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19 में कॉलेज छोड़ा, 24 की उम्र में बने अरबपति: कौन हैं मार्क जकरबर्ग का दायां हाथ कहलाने वाले एलेक्जेंडर वांग?
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Mon, 23 Feb 2026 04:25 PM IST
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सार
Who Is Alexander Wang: मार्क जकरबर्ग की कंपनी मेटा में इन दिनों एक युवा चेहरे की खूब चर्चा हो रही है, जिसने बहुत ही कम उम्र में वह मुकाम हासिल कर लिया जिसे पाने में लोगों को दशकों लग जाते हैं। हम बात कर रहे हैं एलेक्जेंडर वांग की, जो आज एआई (AI) और टेक्नोलॉजी की दुनिया का एक चमकता सितारा हैं।
एलेक्जेंडर वांग
- फोटो : Alexandr Wang/Instagram
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विस्तार
आमतौर पर 24 साल की उम्र में युवा अपनी पढ़ाई या नौकरी की शुरुआत के बारे में सोच रहे होते हैं, लेकिन एलेक्जेंडर वांग ने इस उम्र में इतिहास रच दिया था। साल 2021 में वह दुनिया के सबसे कम उम्र के 'सेल्फ-मेड' अरबपति बने। 'सेल्फ-मेड' यानी उन्होंने यह दौलत किसी विरासत से नहीं बल्कि अपनी काबिलियत से कमाई है। फोर्ब्स के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वांग की कुल संपत्ति लगभग 3.2 बिलियन डॉलर (करीब 29 हजार करोड़ रुपये) है।
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17 साल में पहली नौकरी और फिर एमआईटी से विदाई
न्यू मैक्सिको के रहने वाले वांग का दिमाग बचपन से ही कंप्यूटर और कोड्स में तेज चलता था। महज 17 साल की उम्र में उन्हें सिलिकॉन वैली की बड़ी कंपनियों जैसे 'ऐडेपार' और 'क्वोरा' में फुल-टाइम नौकरी मिल गई थी। इसके बाद उन्होंने मशीन लर्निंग की पढ़ाई के लिए दुनिया के प्रतिष्ठित एमआईटी (MIT) कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन उनका इरादा कुछ बड़ा करने का था। सिर्फ 19 साल की उम्र में उन्होंने अपनी कंपनी 'स्केल एआई' (Scale AI) शुरू करने के लिए कॉलेज छोड़ दिया।
स्केल एआई से मेटा तक का सफर
वांग ने 19 साल की उम्र में अपनी कंपनी स्केल एआई की स्थापना की। यह कंपनी एआई मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए डेटा लेबलिंग और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स के मूल्यांकन जैसी सेवाएं देती है। जून 2025 तक वह Scale AI के सीईओ रहे। बाद में Meta ने एक बड़ी डील के तहत कंपनी में 49% हिस्सेदारी खरीदी। इसके बाद वांग ने स्केल एआई से अलग होकर मेटा में चीफ एआई ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाली। वह फिलहाल फेसबुक के को-फाउंडर मार्क जुकरबर्ग की मेटा सुपर इंटेलिजेंस लैब्स का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके स्किल्स को देखते हुए ही जुकरबर्ग ने उन्हें यह अहम जिम्मेदारी दी है।
न्यू मैक्सिको के रहने वाले वांग का दिमाग बचपन से ही कंप्यूटर और कोड्स में तेज चलता था। महज 17 साल की उम्र में उन्हें सिलिकॉन वैली की बड़ी कंपनियों जैसे 'ऐडेपार' और 'क्वोरा' में फुल-टाइम नौकरी मिल गई थी। इसके बाद उन्होंने मशीन लर्निंग की पढ़ाई के लिए दुनिया के प्रतिष्ठित एमआईटी (MIT) कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन उनका इरादा कुछ बड़ा करने का था। सिर्फ 19 साल की उम्र में उन्होंने अपनी कंपनी 'स्केल एआई' (Scale AI) शुरू करने के लिए कॉलेज छोड़ दिया।
स्केल एआई से मेटा तक का सफर
वांग ने 19 साल की उम्र में अपनी कंपनी स्केल एआई की स्थापना की। यह कंपनी एआई मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए डेटा लेबलिंग और लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स के मूल्यांकन जैसी सेवाएं देती है। जून 2025 तक वह Scale AI के सीईओ रहे। बाद में Meta ने एक बड़ी डील के तहत कंपनी में 49% हिस्सेदारी खरीदी। इसके बाद वांग ने स्केल एआई से अलग होकर मेटा में चीफ एआई ऑफिसर की जिम्मेदारी संभाली। वह फिलहाल फेसबुक के को-फाउंडर मार्क जुकरबर्ग की मेटा सुपर इंटेलिजेंस लैब्स का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके स्किल्स को देखते हुए ही जुकरबर्ग ने उन्हें यह अहम जिम्मेदारी दी है।
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भारत दौरे पर क्या बोले?
हाल ही में एलेक्जेंडर वांग 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' में शामिल होने के लिए पहली बार भारत आए थे। भारत की तरक्की और यहां के युवाओं के जज्बे को देखकर वह काफी प्रभावित नजर आए। समिट के दौरान उन्होंने कहा कि भारत में उनका अनुभव शानदार रहा है और इस देश की प्रगति को पूरी दुनिया देख रही है। कम उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाले एलेक्जेंडर वांग आज दुनिया भर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।
हाल ही में एलेक्जेंडर वांग 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' में शामिल होने के लिए पहली बार भारत आए थे। भारत की तरक्की और यहां के युवाओं के जज्बे को देखकर वह काफी प्रभावित नजर आए। समिट के दौरान उन्होंने कहा कि भारत में उनका अनुभव शानदार रहा है और इस देश की प्रगति को पूरी दुनिया देख रही है। कम उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाले एलेक्जेंडर वांग आज दुनिया भर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।