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Sports Budget 2026: 'खेलो इंडिया मिशन' के साथ खेल सेक्टर को बड़ा बूस्ट, नई प्रतिभाओं को बढ़ावा देने पर रहा जोर
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Sun, 01 Feb 2026 11:33 AM IST
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सार
Sports Budget 2026: आज पेश हुए बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने खेल क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए खेलकूद के सामानों के लिए एक नई पहल का प्रस्ताव रखा। इस कदम से उच्च गुणवत्ता वाले स्पोर्ट्स गुड्स के घरेलू निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा और खिलाड़ियों को बेहतर संसाधन मिलने की उम्मीद है।
खेल बजट 2026
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में पेश किए जा रहे आम बजट में खेल क्षेत्र को मजबूती देने की दिशा में अहम पहल का एलान किया है। बजट भाषण के दौरान उन्होंने खेलकूद के सामानों के निर्माण और गुणवत्ता सुधार के लिए एक नई पहल का प्रस्ताव रखा। इस कदम को भारत में खेल उद्योग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए बड़ा प्रोत्साहन माना जा रहा है।
सीतारमण ने साथ ही बजट भाषण के दौरान 'खेलो इंडिया मिशन' की घोषणा करते हुए कहा कि यह मिशन अगले एक दशक में भारत के खेल क्षेत्र को पूरी तरह ट्रांसफॉर्म करेगा। सरकार का लक्ष्य केवल खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे स्पोर्ट्स इकोसिस्टम को मजबूत करना है। इस साल एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन होगा, जिसे देखते हुए यह बजट महत्वपूर्ण है।
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सीतारमण ने साथ ही बजट भाषण के दौरान 'खेलो इंडिया मिशन' की घोषणा करते हुए कहा कि यह मिशन अगले एक दशक में भारत के खेल क्षेत्र को पूरी तरह ट्रांसफॉर्म करेगा। सरकार का लक्ष्य केवल खिलाड़ियों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे स्पोर्ट्स इकोसिस्टम को मजबूत करना है। इस साल एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स का आयोजन होगा, जिसे देखते हुए यह बजट महत्वपूर्ण है।
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
- फोटो : संसद टीवी
खेलो इंडिया मिशन पांच स्तंभों पर आधारित होगा
सीतारमण ने कहा, 'खेल क्षेत्र रोजगार, कौशल विकास और नौकरियों के अनेक अवसर प्रदान करता है। खेलो इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से शुरू किए गए खेल प्रतिभाओं के व्यवस्थित पोषण को आगे बढ़ाते हुए, मैं खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव करती हूं।' सीतारमण ने कहा, 'खेलो इंडिया मिशन अगले दस वर्षों में खेल क्षेत्र को बदलने का काम करेगा। इसके तहत प्रतिभा विकास से लेकर ढांचे और तकनीक तक, हर स्तर पर एक समग्र व्यवस्था बनाई जाएगी।' उन्होंने बताया कि खेलो इंडिया मिशन को पांच प्रमुख चरणों में लागू किया जाएगा, ताकि जमीनी स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक खिलाड़ियों को एक मजबूत और निरंतर विकास मार्ग मिल सके।
1. इंटीग्रेटेड टैलेंट डेवलपमेंट पाथवे
इस मिशन के तहत प्रशिक्षण केंद्रों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो तीन स्तरों पर काम करेंगे-
इस व्यवस्था से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान जल्दी होगी और उन्हें सही समय पर सही प्रशिक्षण मिल सकेगा।
2. कोच और सपोर्ट स्टाफ का व्यवस्थित विकास
सरकार ने माना है कि अच्छे खिलाड़ियों के पीछे अच्छे कोच और सपोर्ट स्टाफ सबसे बड़ी ताकत होते हैं। खेलो इंडिया मिशन के तहत कोच, फिटनेस ट्रेनर, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य सपोर्ट स्टाफ को सिस्टेमैटिक और आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार मार्गदर्शन मिल सके।
3. स्पोर्ट्स साइंस और टेक्नोलॉजी का एकीकरण
आधुनिक खेल अब सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि डेटा, साइंस और टेक्नोलॉजी पर भी आधारित हैं। इस मिशन में स्पोर्ट्स साइंस, एनालिटिक्स, रिकवरी टेक्निक्स और नई तकनीकों को प्रशिक्षण प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा, जिससे खिलाड़ियों का प्रदर्शन और करियर दोनों सुरक्षित रह सकें।
4. प्रतियोगिताएं और लीग्स: खेल संस्कृति को बढ़ावा
खेलो इंडिया मिशन के तहत नियमित प्रतियोगिताएं और लीग्स आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा मैच प्रैक्टिस, पहचान और प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म देना है, ताकि भारत में एक मजबूत खेल संस्कृति विकसित हो सके।
