे चरण में भी भारत के खाते में रहेंगे। यही वजह है कि भारत के लिए सिर्फ टॉप-2 में पहुंचना ही नहीं, बल्कि पूल के मुकाबलों में मजबूत प्रदर्शन करना भी बेहद महत्वपूर्ण है।
दूसरे चरण में सेमीफाइनल कैसे मिलेगा?
पूल ई और एफ खिताब की सीधी दौड़ तय करेंगे। दोनों पूल से शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी।
सेमीफाइनल में मुकाबले इस तरह होंगे:
इसलिए दूसरे चरण में शीर्ष दो में रहना ही सेमीफाइनल का टिकट होगा। यहां कोई क्वार्टर फाइनल नहीं खेला जाएगा।
पूल ई और एफ खिताब की सीधी दौड़ तय करेंगे। दोनों पूल से शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी।
सेमीफाइनल में मुकाबले इस तरह होंगे:
- पूल E की नंबर-1 टीम बनाम पूल F की नंबर-2 टीम
- पूल F की नंबर-1 टीम बनाम पूल E की नंबर-2 टीम
इसलिए दूसरे चरण में शीर्ष दो में रहना ही सेमीफाइनल का टिकट होगा। यहां कोई क्वार्टर फाइनल नहीं खेला जाएगा।
पांचवें से 16वें स्थान तक कैसे होगा फैसला?
नया फॉर्मेट सिर्फ सेमीफाइनलिस्ट तय करने तक सीमित नहीं है। पूल G और H की टीमें नौवें से 16वें स्थान के लिए खेलेंगी, जबकि पूल E और F में से सेमीफाइनल में नहीं पहुंचने वाली टीमें पांचवें से आठवें स्थान के लिए मुकाबला करेंगी। इस तरह अलग-अलग प्लेऑफ के जरिए पांचवें से 16वें स्थान तक की रैंकिंग भी तय होगी।
नया फॉर्मेट सिर्फ सेमीफाइनलिस्ट तय करने तक सीमित नहीं है। पूल G और H की टीमें नौवें से 16वें स्थान के लिए खेलेंगी, जबकि पूल E और F में से सेमीफाइनल में नहीं पहुंचने वाली टीमें पांचवें से आठवें स्थान के लिए मुकाबला करेंगी। इस तरह अलग-अलग प्लेऑफ के जरिए पांचवें से 16वें स्थान तक की रैंकिंग भी तय होगी।
कोच क्रेग फुल्टन ने क्यों बताया पूल मैच अहम?
भारतीय पुरुष टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने नए फॉर्मेट में शुरुआती मुकाबलों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'इस टूर्नामेंट का फॉर्मेट काफी बदल गया है। पहले क्वार्टर फाइनल होते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसलिए पूल मैचों का महत्व बहुत ज्यादा है, क्योंकि शीर्ष दो टीमें ही आगे जाएंगी। इन दोनों टीमों के बीच हुए मुकाबले का नतीजा अगले चरण में साथ जाता है। अगर एक टीम दूसरी को हरा देती है तो वे तीन अंक अगले चरण में भी साथ जाते हैं और इससे अगले ग्रुप से सेमीफाइनल में पहुंचने की स्थिति मजबूत हो जाती है।'
महिला कोच को क्वार्टर फाइनल हटना पसंद नहीं
भारतीय महिला टीम के कोच श्योर्ड मारिज्ने ने हालांकि क्वार्टर फाइनल हटाए जाने पर अलग राय रखी। उन्होंने कहा, 'यह एक दिलचस्प प्रारूप है, लेकिन टूर्नामेंट के फॉर्मेट में मेरी पसंद क्वार्टर फाइनल रखना है। मैं समझ सकता हूं कि दुनिया की शीर्ष रैंकिंग वाली टीमें इसे पसंद करेंगी, लेकिन मेरे हिसाब से क्वार्टर फाइनल टूर्नामेंट के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से होते हैं।'
भारतीय पुरुष टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने नए फॉर्मेट में शुरुआती मुकाबलों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'इस टूर्नामेंट का फॉर्मेट काफी बदल गया है। पहले क्वार्टर फाइनल होते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसलिए पूल मैचों का महत्व बहुत ज्यादा है, क्योंकि शीर्ष दो टीमें ही आगे जाएंगी। इन दोनों टीमों के बीच हुए मुकाबले का नतीजा अगले चरण में साथ जाता है। अगर एक टीम दूसरी को हरा देती है तो वे तीन अंक अगले चरण में भी साथ जाते हैं और इससे अगले ग्रुप से सेमीफाइनल में पहुंचने की स्थिति मजबूत हो जाती है।'
महिला कोच को क्वार्टर फाइनल हटना पसंद नहीं
भारतीय महिला टीम के कोच श्योर्ड मारिज्ने ने हालांकि क्वार्टर फाइनल हटाए जाने पर अलग राय रखी। उन्होंने कहा, 'यह एक दिलचस्प प्रारूप है, लेकिन टूर्नामेंट के फॉर्मेट में मेरी पसंद क्वार्टर फाइनल रखना है। मैं समझ सकता हूं कि दुनिया की शीर्ष रैंकिंग वाली टीमें इसे पसंद करेंगी, लेकिन मेरे हिसाब से क्वार्टर फाइनल टूर्नामेंट के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से होते हैं।'
कब होंगे फाइनल?
महिला विश्व कप का फाइनल और कांस्य पदक मुकाबला 29 अगस्त को नीदरलैंड में होगा। पुरुष विश्व कप का कांस्य पदक मुकाबला और फाइनल 30 अगस्त को बेल्जियम में खेला जाएगा। इस नए फॉर्मेट में खिताब जीतने वाली टीम को पहले चरण से ही लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा। खासकर भारत जैसी टीमों के लिए पहले पूल में टॉप-2 और फिर दूसरे चरण में शीर्ष दो में जगह बनाना सेमीफाइनल तक पहुंचने की सबसे अहम सीढ़ी होगी।
महिला विश्व कप का फाइनल और कांस्य पदक मुकाबला 29 अगस्त को नीदरलैंड में होगा। पुरुष विश्व कप का कांस्य पदक मुकाबला और फाइनल 30 अगस्त को बेल्जियम में खेला जाएगा। इस नए फॉर्मेट में खिताब जीतने वाली टीम को पहले चरण से ही लगातार अच्छा प्रदर्शन करना होगा। खासकर भारत जैसी टीमों के लिए पहले पूल में टॉप-2 और फिर दूसरे चरण में शीर्ष दो में जगह बनाना सेमीफाइनल तक पहुंचने की सबसे अहम सीढ़ी होगी।