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AI Copyright: एआई से बने कंटेंट पर नए नियमों की तैयारी में इंडोनेशिया, जानें क्यों बढ़ी टेक कंपनियों की चिंता

Sat, 18 Jul 2026 09:49 AM IST
जागृति टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Sat, 18 Jul 2026 09:49 AM IST
सार

AI Copyright Law: एआई की लगातार बढ़ रहे इस्तेमाल से अब दुनिया भर की सरकारें इस बात से परेशान हैं कि इन मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए इंसानों की ओर से बनाए गए कंटेंट का अंधाधुंध इस्तेमाल कैसे रोका जाए? इसी बीच इंडोनेशिया ने इस समस्या से निजात पाने के लिए एक बड़ा कदम उठा लिया है। जिसके चलते सरकार और बड़ी टेक कंपनियों के बीच एक टकराव शुरू हो गया है।आइए जानते हैं यह नियम क्या है? और इससे टेक दिग्गजों को क्या समस्या है?
 

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इंडोनेशिया AI कॉपीराइट बिल - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

Indonesia AI Copyright Bill: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इंडोनेशिया अपने कॉपीराइट कानून में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। यह प्रस्ताव पास होते ही यह दक्षिण-पूर्व एशिया का ऐसा पहला देश बन जाएगा, जो एआई को सीधे अपने कॉपीराइट कानून के दायरे में ले आएगा। इस ड्राफ्ट में AI की मदद से बने कंटेंट, न्यूज पब्लिशर्स के अधिकार और टेक कंपनियों की जिम्मेदारियों से जुड़े कई नए प्रावधान शामिल किए गए हैं। खास बात यहां पर है कि इसमें एआई से जुड़े काम करने वालों को अधिकार तो मिलेंगे ही, साथ ही टेक कंपनियों की जेब भी ढीली हो सकती है। आइए जानते हैं यह प्रस्ताव क्या है? और इसकी हर एक बात विस्तार से...
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AI से बने कंटेंट को कब मिलेगा कॉपीराइट?
संसद में पेश हुए बिल के अनुसार, एआई की सहायता से तैयार किए गए कंटेंट को कॉपीराइट सुरक्षा मिल सकती है, लेकिन इसके लिए उसमें मानवीय योगदान यानी ह्यूमन इंवोलमेंट का होना जरूरी होगा। हालांकि बिल में अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कितना मानवीय योगदान आवश्यक होगा। वहीं, पूरी तरह एआई की ओर से तैयार किए गए कंटेंट को कॉपीराइट सुरक्षा नहीं मिलेगी।
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AI से किसी क्रिएटर का स्टाइल कॉपी करना होगा प्रतिबंधित
  • प्रस्तावित कानून में यह भी कहा गया है कि एआई का इस्तेमाल करके किसी क्रिएटर की खास लेखनी शैली की नकल करना भी प्रतिबंधित है। 
  • इसके अलावा अगर किसी कंटेंट को तैयार करने में एआई का उपयोग किया गया है, तो इसका खुलाना करना अनिवार्य होगा।

प्रस्तावित बिल से टेक दिग्गजों को क्या समस्या है?
  • ड्राफ्ट बिल के तहत अगर कोई टेक प्लेटफॉर्म किसी न्यूज कंटेंट को एग्रीगेट करता है, दोबारा प्रकाशित करता है, लिंक प्रिव्यू दिखाता है और AI मॉडल को ट्रेन करने के लिए उसका इस्तेमाल करता है, तो उसे मुआवजा देना होगा। 
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  • यह भुगतान राज्य-नियंत्रित सामूहिक प्रबंधन संगठनों को किया जाएगा, जो आगे इसे न्यूज पब्लिशर्स में बांटेगे। हालांकि यह नियम केवल समाचार सामग्री तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि वीडियो गेम, फोटोग्राफी, कंप्यूटर प्रोग्राम, पत्रकारिता और फिल्मों जैसे कई प्रकार के कंटेंट पर भी लागू होंगे।
AI ट्रेनिंग पर भी लागू होंगे नए नियम
इतना ही नहीं, बिल में एआई मॉडल्स की ट्रेनिंग के लिए कॉपीराइट सामग्री के इस्तेमाल को फेयर-यूज या लाइसेंसिंग एग्रीमेंट के दायरे में रखा गया है। यानी कोई भी बिना तय नियमों के कॉपीराइटेड कंटेंट का उपयोग नहीं किया जा सकेगा।

टेक कंपनियों ने जताई चिंता
  • इन प्रस्तावित नियमों पर बौद्धिक संपदा (IP) और एंटरटेनमेंट कानून के विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव टेक कंपनियों के लिए नई चुनौतियां पैदा कर सकता है, क्योंकि इसमें AI के व्यावसायिक और रिसर्च उपयोग के बीच स्पष्ट अंतर नहीं किया गया है।
  • इस पर गूगल का बयान भी सामने आया है। कॉपीराइट सुधार की आलोचना करते हुए कंपनी का कहना है कि अत्यधिक सख्त नियम नवाचार की रफ्तार को धीमा कर सकते हैं और इंडोनेशिया में डिजिटल निवेश को प्रभावित कर सकते हैं। बिल का पालन न करने पर कंपनियों के स्थानीय बिजनेस परमिट रद्द किए जाने का भी प्रावधान प्रस्तावित है। फिलहाल मेटा और टिकटॉक  ने इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

इंडोनेशिया की नई रणनीति
  • इंडोनेशिया AI तकनीक को तेजी से अपनाने की दिशा में काम कर रहा है। हाल ही में वह उन 29 देशों में शामिल हुआ है जिन्होंने शंघाई में प्रस्तावित अंतर-सरकारी AI संगठन के समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।
  • इस पहल के दौरान चीन ने विकासशील देशों के साथ ओपन-सोर्स एआई तकनीक साझा करने और AI के लिए नई वैश्विक व्यवस्था बनाने की बात भी रखी।
दुनिया के अन्य देशों में क्या हैं नियम?
  • यूरोपीय संघ (EU) के एआई एक्ट के तहत AI से तैयार या संशोधित कंटेंट, जैसे डीपफेक, पर स्पष्ट लेबलिंग अनिवार्य है।
  • वहीं अमेरिका और सिंगापुर में अभी AI का कॉपीराइट कानून में स्पष्ट नहीं है, लेकिन कॉपीराइट सुरक्षा के लिए मानवीय योगदान को जरूरी माना जाता है।
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