5. खेल ढांचे का विकास
सरकार प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए खेल ढांचे को विकसित करेगी। इसमें आधुनिक स्टेडियम, प्रशिक्षण सुविधाएं, हॉस्टल और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होंगे, जिससे खिलाड़ी देश में ही विश्वस्तरीय तैयारी कर सकें।
सीतारमण ने कहा, 'खेल क्षेत्र रोजगार, कौशल विकास और नौकरियों के अनेक अवसर प्रदान करता है। खेलो इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से शुरू किए गए खेल प्रतिभाओं के व्यवस्थित पोषण को आगे बढ़ाते हुए, मैं खेलो इंडिया मिशन शुरू करने का प्रस्ताव करती हूं।' सीतारमण ने कहा, 'खेलो इंडिया मिशन अगले दस वर्षों में खेल क्षेत्र को बदलने का काम करेगा। इसके तहत प्रतिभा विकास से लेकर ढांचे और तकनीक तक, हर स्तर पर एक समग्र व्यवस्था बनाई जाएगी।' उन्होंने बताया कि खेलो इंडिया मिशन को पांच प्रमुख चरणों में लागू किया जाएगा, ताकि जमीनी स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक खिलाड़ियों को एक मजबूत और निरंतर विकास मार्ग मिल सके।
1. इंटीग्रेटेड टैलेंट डेवलपमेंट पाथवे
इस मिशन के तहत प्रशिक्षण केंद्रों का नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जो तीन स्तरों पर काम करेंगे-
- फाउंडेशन लेवल (शुरुआती प्रतिभाओं के लिए)
- इंटरमीडिएट लेवल (उभरते खिलाड़ियों के लिए)
- एलीट लेवल (राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के लिए)
इस व्यवस्था से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान जल्दी होगी और उन्हें सही समय पर सही प्रशिक्षण मिल सकेगा।
2. कोच और सपोर्ट स्टाफ का व्यवस्थित विकास
सरकार ने माना है कि अच्छे खिलाड़ियों के पीछे अच्छे कोच और सपोर्ट स्टाफ सबसे बड़ी ताकत होते हैं। खेलो इंडिया मिशन के तहत कोच, फिटनेस ट्रेनर, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य सपोर्ट स्टाफ को सिस्टेमैटिक और आधुनिक प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार मार्गदर्शन मिल सके।
3. स्पोर्ट्स साइंस और टेक्नोलॉजी का एकीकरण
आधुनिक खेल अब सिर्फ मेहनत नहीं, बल्कि डेटा, साइंस और टेक्नोलॉजी पर भी आधारित हैं। इस मिशन में स्पोर्ट्स साइंस, एनालिटिक्स, रिकवरी टेक्निक्स और नई तकनीकों को प्रशिक्षण प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा, जिससे खिलाड़ियों का प्रदर्शन और करियर दोनों सुरक्षित रह सकें।
4. प्रतियोगिताएं और लीग्स: खेल संस्कृति को बढ़ावा
खेलो इंडिया मिशन के तहत नियमित प्रतियोगिताएं और लीग्स आयोजित की जाएंगी। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों को ज्यादा से ज्यादा मैच प्रैक्टिस, पहचान और प्रोफेशनल प्लेटफॉर्म देना है, ताकि भारत में एक मजबूत खेल संस्कृति विकसित हो सके।
5. खेल ढांचे का विकास
सरकार प्रशिक्षण और प्रतियोगिताओं के लिए खेल ढांचे को विकसित करेगी। इसमें आधुनिक स्टेडियम, प्रशिक्षण सुविधाएं, हॉस्टल और सपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल होंगे, जिससे खिलाड़ी देश में ही विश्वस्तरीय तैयारी कर सकें।
खेल बजट
- फोटो : अमर उजाला
खेल उद्योग के लिए नई पहल
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में खेलों की बढ़ती लोकप्रियता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए खेलकूद के उच्च गुणवत्ता वाले उपकरणों का घरेलू उत्पादन समय की मांग है। उन्होंने बजट में इस दिशा में स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि सरकार खेल सामग्री के निर्माण से जुड़े उद्योगों को तकनीकी, प्रशिक्षण और गुणवत्ता मानकों के स्तर पर समर्थन देगी। निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में कहा, 'भारत में उच्च गुणवत्ता और किफायती खेलकूद सामानों का वैश्विक केंद्र बनने की पूरी क्षमता है। मैं खेलकूद के सामानों के लिए एक समर्पित पहल का प्रस्ताव करती हूं, जो इनके निर्माण, उपकरणों के डिजाइन में अनुसंधान और नवाचार के साथ-साथ मटेरियल साइंस को भी बढ़ावा देगी।'
मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा सीधा फायदा
सरकार की यह पहल सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे मेक इन इंडिया को भी मजबूती मिलेगी। खेल उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनने का मौका मिलेगा। इससे रोजगार सृजन, छोटे और मझोले उद्योगों को बढ़ावा और भारत को स्पोर्ट्स गुड्स हब बनाने में मदद मिलेगी।
