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Social Media Ban बेअसर: उम्र छुपाकर इंस्टाग्राम-यूट्यूब चला रहे बच्चे; जानें अब क्या करेगी ऑस्ट्रेलियाई सरकार

Fri, 26 Jun 2026 03:34 PM IST
Jagriti टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Jagriti Updated Fri, 26 Jun 2026 03:34 PM IST
सार

Social media ban failure: बच्चों को डिजिटल नुकसान से बचाने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया का पहला सोशल मीडिया एज बैन कानून तो लागू कर दिया, लेकिन बच्चे अभी भी खूब इंस्टाग्राम और यूट्यूब चला रहे हैं। जिसके बाद अब ऑस्ट्रेलियाई सरकार इसे और भी सख्त करने की तैयारी में है। तो क्या अब यह सख्त नियम  बच्चों को रोक पाएंगे, आइए जानते हैं विस्तार से...
 

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Australia Plans Tougher Social Media Rules After Child Ban Shows Limited Impact
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : एआई जनरेटेड

विस्तार

Australia Social Media Ban: ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन किया था। जिसका उद्देश्य उन्हें ऑनलाइन होने वाले संभावित मानसिक और शारीरिक नुकसान से बचाना था, लेकिन हाल में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च ने सरकार को चौंका दिया। स्टडी में सामने आया कि इस कानून का शुरुआती असर सीमित रहा। सोशल मीडिया बैन के बावजूद बड़ी संख्या में किशोर अब भी इंस्टाग्राम, यूट्यूब और अन्य प्लेटफॉर्म का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं।
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Social Media Ban for Children: कितने बच्चें अभी भी कर रहे सोशल मीडिया का इस्तेमाल?
यह स्टडी 12 से 15 साल के करीब 408 ऑस्ट्रेलियाई बच्चों के ऊपर की गई, जिसकी रिपोर्ट ने इस बैन की पोल खोल दी।
  • बैन के बाद का आंकड़ा: कानून लागू होने के तीन महीने बाद भी 85% ऑस्ट्रेलियाई किशोर धड़ल्ले से सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे थे।
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  • कैसे खुला यह?: रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन बने रहने के लिए नाबालिग यूजर्स में से दो-तिहाई (66% से ज्यादा) ने प्लेटफॉर्म्स को आसानी से धोखा दे दिया। उन्होंने या तो अपनी उम्र 16 साल से ज्यादा दिखाई या फिर फर्जी सेल्फी अपलोड करके वेरिफिकेशन सिस्टम को वैरिफाई कर दिया।
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  • असर शून्य: स्टडी में साफ कहा गया कि इस बैन का मकसद बच्चों की सोशल मीडिया तक पहुंच को टालना और ऑनलाइन खतरों को कम करना था, लेकिन किशोरों के व्यवहार और उनके सोशल मीडिया इस्तेमाल में कोई कमी नहीं देखी गई।

Teen Social Media Usage: अब और कड़े होंगे नियम
  • इस स्टडी में सच्चाई सामने आने के बाद प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन से बात करते हुए अपने इरादे साफ कर दिए। उन्होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमारे कानून जितने संभव हो सकें उतने मजबूत हों, ताकि वे किसी भी तरह की कानूनी चुनौती का डटकर सामना कर सकें।
  • अब सरकार मुख्य फोकस देश के इंटरनेट रेगुलेटर यानी eSafety Commission को इतनी पर्याप्त ताकत और कानूनी अधिकार देना है, जिससे वह नियमों का उल्लंघन करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर सीधे और सख्त एक्शन ले सके। हालांकि, प्रधानमंत्री ने आगामी बदलावों की बारीकियों का अभी खुलासा नहीं किया है।

किन प्लेटफॉर्म्स पर सख्त होंगे नियम?
यह कानून मेटा के इंस्टाग्राम और गूगल के यूट्यूब जैसे प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लागू किया जा रहा है। इन कंपनियों को 16 साल से कम उम्र के बच्चों को अकाउंट उपलब्ध कराने से रोकने की जिम्मेदारी दी गई है।

कानूनी चुनौती भी जारी
हालांकि इस कानून को लेकर विवाद भी जारी है। रेडिट ने इस बैन को ऑस्ट्रेलिया के हाई कोर्ट में चुनौती दी है। फिलहाल यह मामला प्रारंभिक सुनवाई के चरण में है।

क्या सख्त कानून से बदलेगी तस्वीर?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि नई स्टडी ने साफ कर दिया है कि केवल कानून बनाना ही पर्याप्त नहीं है। अगर उम्र सत्यापन और प्लेटफॉर्म्स की निगरानी मजबूत नहीं होगी, तो बच्चे नियमों को दरकिनार कर सोशल मीडिया तक पहुंच बना सकते हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया अब कानून को और सख्त बनाकर इस चुनौती से निपटने की तैयारी कर रहा है।

अन्य देश भी सख्त होंगे नियम
  • इस बीच ऑस्ट्रेलिया को देखते हुए ब्रिटेन ने भी इस महीने अपने नियमों को और सख्त करने का एलान किया है, जिसमें अब गेमिंग और लाइव-स्ट्रीमिंग ऐप्स को भी दायरे में लाया जाएगा।
  • ऑस्ट्रेलियाई कम्युनिकेशंस मंत्री अनिका वेल्स और ई-सेफ्टी कमिशन ने चेतावनी दी है कि वे नियमों को सिस्टेमेटिक रूप से तोड़ने वाले प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कोर्ट जाने की पूरी तैयारी कर चुके हैं।
  • अगर कोई कंपनी दोषी पाई जाती है, तो उस पर अधिकतम लगभग 34 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी भारतीय रुपयों में 280 करोड़ से ज्यादा तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है।
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