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AI: चिप्स नहीं, 'बिजली' है एआई की सबसे बड़ी रुकावट, BlackRock के सीईओ ने दी चेतावनी
Mon, 06 Jul 2026 04:28 PM IST
Nitish Kumar
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitish Kumar
Updated Mon, 06 Jul 2026 04:28 PM IST
सार
ब्लैकरॉक के सीईओ लैरी फिंक का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के विकास में सबसे बड़ी बाधा अब एडवांस चिप्स नहीं, बल्कि बिजली की कमी है। उन्होंने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर समय रहते पावर ग्रिड को अपग्रेड नहीं किया गया, तो AI का भविष्य और अर्थव्यवस्था दोनों खतरे में पड़ सकते हैं।
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बिजली की कमी से धीमी हो सकती है एआई की रफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर अब तक सबसे ज्यादा चर्चा एडवांस चिप्स की होती रही है, लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी निवेश कंपनी ब्लैकरॉक (BlackRock) के चेयरमैन और सीईओ लैरी फिंक का मानना है कि AI की असली चुनौती कुछ और है। उनके मुताबिक, AI के विकास में सबसे बड़ी बाधा अब बिजली की कमी बनती जा रही है।
सीएनएन के एक शो में एक खास बातचीत के दौरान फिंक ने कहा कि एआई (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कंप्यूटिंग क्षमता की मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे अमेरिका के पुराने बिजली नेटवर्क की कमजोरियां भी सामने आ रही हैं।
बिजली की कमी से धीमी होगी एआई की रफ्तार
उन्होंने कहा, "अमेरिका में पर्याप्त बिजली नहीं है।" हालांकि उनका मानना है कि देश के पास प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या बिजली को सही तरीके से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की है।
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फिंक के अनुसार, अमेरिका को अपने पावर ग्रिड के विस्तार और आधुनिकीकरण पर सैकड़ों अरब डॉलर का निवेश करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो AI के क्षेत्र में आगे बढ़ना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि AI का पूरा सिस्टम बिजली पर चलता है, इसलिए मजबूत बिजली व्यवस्था बेहद जरूरी है।
AI का लोकतंत्रीकरण है जरूरी
बाजार में इस वक्त एआई कंप्यूटिंग की मांग उसकी सप्लाई से कहीं ज्यादा है। फिंक ने एक बड़ी सामाजिक चिंता जताते हुए कहा कि जेपी मॉर्गन (J.P. Morgan) या ब्लैकरॉक जैसी बड़ी और अमीर कंपनियों के पास तो इन महंगे मॉडल्स को खरीदने का पैसा है, लेकिन छोटे अस्पतालों, नगर पालिकाओं, ट्रांसपोर्ट सिस्टम और छोटे व्यवसाय इस बदलाव में पीछे रह जाएंगे। उन्होंने एआई के लोकतंत्रीकरण पर जोर दिया, ताकि समाज का हर तबका इस क्रांतिकारी तकनीक का लाभ उठा सके, अन्यथा समाज में बड़े संरचनात्मक संकट पैदा हो जाएंगे।
क्या AI सिर्फ एक बुलबुला है?
शेयर बाजार में एआई को लेकर क्या एक बुलबुला बन रहा है? फिंक ने इस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारी मांग ने बाजार में शॉर्टेज पैदा कर दी है, जिसकी वजह से कंपनियां अपने उत्पादों के मनचाहे दाम वसूल रही हैं।
ईरान तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए फिंक ने कहा कि हाल के भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद दुनिया ने अपनी मजबूती दिखाई है। वहीं, अमेरिका के बढ़ते सरकारी कर्ज पर उन्होंने कहा कि इसका सबसे अच्छा समाधान तेज आर्थिक विकास है। उनके अनुसार, अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था हर साल 3% की दर से नहीं बढ़ी, तो भविष्य में चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
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सीएनएन के एक शो में एक खास बातचीत के दौरान फिंक ने कहा कि एआई (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कंप्यूटिंग क्षमता की मांग तेजी से बढ़ रही है। इससे अमेरिका के पुराने बिजली नेटवर्क की कमजोरियां भी सामने आ रही हैं।
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बिजली की कमी से धीमी होगी एआई की रफ्तार
उन्होंने कहा, "अमेरिका में पर्याप्त बिजली नहीं है।" हालांकि उनका मानना है कि देश के पास प्राकृतिक गैस जैसे ऊर्जा संसाधनों की कमी नहीं है, लेकिन सबसे बड़ी समस्या बिजली को सही तरीके से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की है।
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फिंक के अनुसार, अमेरिका को अपने पावर ग्रिड के विस्तार और आधुनिकीकरण पर सैकड़ों अरब डॉलर का निवेश करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ, तो AI के क्षेत्र में आगे बढ़ना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने कहा कि AI का पूरा सिस्टम बिजली पर चलता है, इसलिए मजबूत बिजली व्यवस्था बेहद जरूरी है।
AI का लोकतंत्रीकरण है जरूरी
बाजार में इस वक्त एआई कंप्यूटिंग की मांग उसकी सप्लाई से कहीं ज्यादा है। फिंक ने एक बड़ी सामाजिक चिंता जताते हुए कहा कि जेपी मॉर्गन (J.P. Morgan) या ब्लैकरॉक जैसी बड़ी और अमीर कंपनियों के पास तो इन महंगे मॉडल्स को खरीदने का पैसा है, लेकिन छोटे अस्पतालों, नगर पालिकाओं, ट्रांसपोर्ट सिस्टम और छोटे व्यवसाय इस बदलाव में पीछे रह जाएंगे। उन्होंने एआई के लोकतंत्रीकरण पर जोर दिया, ताकि समाज का हर तबका इस क्रांतिकारी तकनीक का लाभ उठा सके, अन्यथा समाज में बड़े संरचनात्मक संकट पैदा हो जाएंगे।
क्या AI सिर्फ एक बुलबुला है?
शेयर बाजार में एआई को लेकर क्या एक बुलबुला बन रहा है? फिंक ने इस धारणा को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारी मांग ने बाजार में शॉर्टेज पैदा कर दी है, जिसकी वजह से कंपनियां अपने उत्पादों के मनचाहे दाम वसूल रही हैं।
ईरान तनाव और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए फिंक ने कहा कि हाल के भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद दुनिया ने अपनी मजबूती दिखाई है। वहीं, अमेरिका के बढ़ते सरकारी कर्ज पर उन्होंने कहा कि इसका सबसे अच्छा समाधान तेज आर्थिक विकास है। उनके अनुसार, अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था हर साल 3% की दर से नहीं बढ़ी, तो भविष्य में चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।