वित्त मंत्री ने कहा कि भारत में खेलों की बढ़ती लोकप्रियता और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों के बेहतर प्रदर्शन को देखते हुए खेलकूद के उच्च गुणवत्ता वाले उपकरणों का घरेलू उत्पादन समय की मांग है। उन्होंने बजट में इस दिशा में स्पष्ट संकेत देते हुए कहा कि सरकार खेल सामग्री के निर्माण से जुड़े उद्योगों को तकनीकी, प्रशिक्षण और गुणवत्ता मानकों के स्तर पर समर्थन देगी। निर्मला सीतारमण ने अपने भाषण में कहा, 'भारत में उच्च गुणवत्ता और किफायती खेलकूद सामानों का वैश्विक केंद्र बनने की पूरी क्षमता है। मैं खेलकूद के सामानों के लिए एक समर्पित पहल का प्रस्ताव करती हूं, जो इनके निर्माण, उपकरणों के डिजाइन में अनुसंधान और नवाचार के साथ-साथ मटेरियल साइंस को भी बढ़ावा देगी।'
मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा सीधा फायदा
सरकार की यह पहल सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे मेक इन इंडिया को भी मजबूती मिलेगी। खेल उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम होगी और घरेलू कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनने का मौका मिलेगा। इससे रोजगार सृजन, छोटे और मझोले उद्योगों को बढ़ावा और भारत को स्पोर्ट्स गुड्स हब बनाने में मदद मिलेगी।
खेल बजट 2026
- फोटो : ANI
खेलों के बुनियादी ढांचे को भी मिलेगा बल
बजट में खेल क्षेत्र के लिए यह संकेत भी अहम है कि सरकार केवल टूर्नामेंट और प्रशिक्षण तक सीमित न रहकर पूरे खेल इकोसिस्टम को मजबूत करना चाहती है। उच्च गुणवत्ता वाले खेल उपकरणों की उपलब्धता से जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को बेहतर संसाधन मिलेंगे, जिससे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रदर्शन और बेहतर हो सकता है।
बजट में खेल क्षेत्र के लिए यह संकेत भी अहम है कि सरकार केवल टूर्नामेंट और प्रशिक्षण तक सीमित न रहकर पूरे खेल इकोसिस्टम को मजबूत करना चाहती है। उच्च गुणवत्ता वाले खेल उपकरणों की उपलब्धता से जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को बेहतर संसाधन मिलेंगे, जिससे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का प्रदर्शन और बेहतर हो सकता है।
खेल बजट 2026
- फोटो : ANI
पिछले साल कितनी हुई थी वृद्धि
पिछली बार केंद्र सरकार ने खेल बजट में 352 करोड़ रुपये की वृद्धि की थी। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए खेलों को 3794.30 करोड़ रुपये मिले थे, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 के 3442.32 करोड़ से 352 करोड़ ज्यादा था। पिछले साल खेल मंत्रालय को 1000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
पिछली बार केंद्र सरकार ने खेल बजट में 352 करोड़ रुपये की वृद्धि की थी। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए खेलों को 3794.30 करोड़ रुपये मिले थे, जो वित्तीय वर्ष 2024-25 के 3442.32 करोड़ से 352 करोड़ ज्यादा था। पिछले साल खेल मंत्रालय को 1000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे।
खेल बजट 2026
- फोटो : ANI
पिछली बार खेलो इंडिया को हुआ था सर्वाधिक फायदा
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में खेलो इंडिया को 1000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जबकि 2024-25 में खेलो इंडिया को 900 करोड़ आवंटित किए गए। इस तरह खेलो इंडिया को पिछली बार सर्वाधिक 100 करोड़ फायदा हुआ था।
- सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में खेलो इंडिया में भारी निवेश किया है क्योंकि यह कार्यक्रम देश के सभी हिस्सों से प्रतिभाओं को सामने लाने का काम करता है।
- वित्तीय वर्ष 2022-23 में खेलो इंडिया का वास्तविक आवंटन 596.39 करोड़ रुपये था। अगले साल (2023-24) के बजट में लगभग 400 करोड़ रुपये से अधिक बढ़ाकर 1,000 करोड़ रुपये कर दिया गया था। बाद में इसे हालांकि संशोधित कर 880 करोड़ रुपये किया गया था।
- खेलो इंडिया युवा खेलों 2018 (केआईवाईजी) की शुरुआत के बाद से सरकार ने इसमें और खेल आयोजनों को जोड़ना जारी रखा है। मंत्रालय ने उसी वर्ष खेलो इंडिया शीतकालीन खेल और 2023 में खेलो इंडिया पैरा खेलों शुरू करने के साथ 2020 में खेलो इंडिया विश्वविद्यालय खेलों की शुरुआत की।
- देश भर में सैकड़ों खेलो इंडिया राज्य उत्कृष्टता केंद्र (केआईएससीई) स्थापित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य प्रतिभाशाली उदीयमान खिलाड़ियों को सुविधाएं प्रदान करना है। खेलो इंडिया के कई एथलीट ओलंपिक दल में भी शामिल होते हैं। धिनिधि देसिंघु इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं।
