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AI Summit 2026: एआई से वैज्ञानिक क्रांति का नेतृत्व कर सकता है भारत, एआई समिट में बोले गूगल डीपमाइंड प्रमुख
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नीतीश कुमार
Updated Thu, 19 Feb 2026 01:27 PM IST
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सार
Demis Hassabis at AI Impact Summit 2026: इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हसाबिस ने कहा कि भारत एआई आधारित वैज्ञानिक खोजों में वैश्विक नेतृत्व कर सकता है। उन्होंने कृषि, रचनात्मक उद्योगों और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में एआई की बड़ी संभावनाएं गिनाईं।
डेमिस हसाबिस, सीईओ, गूगल डीप माइंड
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
गूगल डीपमाइंड (Google DeepMind) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डेमिस हसाबिस ने कहा है कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए वैज्ञानिक उपलब्धियों में दुनिया का नेतृत्व कर सकता है। नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में 18 फरवरी को बोलते हुए हसाबिस ने भारतीय छात्रों और शोध समुदाय की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि देश के विश्वविद्यालयों और इनोवेशन इकोसिस्टम में ऊर्जा और उत्साह साफ दिखाई देता है।
ताकत वाले क्षेत्रों में एआई को ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ बनाएं
हसाबिस ने सुझाव दिया कि भारत को उन क्षेत्रों पर दोगुना ध्यान देना चाहिए, जहां वह पहले से मजबूत है। उनके मुताबिक, एआई को इन क्षेत्रों में “फोर्स मल्टीप्लायर” यानी क्षमता बढ़ाने वाले साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे देश अपनी बढ़त को और मजबूत कर सके।
उन्होंने कृषि क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि एआई की मदद से फसलों की मजबूती (क्रॉप रेजिलिएंस) बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा, उन्होंने बॉलीवुड और रचनात्मक उद्योगों में भी एआई की बड़ी भूमिका बताई। उनके अनुसार, एआई टूल्स नई तरह की कहानियां कहने में मदद कर सकते हैं और फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को अधिक कुशल बना सकते हैं।
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ताकत वाले क्षेत्रों में एआई को ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ बनाएं
हसाबिस ने सुझाव दिया कि भारत को उन क्षेत्रों पर दोगुना ध्यान देना चाहिए, जहां वह पहले से मजबूत है। उनके मुताबिक, एआई को इन क्षेत्रों में “फोर्स मल्टीप्लायर” यानी क्षमता बढ़ाने वाले साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे देश अपनी बढ़त को और मजबूत कर सके।
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उन्होंने कृषि क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि एआई की मदद से फसलों की मजबूती (क्रॉप रेजिलिएंस) बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा, उन्होंने बॉलीवुड और रचनात्मक उद्योगों में भी एआई की बड़ी भूमिका बताई। उनके अनुसार, एआई टूल्स नई तरह की कहानियां कहने में मदद कर सकते हैं और फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को अधिक कुशल बना सकते हैं।
सरकार के साथ सहयोग को तैयार
हसाबिस ने कहा कि गूगल डीपमाइंड भारत सरकार के साथ गहरा सहयोग करने के लिए तैयार है। यदि सरकार साझेदारी चाहती है, तो कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां कंपनी तकनीकी और शोध सहयोग दे सकती है।
एजीआई पर क्या बोले हसाबिस?
आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) के विकास पर बोलते हुए हसाबिस ने कहा कि उन्नत एआई सिस्टम भविष्य में वैज्ञानिक खोजों को तेज करने और बीमारियों, जलवायु परिवर्तन और असमानता जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा एआई तकनीकें अभी उस स्तर तक नहीं पहुंची हैं, जहां उन्हें पूर्ण एजीआई कहा जा सके। उनके अनुमान के मुताबिक, एजीआई के शुरुआती रूप अगले पांच से सात वर्षों में दिखाई दे सकते हैं, जबकि पूरी तरह विकसित स्वरूप आने में एक या दो दशक लग सकते हैं।
जोखिमों पर भी जताई चिंता
हसाबिस ने AI से जुड़े जोखिमों पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए जरूरी है कि मजबूत सुरक्षा उपाय (गार्डरेल्स) बनाए जाएं, ताकि बढ़ती क्षमता वाले एआई सिस्टम अंततः मानवता के हित में काम करें।
हसाबिस ने कहा कि गूगल डीपमाइंड भारत सरकार के साथ गहरा सहयोग करने के लिए तैयार है। यदि सरकार साझेदारी चाहती है, तो कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां कंपनी तकनीकी और शोध सहयोग दे सकती है।
एजीआई पर क्या बोले हसाबिस?
आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस (AGI) के विकास पर बोलते हुए हसाबिस ने कहा कि उन्नत एआई सिस्टम भविष्य में वैज्ञानिक खोजों को तेज करने और बीमारियों, जलवायु परिवर्तन और असमानता जैसी वैश्विक चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा एआई तकनीकें अभी उस स्तर तक नहीं पहुंची हैं, जहां उन्हें पूर्ण एजीआई कहा जा सके। उनके अनुमान के मुताबिक, एजीआई के शुरुआती रूप अगले पांच से सात वर्षों में दिखाई दे सकते हैं, जबकि पूरी तरह विकसित स्वरूप आने में एक या दो दशक लग सकते हैं।
जोखिमों पर भी जताई चिंता
हसाबिस ने AI से जुड़े जोखिमों पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि रोजगार पर पड़ने वाले प्रभाव जैसे मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसलिए जरूरी है कि मजबूत सुरक्षा उपाय (गार्डरेल्स) बनाए जाएं, ताकि बढ़ती क्षमता वाले एआई सिस्टम अंततः मानवता के हित में काम करें।